भागलपुर की धरती से भारतीय कृषि में नवाचार, तकनीक और सतत विकास की प्रेरणादायक यात्रा
भारत की पहचान उसकी कृषि, संस्कृति और गाँवों से है। सदियों से किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सभ्यता के आधार रहे हैं। आज जब कृषि विज्ञान, तकनीक और नवाचार के नए दौर से गुजर रही है, तब कुछ ऐसे लोग हैं जो इस परिवर्तन को केवल देख नहीं रहे, बल्कि उसका नेतृत्व भी कर रहे हैं। उन्हीं प्रेरणादायक व्यक्तित्वों में एक नाम है श्रीमती रिमी सिंह, जो Sansar Green की संस्थापक (Founder), तकनीकी विशेषज्ञ, उद्यमी तथा “मिट्टी से मंडी (Soil to Market)” मिशन की प्रमुख प्रेरणाशक्ति हैं।
बिहार के भागलपुर में जन्मी और बरहरी गाँव, गोराडीह प्रखंड से संबंध रखने वाली रिमी सिंह ने अपने जीवन की शुरुआत एक ऐसे परिवार से की, जहाँ खेती, अनुशासन, सेवा और शिक्षा जीवन के मूल आधार थे। आज वे उन महिलाओं में शामिल हैं जो यह सिद्ध कर रही हैं कि आधुनिक तकनीक और भारतीय कृषि मिलकर किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
भागलपुर – कृषि, संस्कृति और गौरव की धरती
बिहार का भागलपुर केवल अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कृषि समृद्धि के लिए भी पूरे देश में प्रसिद्ध है। विशेष रूप से भागलपुर का GI टैग प्राप्त जर्दालू आम अपनी अनूठी सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण भारत की पहचान बन चुका है। यह आम हर वर्ष देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारियों तक पहुँचता है और भागलपुर की कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करता है।
रिमी सिंह को गर्व है कि जिस भूमि ने उन्हें जन्म दिया, वही भूमि आज अपने जर्दालू आम, मेहनती किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं के कारण पूरे देश में भागलपुर का नाम रोशन कर रही है। उनके लिए भागलपुर केवल जन्मभूमि नहीं, बल्कि प्रेरणा, संस्कृति और कृषि नवाचार की भूमि है।

किसान परिवार से मिली प्रेरणा
रिमी सिंह का जन्म बिहार के भागलपुर जिले के बराहरी गाँव, गोराडीह प्रखंड में एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ कृषि और सेवा दोनों जीवन का अभिन्न हिस्सा थे।
उनके पिता श्री नित्यानंद सिंह बिहार सरकार के सिंचाई विभाग (Irrigation Department) में अभियंता (Engineer) के पद पर कार्यरत रहे। अपने सरकारी दायित्वों के साथ-साथ वे खेती-किसानी से भी गहराई से जुड़े रहे और सिंचाई व्यवस्था, जल प्रबंधन तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का व्यापक अनुभव रखते थे।
उनकी माता श्रीमती कौशल्या देवी ने परिवार में कृषि परंपराओं, ग्रामीण जीवन के संस्कार, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और परिश्रम के मूल्यों को सहेजकर रखा। बचपन से ही रिमी सिंह ने अपने माता-पिता से खेती, सिंचाई, मिट्टी, जल संरक्षण, फसलों की देखभाल और किसानों की वास्तविक चुनौतियों को बहुत निकट से समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनके व्यक्तित्व, सोच और कृषि के प्रति समर्पण की मजबूत नींव बने।
शिक्षा जिसने दी नई सोच
कृषि से गहरा जुड़ाव होने के साथ-साथ रिमी सिंह ने आधुनिक शिक्षा को भी उतना ही महत्व दिया।
उन्होंने Bachelor of Computer Applications (BCA) तथा Master of Computer Applications (MCA) की शिक्षा प्राप्त की। कंप्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सिस्टम और सॉफ्टवेयर प्रबंधन में उनकी विशेषज्ञता ने आगे चलकर Sansar Green की तकनीकी सोच को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका मानना है कि भविष्य की कृषि केवल खेतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डेटा, डिजिटल प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचेगी।
एक परिवार, एक सपना और एक मिशन
रिमी सिंह का विवाह प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, कृषि उद्यमी (Agripreneur) एवं “मिट्टी से मंडी” मिशन के प्रणेता श्री राजीव सिंह से हुआ।
दोनों का साझा सपना केवल एक सफल संस्था का निर्माण करना नहीं था, बल्कि ऐसा कृषि मॉडल विकसित करना था जो भारतीय किसानों को मिट्टी परीक्षण, वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद, प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार तक पहुँचाने का एक समग्र समाधान प्रदान करे।
वे गिरिडीह के एक प्रतिष्ठित परिवार की पुत्रवधू हैं। उनके ससुर स्वर्गीय श्री कृष्णदेव सिंह गिरिडीह के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता थे, जबकि उनकी सास स्वर्गीय श्रीमती संसार देवी अत्यंत दयालु, सरल, करुणामयी एवं समाजसेवी महिला थीं। उन्होंने अपने जीवन में सेवा, मानवता, पारिवारिक संस्कार और समाज कल्याण को सर्वोच्च स्थान दिया। उनका स्नेह, त्याग और समाज के प्रति समर्पण पूरे परिवार के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहा। उन्हीं की पावन स्मृति और आदर्शों को अमर बनाने के उद्देश्य से “हरित संसार” अभियान की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा समाज को हरित एवं समृद्ध बनाना है। रिमी सिंह अपने जीवन और कार्यों में स्वर्गीय श्रीमती संसार देवी से मिले सेवा, संवेदनशीलता, करुणा और प्रकृति प्रेम के मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करती हैं।
Sansar Green – जहाँ तकनीक और कृषि साथ चलते हैं
Sansar Green की स्थापना के साथ ही रिमी सिंह ने यह स्पष्ट रूप से समझ लिया कि आने वाले समय की कृषि तकनीक आधारित होगी।
अपने MCA के ज्ञान का उपयोग करते हुए उन्होंने डिजिटल कृषि, किसान शिक्षा, सूचना प्रबंधन, ऑनलाइन प्रशिक्षण, डिजिटल ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स, कृषि जागरूकता और तकनीकी संचार जैसे क्षेत्रों को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
आज Sansar Green का उद्देश्य केवल कृषि उत्पाद उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों तक वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक तकनीक और टिकाऊ कृषि समाधान पहुँचाना है।
ज्ञान, अनुसंधान और संस्थागत सहयोग
रिमी सिंह का विश्वास है कि किसी भी कृषि संगठन की सबसे बड़ी ताकत उसका ज्ञान और अनुसंधान होता है।
इसी सोच के साथ उन्होंने Sansar Green को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सीखने और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
इनमें प्रमुख हैं—
- IIM Bangalore
- BAU Sabour
- IIT (ISM) Dhanbad
- Kerala Agricultural University
इन संस्थानों से प्राप्त अनुभवों ने कृषि अनुसंधान, जैविक खेती, कृषि नवाचार और तकनीकी विकास की दिशा में संस्था की सोच को और मजबूत किया।
“मिट्टी से मंडी” – किसानों के लिए एक समग्र मॉडल
रिमी सिंह का मानना है कि किसान की सफलता केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
जब किसान को स्वस्थ मिट्टी, वैज्ञानिक सलाह, गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन और उचित बाजार मिलेगा, तभी उसकी वास्तविक आय और जीवन स्तर में सुधार आएगा।
इसी सोच को आधार बनाकर “मिट्टी से मंडी (Soil to Market)” मॉडल विकसित किया गया, जो कृषि की पूरी श्रृंखला को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास करता है।
डिजिटल माध्यम से कृषि शिक्षा
रिमी सिंह का विश्वास है कि यदि वैज्ञानिक कृषि ज्ञान सरल भाषा में डिजिटल माध्यम से किसानों तक पहुँचे, तो कृषि में बड़ा परिवर्तन संभव है।
इसी उद्देश्य से Sansar Green और Rimi Garden जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं, जहाँ बागवानी, पौध पोषण, जैव उर्वरक, जैविक खेती, फल एवं फूल उत्पादन, गृह उद्यान, टेरेस गार्डनिंग तथा आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ी जानकारी साझा की जाती है।
इनका उद्देश्य किसानों, विद्यार्थियों, बागवानी प्रेमियों और आम नागरिकों तक उपयोगी कृषि ज्ञान पहुँचाना है।
हरित संसार – प्रकृति के प्रति समर्पण
रिमी सिंह का मानना है कि कृषि और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।
इसी सोच के साथ वे हरित संसार अभियान से जुड़ी हैं, जो वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, जलवायु जागरूकता और हरित जीवनशैली को बढ़ावा देने वाला एक जन-आंदोलन है।
यह अभियान लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भारत बनाने का संदेश देता है।

महिलाओं के लिए प्रेरणा
रिमी सिंह आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो शिक्षा, तकनीक, कृषि और उद्यमिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहती हैं।
उन्होंने यह दिखाया है कि एक महिला परिवार, तकनीक, व्यवसाय और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाते हुए भी बड़े सपनों को साकार कर सकती है।
उनकी यात्रा बताती है कि निरंतर सीखने की इच्छा, मेहनत, ईमानदारी और समाज के प्रति समर्पण किसी भी व्यक्ति को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।
भविष्य की सोच
रिमी सिंह का सपना है कि Sansar Green कृषि विज्ञान, आधुनिक तकनीक और सतत विकास के क्षेत्र में एक विश्वसनीय और नवाचार आधारित संस्था के रूप में अपनी पहचान बनाए।
वे चाहती हैं कि “मिट्टी से मंडी” मॉडल देश के अधिक से अधिक किसानों तक पहुँचे, ताकि प्रत्येक किसान ज्ञान, तकनीक, गुणवत्तापूर्ण कृषि समाधान और बेहतर बाजार से जुड़कर आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बन सके।
उनका विश्वास है कि जब विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण और किसान एक साथ आगे बढ़ेंगे, तभी भारत की कृषि वास्तव में आत्मनिर्भर, समृद्ध और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।
प्रेरणादायक संदेश
भागलपुर की मिट्टी से निकली रिमी सिंह की यह यात्रा केवल एक सफल उद्यमी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस नई भारतीय सोच का प्रतीक है जिसमें परंपरा, शिक्षा, तकनीक और समाज सेवा का सुंदर संगम दिखाई देता है।
आज वे हजारों महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और नवोदित उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि जब ज्ञान, तकनीक, सेवा और प्रकृति के प्रति समर्पण एक साथ चलते हैं, तब परिवर्तन केवल संभव नहीं होता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास का नया मार्ग भी प्रशस्त करता है।
“जब ज्ञान हर किसान तक पहुँचे, तकनीक हर गाँव तक पहुँचे और प्रकृति हर परिवार की जिम्मेदारी बने, तभी भारत का कृषि भविष्य वास्तव में समृद्ध और आत्मनिर्भर होगा।”
