Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/rajeev-singh-sansar-green/ (मिलकर लाएँ हरियाली) Sun, 27 Sep 2026 07:43:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://haritsansar.com/wp-content/uploads/2026/05/cropped-Logo-harit-sansar-32x32.png Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/rajeev-singh-sansar-green/ 32 32 गढ़वा विश्वविद्यालय की कृषि तकनीक से झारखंड के किसानों को जोड़ने की पहल : राजीव सिंह https://haritsansar.com/rajeev-singh-garhwa-university-agriculture-jharkhand-farmers/ Sun, 27 Sep 2026 05:47:13 +0000 https://haritsansar.com/?p=2136 प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए राजीव सिंह; कृषि विशेषज्ञों के साथ बैठक में गिरिडीह के किसानों तक तकनीक, प्रशिक्षण और शोध का लाभ पहुंचाने पर हुई चर्चा गिरिडीह। गढ़वा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रथम दीक्षांत Read More ...

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प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए राजीव सिंह; कृषि विशेषज्ञों के साथ बैठक में गिरिडीह के किसानों तक तकनीक, प्रशिक्षण और शोध का लाभ पहुंचाने पर हुई चर्चा

गिरिडीह। गढ़वा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रथम दीक्षांत समारोह में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह को उद्योग विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया। समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह, वरिष्ठ शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में आयोजित समारोह में राजीव सिंह ने भी मंच से अपने विचार साझा किए।

दीक्षांत समारोह के बाद राजीव सिंह ने विश्वविद्यालय के कृषि क्षेत्र से जुड़े शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के साथ विशेष बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालय में उपलब्ध कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी विशेषज्ञता को झारखंड के किसानों, विशेष रूप से गिरिडीह क्षेत्र के किसानों से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

राजीव सिंह ने कहा—खेतों तक पहुंचे विश्वविद्यालय का कृषि ज्ञान

बैठक में मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन, टिकाऊ खेती, जैव एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीक, किसान प्रशिक्षण, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

चर्चा का विशेष फोकस इस बात पर रहा कि किसानों की स्थानीय समस्याओं और खेत स्तर की वास्तविक परिस्थितियों को कृषि विशेषज्ञों तक पहुंचाया जाए तथा विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के पास उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान एवं तकनीक का व्यावहारिक लाभ किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाए।

राजीव सिंह ने कहा, “विश्वविद्यालयों में विकसित कृषि ज्ञान और तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह खेत और किसान तक पहुंचे। हमारा प्रयास रहेगा कि गिरिडीह सहित झारखंड के किसानों को गढ़वा विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों, नई तकनीकों और प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ा जा सके।”

Rajeev Singh seated on stage with Jharkhand Governor Santosh Kumar Gangwar, Garhwa University Chancellor, Vice Chancellor and university dignitaries during the First Convocation.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के मंच पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ उद्योग विशेषज्ञ राजीव सिंह।

राजीव सिंह ने कृषि विशेषज्ञों से मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीक पर की चर्चा

बैठक के दौरान बदलती कृषि परिस्थितियों में मृदा स्वास्थ्य सुधार और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन की आवश्यकता पर चर्चा हुई। जैविक एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीकों के उपयोग, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समाधान विकसित करने और किसानों तक व्यावहारिक जानकारी पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

राजीव सिंह ने कहा कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच नियमित संवाद विकसित होने से खेत स्तर की समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में मदद मिल सकती है। किसानों के व्यावहारिक अनुभव और विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक विशेषज्ञता को जोड़कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल समाधान विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।

किसान प्रशिक्षण और तकनीकी संवाद पर राजीव सिंह का जोर

बैठक में भविष्य में किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञ संवाद, कृषि तकनीक प्रदर्शन और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसी गतिविधियों के माध्यम से इस संपर्क को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

इसका उद्देश्य किसानों को केवल नई तकनीकों की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि कृषि विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का अवसर उपलब्ध कराना भी है, ताकि वे मृदा, फसल, पोषण, उत्पादन और अन्य कृषि संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

राजीव सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय, कृषि विशेषज्ञ, कृषि उद्यम और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से शोध और तकनीक का जमीनी स्तर पर उपयोग बढ़ाया जा सकता है। इससे विश्वविद्यालयों में उपलब्ध ज्ञान और किसानों के खेत स्तर के अनुभव के बीच एक प्रभावी सेतु तैयार हो सकता है।

Rajeev Singh with Garhwa University Vice Chancellor Dr. M. K. Singh and university team during the First Convocation, discussing agriculture and farmer-focused initiatives.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं विश्वविद्यालय की टीम के साथ उद्योग विशेषज्ञ एवं संसार ग्रीन के संस्थापक राजीव सिंह।

गिरिडीह के किसानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर : राजीव सिंह

राजीव सिंह ने गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल होने और कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद के अवसर को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संस्थागत संपर्क भविष्य में गिरिडीह सहित झारखंड के किसानों को कृषि तकनीक, प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जोड़ने में उपयोगी हो सकते हैं।

संसार ग्रीन के माध्यम से भी किसानों, कृषि विशेषज्ञों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तकनीकी संवाद को आगे बढ़ाने तथा कृषि ज्ञान को खेत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

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हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित https://haritsansar.com/rajeev-singh-sansar-green-harit-sansar-green-jharkhand-vision/ Thu, 20 Aug 2026 16:08:29 +0000 https://haritsansar.com/?p=2122 🌱 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित रांची स्थित उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में हाल ही में जैविक खेती (Organic Farming) और टिकाऊ कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण Read More ...

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🌱 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित

रांची स्थित उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में हाल ही में जैविक खेती (Organic Farming) और टिकाऊ कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर कृषि नवाचार, पर्यावरण स्थिरता और किसानों को सशक्त बनाने में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘संसार ग्रीन’ और ‘हरित संसार’ के संस्थापक राजीव सिंह को सम्मानित किया गया। 🙏
विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान, उन्होंने निदेशक और वरिष्ठ संकाय सदस्यों के साथ एक सार्थक संवाद किया। इस चर्चा का मुख्य केंद्र झारखंड में जैविक कृषि का भविष्य, कृषि अनुसंधान, उभरती हुई तकनीकें, किसान प्रशिक्षण और ग्रामीण उद्यमिता (Rural Entrepreneurship) रहा।

🌿 जैविक खेती: झारखंड के लिए एक सुनहरा अवसर

झारखंड की समृद्ध जैव विविधता, अनुकूल जलवायु और पारंपरिक कृषि पद्धतियां प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं।
कृषि के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ लाना अत्यंत आवश्यक है। वैज्ञानिक मृदा परीक्षण (Soil Testing) के माध्यम से मिट्टी और फसलों की सटीक पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से समझा जा सकता है। इससे किसान रसायनों के सामान्य उपयोग से हटकर, जरूरत-आधारित और सटीक खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
राजीव सिंह, संस्थापक संसार ग्रीन एवं हरित संसार, उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी रांची में सम्मान ग्रहण करते हुए। मुलाकात के दौरान झारखंड में जैविक खेती, मिट्टी आधारित कृषि समाधान, आधुनिक तकनीक, किसान सशक्तिकरण और हरित झारखंड के विजन पर चर्चा हुई।
उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी, रांची में संसार ग्रीन एवं हरित संसार के संस्थापक राजीव सिंह को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर झारखंड में जैविक कृषि के भविष्य, मृदा स्वास्थ्य, स्थानीय कृषि समाधान और किसानों को विज्ञान एवं बाजार से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ।

🔬 स्थानीय मिट्टी के लिए स्थानीय समाधान

चूंकि अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सूक्ष्म पोषक तत्वों और लाभदायक सूक्ष्मजीवों का स्तर अलग-अलग होता है, इसलिए कृषि समाधान भी स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होने चाहिए।
संसार ग्रीन इसी वैज्ञानिक और एकीकृत दृष्टिकोण पर काम कर रहा है, जिसका मुख्य ध्यान निम्नलिखित बातों पर है:
  • मिट्टी के अनुकूल बायो-इनपुट (Bio-inputs) और सूक्ष्मजैविक समाधान (Microbial solutions)।
  • सटीक मृदा परीक्षण और फसल आधारित सलाह।
  • किसानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना (Market linkages)।

🌳 हरित संसार: खेतों से परे एक सामाजिक मिशन

कृषि के अलावा, हरित संसार प्राकृतिक खेती, पर्यावरण जागरूकता, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण के प्रति एक व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। इसका विजन किसानों, छात्रों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों को एक साथ लाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना और एक हरा-भरा भविष्य तैयार करना है।

👨‍🌾 युवाओं और किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर

जैविक कृषि झारखंड में ग्रामीण उद्यमिता का एक प्रमुख चालक बन सकती है। युवाओं को कृषि को एक नवाचार (Innovation) के रूप में देखने के लिए प्रेरित करने से ग्रामीण समुदायों में आजीविका के कई नए अवसर पैदा हो सकते हैं, जैसे:
  • बायो-इनपुट उत्पादन और कृषि प्रसंस्करण (Agricultural processing)।
  • मूल्य संवर्धन (Value addition) और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग।
  • तकनीकी सेवाएं और नए एग्री-स्टार्टअप्स (Agri-startups)।

🚜 “खेत से मंडी तक” का एक व्यापक दृष्टिकोण

इस सम्मान को प्राप्त करने के बाद अपने विचार साझा करते हुए राजीव सिंह ने कहा:
“यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह मुझे अधिक जिम्मेदारी और नई प्रेरणा देता है। मेरा सपना है कि झारखंड के किसान अपनी मिट्टी की वास्तविक क्षमता को समझें और विज्ञान, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक आत्मनिर्भर और समृद्ध बनें।”
“खेत से मंडी तक” (From Soil to Mandi) का यह दृष्टिकोण एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखता है, जो मिट्टी की जांच से लेकर तकनीक, प्रशिक्षण और अंततः बाजार तक पहुंच को एक सूत्र में पिरोता हो।

🤝 एक साझा भविष्य: शिक्षाविद, विज्ञान, किसान और युवा

झारखंड में टिकाऊ कृषि का भविष्य बनाने में विश्वविद्यालयों, कृषि वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, उद्यमियों, किसानों और युवाओं का संयुक्त सहयोग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिक सोच और मजबूत सामुदायिक भागीदारी के साथ, झारखंड जैविक खेती का अपना एक विशिष्ट और सफल मॉडल विकसित कर सकता है।
🙏 इस सम्मान, आतिथ्य और सार्थक संवाद के लिए उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी का हार्दिक आभार। यह पहचान झारखंड के किसानों, मिट्टी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए और भी अधिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने की एक बड़ी प्रेरणा है। 🌱
स्वस्थ मिट्टी • समृद्ध किसान • हरा-भरा झारखंड 🌾
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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा https://haritsansar.com/rajeev-singh-prof-sukumar-mishra-soil-testing-iit-ism-dhanbad/ Sun, 09 Aug 2026 14:18:06 +0000 https://haritsansar.com/?p=2116 आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण पहल धनबाद | 9 अगस्त 2026 कृषि Read More ...

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण पहल

धनबाद | 9 अगस्त 2026

कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और किसान-केंद्रित नवाचार को नई दिशा देने की पहल के तहत गिरिडीह के उद्यमी एवं Sansar Green Mission Pvt. Ltd. के निदेशक राजीव सिंह ने आईआईटी-आईएसएम धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य और कृषि तकनीक के भविष्य पर सार्थक संवाद किया।

यह बातचीत आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण नवाचार संगोष्ठी के दौरान हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नवाचारकों की भागीदारी वाले इस राष्ट्रीय आयोजन ने कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक और नवाचार पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

मिट्टी की समस्या से तकनीकी समाधान तक

राजीव सिंह ने इस अवसर पर मृदा परीक्षण से जुड़े अपने प्रोटोटाइप की अवधारणा प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ साझा की। पहल का मूल उद्देश्य किसानों के लिए मृदा परीक्षण को अधिक सरल, व्यावहारिक और उपयोगी बनाना है, ताकि वे अपनी मिट्टी की वास्तविक स्थिति और पोषक तत्वों की जरूरत को बेहतर तरीके से समझ सकें।

राजीव सिंह के अनुसार, वैज्ञानिक जानकारी तभी प्रभावी होती है जब वह किसान के निर्णय लेने में उपयोगी साबित हो। इसी सोच के साथ मृदा परीक्षण की जानकारी को फसल पोषण और कृषि प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान-केंद्रित तकनीक पर जोर

प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ चर्चा में मृदा स्वास्थ्य, तकनीक आधारित कृषि, किसान-केंद्रित नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी समाधानों को खेत तक पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

संवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कृषि तकनीक केवल प्रयोगशाला या शोध संस्थानों तक सीमित न रहे। तकनीक ऐसी होनी चाहिए जिसे किसान समझ सकें, अपनाना आसान हो और जिसका सीधा उपयोग कृषि प्रबंधन में किया जा सके।

राजीव सिंह ने कहा कि वास्तविक कृषि नवाचार की शुरुआत किसान की समस्या को समझने से होती है। यदि तकनीक किसान की वास्तविक जरूरत का समाधान नहीं करती, तो उसका प्रभाव सीमित रह जाता है।

मृदा स्वास्थ्य को केंद्र में रखने की पहल

मिट्टी कृषि उत्पादन की बुनियाद है। मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उसकी स्थिति की बेहतर जानकारी किसानों को फसल एवं पोषण प्रबंधन के संबंध में अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

मृदा परीक्षण की प्रस्तावित पहल इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका लक्ष्य वैज्ञानिक मृदा जानकारी को अधिक व्यावहारिक बनाना और किसान को अपने खेत की वास्तविक स्थिति समझने में सक्षम बनाना है।

इस दृष्टिकोण में तकनीक केवल परीक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसान के लिए निर्णय लेने में सहायता देने वाला उपकरण बन सकती है।

गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक

राजीव सिंह के लिए यह संवाद गिरिडीह से निकलकर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के राष्ट्रीय मंच तक कृषि नवाचार को ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

झारखंड के जिलों में कृषि से जुड़ी कई स्थानीय चुनौतियां हैं, जिनके समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक और उद्यमिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे राष्ट्रीय मंच स्थानीय नवाचारकों को वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से जोड़ने का अवसर देते हैं।

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची यह पहल झारखंड में उभरते एग्री-टेक क्षेत्र और किसान-केंद्रित नवाचार की संभावनाओं को भी सामने लाती है।

विज्ञान और किसान के बीच सेतु

कृषि में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान की वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। तकनीकी संस्थान ज्ञान और अनुसंधान उपलब्ध कराते हैं, जबकि किसान खेत में वास्तविक परिस्थितियों से जूझते हैं।

कृषि उद्यमिता इन दोनों के बीच एक प्रभावी सेतु का काम कर सकती है।

प्रो. सुकुमार मिश्रा और राजीव सिंह के बीच हुई चर्चा इसी संभावित जुड़ाव की दिशा में एक सार्थक संवाद के रूप में सामने आई, जिसमें विज्ञान, तकनीक और कृषि को एक साथ जोड़कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

झारखंड के एग्री-टेक भविष्य की संभावनाएं

झारखंड में कृषि तकनीक, मृदा स्वास्थ्य, टिकाऊ कृषि और किसान-केंद्रित नवाचार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। गिरिडीह जैसे जिलों से निकलने वाले उद्यमियों और नवाचारकों को राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों से जोड़ना इस क्षेत्र को नई गति दे सकता है।

राजीव सिंह की राष्ट्रीय तकनीकी मंच पर भागीदारी इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर शुरू की गई पहल राष्ट्रीय स्तर के संवाद का हिस्सा बन सकती है।

आगे की दिशा

मृदा परीक्षण की इस अवधारणा को आगे विकसित करने के लिए तकनीकी विकास, वैज्ञानिक मूल्यांकन और खेत स्तर पर व्यावहारिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे। राष्ट्रीय तकनीकी संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ संवाद इस प्रक्रिया को मजबूत आधार दे सकता है।

Sansar Green Mission का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ऐसे समाधान विकसित करना है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किसानों की वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखें।

राजीव सिंह का मानना है कि कृषि का भविष्य ऐसी तकनीक में है, जो किसान के लिए समझने योग्य हो और खेत में वास्तविक उपयोगिता पैदा करे।

मिट्टी की बेहतर समझ, बेहतर निर्णय और बेहतर कृषि—यही किसान-केंद्रित तकनीकी नवाचार की दिशा है। 🌱🇮🇳

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में कृषि नवाचार पर सार्थक संवाद, राजीव सिंह ने प्रस्तुत की मृदा परीक्षण की अवधारणा https://haritsansar.com/rajeev-singh-jharkhand-agri-innovation-iit-ism-dhanbad/ Sun, 09 Aug 2026 12:58:52 +0000 https://haritsansar.com/?p=2112 आईआईटी-आईएसएम धनबाद में कृषि नवाचार पर सार्थक संवाद, राजीव सिंह ने प्रस्तुत की मृदा परीक्षण की अवधारणा गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक पहुंचा किसान-केंद्रित कृषि नवाचार धनबाद | 9 अगस्त 2026 कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और नवाचार को बढ़ावा Read More ...

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में कृषि नवाचार पर सार्थक संवाद, राजीव सिंह ने प्रस्तुत की मृदा परीक्षण की अवधारणा
गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक पहुंचा किसान-केंद्रित कृषि नवाचार
धनबाद | 9 अगस्त 2026

कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में गिरिडीह के उद्यमी एवं Sansar Green Mission Pvt. Ltd. के निदेशक राजीव सिंह ने आईआईटी-आईएसएम धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ मृदा परीक्षण एवं किसान-केंद्रित तकनीकी समाधानों की अवधारणा पर सार्थक चर्चा की।

यह संवाद आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण नवाचार संगोष्ठी के दौरान हुआ। राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर से वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, स्टार्टअप और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागी शामिल हुए।

मृदा परीक्षण के प्रोटोटाइप की अवधारणा साझा
इस अवसर पर राजीव सिंह ने अपने मृदा परीक्षण प्रोटोटाइप की अवधारणा प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य किसानों के लिए मिट्टी की स्थिति और पोषक तत्वों की आवश्यकता को समझने की प्रक्रिया को अधिक सरल, वैज्ञानिक, व्यावहारिक और सुलभ बनाना है।

राजीव सिंह ने बताया कि किसानों को अपनी मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो, तो वे फसल एवं पोषण प्रबंधन से जुड़े निर्णय अधिक वैज्ञानिक तरीके से ले सकते हैं। इसी सोच के साथ मृदा परीक्षण से जुड़े तकनीकी समाधान पर काम किया जा रहा है।

किसान-केंद्रित तकनीक पर जोर
प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ चर्चा के दौरान मृदा स्वास्थ्य, तकनीक आधारित कृषि, किसान-केंद्रित समाधान, अनुसंधान तथा नवाचार को खेत तक पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

चर्चा में इस बात पर जोर रहा कि कृषि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित होकर खेतों तक पहुंचे।

राजीव सिंह का मानना है कि किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझकर विकसित की गई तकनीक ही सार्थक कृषि नवाचार है। मृदा परीक्षण को अधिक सुलभ बनाने से किसान अपनी मिट्टी की आवश्यकताओं को बेहतर समझ सकते हैं और उसी आधार पर कृषि प्रबंधन की योजना बना सकते हैं।

राष्ट्रीय तकनीकी मंच पर झारखंड की भागीदारी
आईआईटी-आईएसएम धनबाद जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान में आयोजित इस संगोष्ठी में गिरिडीह से कृषि नवाचार का प्रतिनिधित्व झारखंड के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय मंच पर देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच राजीव सिंह की भागीदारी झारखंड में उभरते एग्री-टेक क्षेत्र, स्थानीय प्रतिभा और किसान-केंद्रित उद्यमिता की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है।

इस तरह के मंच स्थानीय नवाचारकों को देश के प्रमुख वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों से जोड़ने और अनुसंधान, तकनीक तथा उद्यमिता के बीच सहयोग की नई संभावनाएं विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विज्ञान और किसान के बीच सेतु बनाने की पहल
राजीव सिंह का व्यापक उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और किसानों की वास्तविक जरूरतों को एक साथ जोड़कर ऐसे समाधान विकसित करना है, जो कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने में योगदान दे सकें।

गिरिडीह से शुरू हुई यह पहल आईआईटी-आईएसएम धनबाद के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर विकसित कृषि नवाचारों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पैदा करने की क्षमता है।

मिट्टी की बेहतर समझ से बेहतर पोषण, बेहतर फसल और समृद्ध किसान। 🌱🇮🇳

फोटो कैप्शन
आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान आईआईटी-आईएसएम के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ Sansar Green Mission के निदेशक राजीव सिंह।

प्रमुख विषय
मृदा परीक्षण | मृदा स्वास्थ्य | कृषि नवाचार | एग्री-टेक | किसान-केंद्रित तकनीक | वैज्ञानिक कृषि | झारखंड नवाचार | गिरिडीह | आईआईटी-आईएसएम धनबाद

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हरित संसार के प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजीव सिंह ने किसानों को किया प्रेरित, 700 आम के पौधों का किया वितरण https://haritsansar.com/rajeev-singh-harit-sansar-natural-farming-programme-giridih-jharkhand/ Tue, 28 Jul 2026 15:24:06 +0000 https://haritsansar.com/?p=2094 बिरनी (गिरिडीह), झारखंड। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से संसार ग्रीन की सामाजिक एवं पर्यावरणीय पहल हरित संसार द्वारा गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड में एक विशाल प्राकृतिक खेती जागरूकता एवं किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का Read More ...

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बिरनी (गिरिडीह), झारखंड।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से संसार ग्रीन की सामाजिक एवं पर्यावरणीय पहल हरित संसार द्वारा गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड में एक विशाल प्राकृतिक खेती जागरूकता एवं किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिरनी एवं आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक खेती की आधुनिक एवं व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं हरित संसार अभियान के प्रणेता श्री राजीव सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक खेती को केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और बेहतर भविष्य का आधार बताया।

अपने प्रेरणादायक संबोधन में श्री राजीव सिंह ने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि किसान रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर आगे बढ़ें। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी भूमि की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण करने और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाएं।

उन्होंने कहा कि “किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि प्रकृति के सच्चे रक्षक हैं। यदि किसान प्राकृतिक खेती अपनाएंगे और प्रत्येक परिवार एक पेड़ लगाएगा, तो हमारा गांव, हमारा जिला और पूरा देश हराभरा एवं समृद्ध बन सकता है।”

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हरित संसार पौधारोपण अभियान के अंतर्गत 700 आम के पौधों का निःशुल्क वितरण रहा। किसानों को इन पौधों का नियमित संरक्षण एवं देखभाल करने के साथ-साथ अपने गांवों में अधिक से अधिक पौधारोपण करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की दीर्घकालिक आय में वृद्धि करना तथा फलदार वृक्षों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।

Rajeev Singh, Founder of Sansar Green, distributing 700 mango saplings to farmers during the Harit Sansar Plantation Drive in Birni, Giridih, Jharkhand, promoting agroforestry, natural farming, and environmental sustainability.
Rajeev Singh distributed 700 mango saplings to farmers at the Harit Sansar Plantation Drive in Birni, Giridih, encouraging tree plantation, natural farming, and sustainable rural development.

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। इनमें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपाय, जैविक एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीकें, जैव उर्वरकों का उपयोग, जल संरक्षण, कम लागत में अधिक उत्पादन तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली जैसे विषय शामिल थे। किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान अपनी समस्याएं साझा कीं तथा विशेषज्ञों से उनके व्यावहारिक समाधान प्राप्त किए।

श्री राजीव सिंह ने किसानों से हरित संसार आंदोलन से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को जनआंदोलन बनाना है। उन्होंने प्रत्येक किसान से अपने गांव में हरित दूत (Green Ambassador) बनने और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने की अपील की।

कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने, अपने खेतों की मिट्टी को स्वस्थ बनाने, पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का सामूहिक संकल्प लिया।

संसार ग्रीन का हरित संसार अभियान देशभर में प्राकृतिक खेती, वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई दिशा देने के साथ-साथ एक स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Rajeev Singh, Founder of Sansar Green and leader of the Harit Sansar Movement, distributing 700 mango saplings to farmers during a plantation campaign in Birni, Giridih, Jharkhand, promoting tree plantation, sustainable agriculture, and environmental conservation.
Rajeev Singh distributed 700 mango saplings to farmers in Birni, Giridih, under the Harit Sansar Plantation Campaign, reinforcing Sansar Green’s mission of creating greener villages through plantation and sustainable farming.

राजीव सिंह का संदेश

“प्राकृतिक खेती केवल खेती करने का तरीका नहीं, बल्कि धरती माता, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। आइए, हर खेत को प्राकृतिक बनाएं और हर गांव को हराभरा बनाएं।”

— राजीव सिंह
संस्थापक, संसार ग्रीन एवं हरित संसार अभियान

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