गांडेय (गिरिडीह), 26 सितंबर 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ने और गांवों में कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित करने के उद्देश्य से गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड अंतर्गत गजकुंडा गांव में शनिवार को किसानों के साथ एक विशेष किसान चौपाल एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने स्थानीय किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि में रुचि रखने वाले लोगों के साथ सीधे संवाद किया। इस दौरान खेती की वर्तमान चुनौतियों, मिट्टी की घटती उर्वरता, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों, फलदार पौधों के माध्यम से अतिरिक्त आय, कृषि प्रशिक्षण तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर सोनाली शर्मा, शुभम कुमार और आंचल सिंह सहित स्थानीय किसानों, युवाओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में कृषि विकास की संभावनाओं और किसानों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर अपने विचार साझा किए।
मिट्टी की सेहत से शुरू होगी टिकाऊ खेती
चौपाल के दौरान राजीव सिंह ने कहा कि खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता का आधार स्वस्थ मिट्टी है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से जैविक पदार्थों, कम्पोस्ट, वर्मीकंपोस्ट, बायो-फर्टिलाइजर्स और लाभकारी सूक्ष्मजीव आधारित कृषि इनपुट्स को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने किसानों को फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही पोषक तत्वों के प्रयोग तथा समय-समय पर मृदा परीक्षण कराने के महत्व की जानकारी दी।
‘हर गाँव फल बगान’ से आय और हरियाली दोनों बढ़ाने की पहल
बैठक में ‘हर गाँव फल बगान’ अभियान पर विशेष चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य गांवों में उपलब्ध खाली जमीन, घरों के आसपास के स्थान, खेतों की मेड़ और उपयुक्त कृषि भूमि पर फलदार पौधों को बढ़ावा देना है।
इसके तहत किसानों और ग्रामीण परिवारों को आम, अमरूद, नींबू, कटहल और आंवला जैसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फलदार पौधे लगाने तथा वैज्ञानिक तरीके से उनका संरक्षण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
राजीव सिंह ने कहा कि यदि फलदार पौधों को योजनाबद्ध तरीके से लगाया जाए तो इससे ग्रामीण परिवारों को पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाले वर्षों में अतिरिक्त और स्थायी आय का स्रोत भी मिल सकता है।

किसानों को प्रशिक्षण और मृदा परीक्षण से जोड़ने की योजना
चर्चा के दौरान Sansar Institute of Agricultural Research & Training (SIART) के माध्यम से गांडेय क्षेत्र में किसानों को चरणबद्ध रूप से वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खाद निर्माण, पौध प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने की योजना साझा की गई।
किसानों के लिए मृदा परीक्षण एवं व्यावहारिक कृषि प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि किसान अनुमान के बजाय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर फसल एवं पोषण प्रबंधन से जुड़े निर्णय ले सकें।
बाजार से सीधा जुड़ाव और FPO को मजबूत करने पर जोर
किसानों ने चौपाल के दौरान बताया कि उत्पादन के बाद उपज का उचित मूल्य प्राप्त करना आज भी बड़ी चुनौती है। कई बार बाजार की सही जानकारी नहीं होने और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
इस पर राजीव सिंह ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सामूहिक विपणन, स्थानीय स्तर पर ग्रेडिंग-पैकिंग तथा डिजिटल मार्केट लिंकेज को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती; किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ना होगा।
“किसान की समृद्धि की शुरुआत स्वस्थ मिट्टी से होती है। हमारा प्रयास है कि किसान वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करें, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें और अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करें। गांडेय के गांवों में कृषि, हरियाली और ग्रामीण उद्यमिता को साथ लेकर आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।”
— राजीव सिंह, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, संसार ग्रीन
किसानों ने रखीं स्थानीय समस्याएं
संवाद के दौरान किसानों ने सिंचाई सुविधाओं की कमी, गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट्स की उपलब्धता, मिट्टी की जांच, तकनीकी मार्गदर्शन तथा फसलों का उचित बाजार मूल्य जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
राजीव सिंह ने कहा कि स्थानीय जरूरतों को समझकर ही प्रभावी कृषि मॉडल विकसित किया जा सकता है। संसार ग्रीन की ओर से किसानों को तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और आवश्यक कृषि मार्गदर्शन से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे।
सोनाली शर्मा, शुभम कुमार और आंचल सिंह ने भी किसानों के साथ संवाद करते हुए स्थानीय स्तर पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा कृषि और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों को गांवों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

गजकुंडा में होगी जैविक कृषि एवं मृदा संरक्षण कार्यशाला
चौपाल के अंत में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित योजना के तहत अगले माह गजकुंडा गांव में एक दिवसीय ‘जैविक कृषि एवं मृदा संरक्षण कार्यशाला’ आयोजित करने की तैयारी की जाएगी।
कार्यशाला में किसानों को जैविक खाद एवं कम्पोस्ट तैयार करने, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फलदार पौधों के रोपण एवं देखभाल, जैविक कृषि इनपुट्स के सही उपयोग और टिकाऊ खेती की व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
इस पहल को आगे चलकर गांडेय प्रखंड के अन्य गांवों तक विस्तारित करने की भी योजना है, ताकि मिट्टी की सेहत, किसान की आय, ग्रामीण उद्यमिता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए स्थानीय स्तर पर टिकाऊ कृषि विकास का मॉडल तैयार किया जा सके।
