🌱 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित
रांची स्थित उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में हाल ही में जैविक खेती (Organic Farming) और टिकाऊ कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर कृषि नवाचार, पर्यावरण स्थिरता और किसानों को सशक्त बनाने में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘संसार ग्रीन’ और ‘हरित संसार’ के संस्थापक राजीव सिंह को सम्मानित किया गया। 🙏
विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान, उन्होंने निदेशक और वरिष्ठ संकाय सदस्यों के साथ एक सार्थक संवाद किया। इस चर्चा का मुख्य केंद्र झारखंड में जैविक कृषि का भविष्य, कृषि अनुसंधान, उभरती हुई तकनीकें, किसान प्रशिक्षण और ग्रामीण उद्यमिता (Rural Entrepreneurship) रहा।
🌿 जैविक खेती: झारखंड के लिए एक सुनहरा अवसर
झारखंड की समृद्ध जैव विविधता, अनुकूल जलवायु और पारंपरिक कृषि पद्धतियां प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं।
कृषि के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ लाना अत्यंत आवश्यक है। वैज्ञानिक मृदा परीक्षण (Soil Testing) के माध्यम से मिट्टी और फसलों की सटीक पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से समझा जा सकता है। इससे किसान रसायनों के सामान्य उपयोग से हटकर, जरूरत-आधारित और सटीक खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

🔬 स्थानीय मिट्टी के लिए स्थानीय समाधान
चूंकि अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सूक्ष्म पोषक तत्वों और लाभदायक सूक्ष्मजीवों का स्तर अलग-अलग होता है, इसलिए कृषि समाधान भी स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होने चाहिए।
संसार ग्रीन इसी वैज्ञानिक और एकीकृत दृष्टिकोण पर काम कर रहा है, जिसका मुख्य ध्यान निम्नलिखित बातों पर है:
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मिट्टी के अनुकूल बायो-इनपुट (Bio-inputs) और सूक्ष्मजैविक समाधान (Microbial solutions)।
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सटीक मृदा परीक्षण और फसल आधारित सलाह।
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किसानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना (Market linkages)।
🌳 हरित संसार: खेतों से परे एक सामाजिक मिशन
कृषि के अलावा, हरित संसार प्राकृतिक खेती, पर्यावरण जागरूकता, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण के प्रति एक व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। इसका विजन किसानों, छात्रों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों को एक साथ लाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना और एक हरा-भरा भविष्य तैयार करना है।
👨🌾 युवाओं और किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर
जैविक कृषि झारखंड में ग्रामीण उद्यमिता का एक प्रमुख चालक बन सकती है। युवाओं को कृषि को एक नवाचार (Innovation) के रूप में देखने के लिए प्रेरित करने से ग्रामीण समुदायों में आजीविका के कई नए अवसर पैदा हो सकते हैं, जैसे:
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बायो-इनपुट उत्पादन और कृषि प्रसंस्करण (Agricultural processing)।
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मूल्य संवर्धन (Value addition) और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग।
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तकनीकी सेवाएं और नए एग्री-स्टार्टअप्स (Agri-startups)।
🚜 “खेत से मंडी तक” का एक व्यापक दृष्टिकोण
इस सम्मान को प्राप्त करने के बाद अपने विचार साझा करते हुए राजीव सिंह ने कहा:
“यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह मुझे अधिक जिम्मेदारी और नई प्रेरणा देता है। मेरा सपना है कि झारखंड के किसान अपनी मिट्टी की वास्तविक क्षमता को समझें और विज्ञान, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक आत्मनिर्भर और समृद्ध बनें।”
“खेत से मंडी तक” (From Soil to Mandi) का यह दृष्टिकोण एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखता है, जो मिट्टी की जांच से लेकर तकनीक, प्रशिक्षण और अंततः बाजार तक पहुंच को एक सूत्र में पिरोता हो।
🤝 एक साझा भविष्य: शिक्षाविद, विज्ञान, किसान और युवा
झारखंड में टिकाऊ कृषि का भविष्य बनाने में विश्वविद्यालयों, कृषि वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, उद्यमियों, किसानों और युवाओं का संयुक्त सहयोग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिक सोच और मजबूत सामुदायिक भागीदारी के साथ, झारखंड जैविक खेती का अपना एक विशिष्ट और सफल मॉडल विकसित कर सकता है।
🙏 इस सम्मान, आतिथ्य और सार्थक संवाद के लिए उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी का हार्दिक आभार। यह पहचान झारखंड के किसानों, मिट्टी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए और भी अधिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने की एक बड़ी प्रेरणा है। 🌱
स्वस्थ मिट्टी • समृद्ध किसान • हरा-भरा झारखंड 🌾
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