आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा

Rajeev Singh, Director of Sansar Green Mission, discussing soil testing, soil health and farmer-centric agricultural technology with Prof. Sukumar Mishra, Director of IIT (ISM) Dhanbad.

आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण पहल

धनबाद | 9 अगस्त 2026

कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और किसान-केंद्रित नवाचार को नई दिशा देने की पहल के तहत गिरिडीह के उद्यमी एवं Sansar Green Mission Pvt. Ltd. के निदेशक राजीव सिंह ने आईआईटी-आईएसएम धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य और कृषि तकनीक के भविष्य पर सार्थक संवाद किया।

यह बातचीत आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण नवाचार संगोष्ठी के दौरान हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नवाचारकों की भागीदारी वाले इस राष्ट्रीय आयोजन ने कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक और नवाचार पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

मिट्टी की समस्या से तकनीकी समाधान तक

राजीव सिंह ने इस अवसर पर मृदा परीक्षण से जुड़े अपने प्रोटोटाइप की अवधारणा प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ साझा की। पहल का मूल उद्देश्य किसानों के लिए मृदा परीक्षण को अधिक सरल, व्यावहारिक और उपयोगी बनाना है, ताकि वे अपनी मिट्टी की वास्तविक स्थिति और पोषक तत्वों की जरूरत को बेहतर तरीके से समझ सकें।

राजीव सिंह के अनुसार, वैज्ञानिक जानकारी तभी प्रभावी होती है जब वह किसान के निर्णय लेने में उपयोगी साबित हो। इसी सोच के साथ मृदा परीक्षण की जानकारी को फसल पोषण और कृषि प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान-केंद्रित तकनीक पर जोर

प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ चर्चा में मृदा स्वास्थ्य, तकनीक आधारित कृषि, किसान-केंद्रित नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी समाधानों को खेत तक पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

संवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कृषि तकनीक केवल प्रयोगशाला या शोध संस्थानों तक सीमित न रहे। तकनीक ऐसी होनी चाहिए जिसे किसान समझ सकें, अपनाना आसान हो और जिसका सीधा उपयोग कृषि प्रबंधन में किया जा सके।

राजीव सिंह ने कहा कि वास्तविक कृषि नवाचार की शुरुआत किसान की समस्या को समझने से होती है। यदि तकनीक किसान की वास्तविक जरूरत का समाधान नहीं करती, तो उसका प्रभाव सीमित रह जाता है।

मृदा स्वास्थ्य को केंद्र में रखने की पहल

मिट्टी कृषि उत्पादन की बुनियाद है। मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उसकी स्थिति की बेहतर जानकारी किसानों को फसल एवं पोषण प्रबंधन के संबंध में अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

मृदा परीक्षण की प्रस्तावित पहल इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका लक्ष्य वैज्ञानिक मृदा जानकारी को अधिक व्यावहारिक बनाना और किसान को अपने खेत की वास्तविक स्थिति समझने में सक्षम बनाना है।

इस दृष्टिकोण में तकनीक केवल परीक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसान के लिए निर्णय लेने में सहायता देने वाला उपकरण बन सकती है।

गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक

राजीव सिंह के लिए यह संवाद गिरिडीह से निकलकर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के राष्ट्रीय मंच तक कृषि नवाचार को ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

झारखंड के जिलों में कृषि से जुड़ी कई स्थानीय चुनौतियां हैं, जिनके समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक और उद्यमिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे राष्ट्रीय मंच स्थानीय नवाचारकों को वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से जोड़ने का अवसर देते हैं।

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची यह पहल झारखंड में उभरते एग्री-टेक क्षेत्र और किसान-केंद्रित नवाचार की संभावनाओं को भी सामने लाती है।

विज्ञान और किसान के बीच सेतु

कृषि में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान की वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। तकनीकी संस्थान ज्ञान और अनुसंधान उपलब्ध कराते हैं, जबकि किसान खेत में वास्तविक परिस्थितियों से जूझते हैं।

कृषि उद्यमिता इन दोनों के बीच एक प्रभावी सेतु का काम कर सकती है।

प्रो. सुकुमार मिश्रा और राजीव सिंह के बीच हुई चर्चा इसी संभावित जुड़ाव की दिशा में एक सार्थक संवाद के रूप में सामने आई, जिसमें विज्ञान, तकनीक और कृषि को एक साथ जोड़कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

झारखंड के एग्री-टेक भविष्य की संभावनाएं

झारखंड में कृषि तकनीक, मृदा स्वास्थ्य, टिकाऊ कृषि और किसान-केंद्रित नवाचार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। गिरिडीह जैसे जिलों से निकलने वाले उद्यमियों और नवाचारकों को राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों से जोड़ना इस क्षेत्र को नई गति दे सकता है।

राजीव सिंह की राष्ट्रीय तकनीकी मंच पर भागीदारी इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर शुरू की गई पहल राष्ट्रीय स्तर के संवाद का हिस्सा बन सकती है।

आगे की दिशा

मृदा परीक्षण की इस अवधारणा को आगे विकसित करने के लिए तकनीकी विकास, वैज्ञानिक मूल्यांकन और खेत स्तर पर व्यावहारिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे। राष्ट्रीय तकनीकी संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ संवाद इस प्रक्रिया को मजबूत आधार दे सकता है।

Sansar Green Mission का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ऐसे समाधान विकसित करना है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किसानों की वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखें।

राजीव सिंह का मानना है कि कृषि का भविष्य ऐसी तकनीक में है, जो किसान के लिए समझने योग्य हो और खेत में वास्तविक उपयोगिता पैदा करे।

मिट्टी की बेहतर समझ, बेहतर निर्णय और बेहतर कृषि—यही किसान-केंद्रित तकनीकी नवाचार की दिशा है। 🌱🇮🇳