Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/harit-sansar-jharkhand/ (मिलकर लाएँ हरियाली) Sun, 27 Sep 2026 07:43:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://haritsansar.com/wp-content/uploads/2026/05/cropped-Logo-harit-sansar-32x32.png Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/harit-sansar-jharkhand/ 32 32 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित https://haritsansar.com/rajeev-singh-sansar-green-harit-sansar-green-jharkhand-vision/ Thu, 20 Aug 2026 16:08:29 +0000 https://haritsansar.com/?p=2122 🌱 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित रांची स्थित उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में हाल ही में जैविक खेती (Organic Farming) और टिकाऊ कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण Read More ...

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🌱 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित

रांची स्थित उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में हाल ही में जैविक खेती (Organic Farming) और टिकाऊ कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर कृषि नवाचार, पर्यावरण स्थिरता और किसानों को सशक्त बनाने में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘संसार ग्रीन’ और ‘हरित संसार’ के संस्थापक राजीव सिंह को सम्मानित किया गया। 🙏
विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान, उन्होंने निदेशक और वरिष्ठ संकाय सदस्यों के साथ एक सार्थक संवाद किया। इस चर्चा का मुख्य केंद्र झारखंड में जैविक कृषि का भविष्य, कृषि अनुसंधान, उभरती हुई तकनीकें, किसान प्रशिक्षण और ग्रामीण उद्यमिता (Rural Entrepreneurship) रहा।

🌿 जैविक खेती: झारखंड के लिए एक सुनहरा अवसर

झारखंड की समृद्ध जैव विविधता, अनुकूल जलवायु और पारंपरिक कृषि पद्धतियां प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं।
कृषि के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ लाना अत्यंत आवश्यक है। वैज्ञानिक मृदा परीक्षण (Soil Testing) के माध्यम से मिट्टी और फसलों की सटीक पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से समझा जा सकता है। इससे किसान रसायनों के सामान्य उपयोग से हटकर, जरूरत-आधारित और सटीक खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
राजीव सिंह, संस्थापक संसार ग्रीन एवं हरित संसार, उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी रांची में सम्मान ग्रहण करते हुए। मुलाकात के दौरान झारखंड में जैविक खेती, मिट्टी आधारित कृषि समाधान, आधुनिक तकनीक, किसान सशक्तिकरण और हरित झारखंड के विजन पर चर्चा हुई।
उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी, रांची में संसार ग्रीन एवं हरित संसार के संस्थापक राजीव सिंह को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर झारखंड में जैविक कृषि के भविष्य, मृदा स्वास्थ्य, स्थानीय कृषि समाधान और किसानों को विज्ञान एवं बाजार से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ।

🔬 स्थानीय मिट्टी के लिए स्थानीय समाधान

चूंकि अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सूक्ष्म पोषक तत्वों और लाभदायक सूक्ष्मजीवों का स्तर अलग-अलग होता है, इसलिए कृषि समाधान भी स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होने चाहिए।
संसार ग्रीन इसी वैज्ञानिक और एकीकृत दृष्टिकोण पर काम कर रहा है, जिसका मुख्य ध्यान निम्नलिखित बातों पर है:
  • मिट्टी के अनुकूल बायो-इनपुट (Bio-inputs) और सूक्ष्मजैविक समाधान (Microbial solutions)।
  • सटीक मृदा परीक्षण और फसल आधारित सलाह।
  • किसानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना (Market linkages)।

🌳 हरित संसार: खेतों से परे एक सामाजिक मिशन

कृषि के अलावा, हरित संसार प्राकृतिक खेती, पर्यावरण जागरूकता, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण के प्रति एक व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। इसका विजन किसानों, छात्रों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों को एक साथ लाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना और एक हरा-भरा भविष्य तैयार करना है।

👨‍🌾 युवाओं और किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर

जैविक कृषि झारखंड में ग्रामीण उद्यमिता का एक प्रमुख चालक बन सकती है। युवाओं को कृषि को एक नवाचार (Innovation) के रूप में देखने के लिए प्रेरित करने से ग्रामीण समुदायों में आजीविका के कई नए अवसर पैदा हो सकते हैं, जैसे:
  • बायो-इनपुट उत्पादन और कृषि प्रसंस्करण (Agricultural processing)।
  • मूल्य संवर्धन (Value addition) और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग।
  • तकनीकी सेवाएं और नए एग्री-स्टार्टअप्स (Agri-startups)।

🚜 “खेत से मंडी तक” का एक व्यापक दृष्टिकोण

इस सम्मान को प्राप्त करने के बाद अपने विचार साझा करते हुए राजीव सिंह ने कहा:
“यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह मुझे अधिक जिम्मेदारी और नई प्रेरणा देता है। मेरा सपना है कि झारखंड के किसान अपनी मिट्टी की वास्तविक क्षमता को समझें और विज्ञान, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक आत्मनिर्भर और समृद्ध बनें।”
“खेत से मंडी तक” (From Soil to Mandi) का यह दृष्टिकोण एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखता है, जो मिट्टी की जांच से लेकर तकनीक, प्रशिक्षण और अंततः बाजार तक पहुंच को एक सूत्र में पिरोता हो।

🤝 एक साझा भविष्य: शिक्षाविद, विज्ञान, किसान और युवा

झारखंड में टिकाऊ कृषि का भविष्य बनाने में विश्वविद्यालयों, कृषि वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, उद्यमियों, किसानों और युवाओं का संयुक्त सहयोग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिक सोच और मजबूत सामुदायिक भागीदारी के साथ, झारखंड जैविक खेती का अपना एक विशिष्ट और सफल मॉडल विकसित कर सकता है।
🙏 इस सम्मान, आतिथ्य और सार्थक संवाद के लिए उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी का हार्दिक आभार। यह पहचान झारखंड के किसानों, मिट्टी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए और भी अधिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने की एक बड़ी प्रेरणा है। 🌱
स्वस्थ मिट्टी • समृद्ध किसान • हरा-भरा झारखंड 🌾
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IGKV रायपुर में राजीव सिंह ने बताया ग्रामीण उद्यमिता का परिवर्तनकारी सामर्थ्य https://haritsansar.com/rajeev-singh-rural-entrepreneurship-igkv-raipur/ Thu, 13 Aug 2026 16:28:41 +0000 https://haritsansar.com/?p=2119 IGKV रायपुर में राजीव सिंह ने बताया ग्रामीण उद्यमिता का परिवर्तनकारी सामर्थ्य रायपुर, 13 अगस्त 2026: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर में 13 अगस्त 2026 को “ग्रामीण उद्यमिता: नवाचार, उद्यम और सतत आजीविका” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया Read More ...

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IGKV रायपुर में राजीव सिंह ने बताया ग्रामीण उद्यमिता का परिवर्तनकारी सामर्थ्य

रायपुर, 13 अगस्त 2026:

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर में 13 अगस्त 2026 को “ग्रामीण उद्यमिता: नवाचार, उद्यम और सतत आजीविका” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और भावी उद्यमियों ने भाग लिया। सेमिनार का उद्देश्य यह समझना था कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण भारत में टिकाऊ आजीविका और रोजगार के नए अवसर कैसे विकसित किए जा सकते हैं।

Sansar Green के संस्थापक राजीव सिंह ने कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। झारखंड के प्रमुख कृषि उद्यमी, पर्यावरणविद् और प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ के रूप में पहचान रखने वाले सिंह को सतत कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक कृषि आदानों, पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण उद्यम विकास का व्यापक अनुभव है। वह आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कृषि विशेषज्ञ के रूप में किसानों के साथ व्यावहारिक कृषि ज्ञान भी साझा कर चुके हैं।

कार्यक्रम में IGKV के कुलपति प्रो. गिरीश चंदेल, अनुसंधान सेवाओं के निदेशक डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी, विस्तार सेवाओं के निदेशक डॉ. एस. एस. टुटेजा, डीन डॉ. आरती गुहे, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, शिक्षक और विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं कृषि विस्तार व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अपने मुख्य संबोधन में राजीव सिंह ने कहा कि ग्रामीण भारत को अब केवल कृषि उपज और कच्चे माल के स्रोत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और बाजार तक पहुंच के उचित समन्वय से गांव नवाचार, प्रसंस्करण, विनिर्माण, मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन के प्रभावी केंद्र बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में किसान मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्त्वों की सही जानकारी के बिना ही उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों का प्रयोग करते हैं। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है, आदानों की उपयोग-दक्षता कम हो सकती है और लंबे समय में मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

नियमित मृदा परीक्षण, स्थान-विशिष्ट सूक्ष्मजीवी समाधान और फसल-विशिष्ट पोषण प्रबंधन के माध्यम से किसान अधिक वैज्ञानिक निर्णय ले सकते हैं। इससे आवश्यकतानुसार कृषि आदानों का उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है और कम लागत में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

सिंह ने Sansar Green के “मिट्टी से मंडी तक” मॉडल को भी प्रस्तुत किया। यह एक एकीकृत कृषि व्यवस्था है, जो मृदा परीक्षण, मिट्टी और फसल के अनुसार जैविक कृषि आदानों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फसल परामर्श, किसान प्रशिक्षण, उपज संग्रह, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को एक मंच पर जोड़ती है।

इस मॉडल में निहित नवाचार की चर्चा करते हुए उन्होंने स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल लाभकारी सूक्ष्मजीवी स्ट्रेन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र के लिए विकसित कृषि समाधान दूसरे क्षेत्र में समान परिणाम नहीं दे सकते, क्योंकि मिट्टी की संरचना, तापमान, वर्षा, फसल और खेती की पद्धतियों में काफी अंतर होता है।

उन्होंने कहा कि जैव उर्वरकों और जैविक फसल समाधानों का चयन प्रत्येक क्षेत्र की मिट्टी, फसल, जलवायु और पोषक तत्त्वों की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। यह स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित दृष्टिकोण कृषि आदानों की दक्षता बढ़ाने, मिट्टी की जैविक सक्रियता को मजबूत करने और किसानों को अधिक विश्वसनीय परिणाम देने में सहायक हो सकता है।

युवाओं के लिए उपलब्ध उद्यमिता के अवसरों की चर्चा करते हुए सिंह ने जैविक कृषि आदान निर्माण, मृदा परीक्षण सेवाओं, बीज उत्पादन, पौधशाला विकास, कृषि मशीनरी सेवाओं, अनाज की सफाई और ग्रेडिंग, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि परिवहन, पैकेजिंग, डिजिटल फसल परामर्श तथा उपभोक्ताओं को सीधे कृषि उत्पाद बेचने जैसे क्षेत्रों को संभावनाशील बताया।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी उद्यमिता यात्रा की शुरुआत गांवों का भ्रमण करने, किसानों से सीधे संवाद स्थापित करने और जमीनी स्तर की वास्तविक समस्याओं को समझने से करें। उनके अनुसार, सफल ग्रामीण उद्यम वही है जो किसानों को किफायती, व्यावहारिक और बड़े स्तर पर लागू किया जा सकने वाला समाधान उपलब्ध कराए तथा उसके लाभ को प्रमाणित भी कर सके।

सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल विपणन के आधार पर किसानों का विश्वास नहीं जीता जा सकता। ग्रामीण उद्यमों को उत्पाद की निरंतर गुणवत्ता, पारदर्शी संवाद, विश्वसनीय तकनीकी मार्गदर्शन और खेतों में सत्यापित परिणामों के माध्यम से अपनी विश्वसनीयता स्थापित करनी होगी।

मुख्य संबोधन के बाद आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने स्टार्टअप वित्तपोषण, इनक्यूबेशन, उत्पाद विकास, प्रमाणन, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण, डिजिटल मार्केटिंग और कृषि उद्यम स्थापित करने से संबंधित चुनौतियों पर प्रश्न पूछे। सिंह ने अपनी उद्यमशीलता यात्रा के अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को पूर्ण व्यावसायिक मॉडल विकसित करने से पहले अपने विचारों का खेतों में परीक्षण और सत्यापन करने की सलाह दी।

प्रो. गिरीश चंदेल ने वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों, स्टार्टअप और ग्रामीण उद्योगों से जोड़ने में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता आधारित कृषि शिक्षा विद्यार्थियों को नवप्रवर्तक और रोजगार सृजक बनने के लिए प्रेरित कर सकती है।

डॉ. एस. एस. टुटेजा ने वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कृषि तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विस्तार व्यवस्था और ग्रामीण उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने वैज्ञानिक गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखते हुए शोध के परिणामों को व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रूप से उपयोगी समाधानों में बदलने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम का समापन कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप, किसानों, सरकारी संस्थानों और ग्रामीण समुदायों के बीच मजबूत सहयोग के आह्वान के साथ हुआ। सेमिनार ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से टिकाऊ आजीविका और रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, स्थानीय मूल्य संवर्धन और किसानों की बाजार तक पहुंच को भी मजबूत किया जा सकता है।

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा https://haritsansar.com/rajeev-singh-prof-sukumar-mishra-soil-testing-iit-ism-dhanbad/ Sun, 09 Aug 2026 14:18:06 +0000 https://haritsansar.com/?p=2116 आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण पहल धनबाद | 9 अगस्त 2026 कृषि Read More ...

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण पहल

धनबाद | 9 अगस्त 2026

कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और किसान-केंद्रित नवाचार को नई दिशा देने की पहल के तहत गिरिडीह के उद्यमी एवं Sansar Green Mission Pvt. Ltd. के निदेशक राजीव सिंह ने आईआईटी-आईएसएम धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य और कृषि तकनीक के भविष्य पर सार्थक संवाद किया।

यह बातचीत आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण नवाचार संगोष्ठी के दौरान हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नवाचारकों की भागीदारी वाले इस राष्ट्रीय आयोजन ने कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक और नवाचार पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

मिट्टी की समस्या से तकनीकी समाधान तक

राजीव सिंह ने इस अवसर पर मृदा परीक्षण से जुड़े अपने प्रोटोटाइप की अवधारणा प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ साझा की। पहल का मूल उद्देश्य किसानों के लिए मृदा परीक्षण को अधिक सरल, व्यावहारिक और उपयोगी बनाना है, ताकि वे अपनी मिट्टी की वास्तविक स्थिति और पोषक तत्वों की जरूरत को बेहतर तरीके से समझ सकें।

राजीव सिंह के अनुसार, वैज्ञानिक जानकारी तभी प्रभावी होती है जब वह किसान के निर्णय लेने में उपयोगी साबित हो। इसी सोच के साथ मृदा परीक्षण की जानकारी को फसल पोषण और कृषि प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान-केंद्रित तकनीक पर जोर

प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ चर्चा में मृदा स्वास्थ्य, तकनीक आधारित कृषि, किसान-केंद्रित नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी समाधानों को खेत तक पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

संवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कृषि तकनीक केवल प्रयोगशाला या शोध संस्थानों तक सीमित न रहे। तकनीक ऐसी होनी चाहिए जिसे किसान समझ सकें, अपनाना आसान हो और जिसका सीधा उपयोग कृषि प्रबंधन में किया जा सके।

राजीव सिंह ने कहा कि वास्तविक कृषि नवाचार की शुरुआत किसान की समस्या को समझने से होती है। यदि तकनीक किसान की वास्तविक जरूरत का समाधान नहीं करती, तो उसका प्रभाव सीमित रह जाता है।

मृदा स्वास्थ्य को केंद्र में रखने की पहल

मिट्टी कृषि उत्पादन की बुनियाद है। मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उसकी स्थिति की बेहतर जानकारी किसानों को फसल एवं पोषण प्रबंधन के संबंध में अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

मृदा परीक्षण की प्रस्तावित पहल इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका लक्ष्य वैज्ञानिक मृदा जानकारी को अधिक व्यावहारिक बनाना और किसान को अपने खेत की वास्तविक स्थिति समझने में सक्षम बनाना है।

इस दृष्टिकोण में तकनीक केवल परीक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसान के लिए निर्णय लेने में सहायता देने वाला उपकरण बन सकती है।

गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक

राजीव सिंह के लिए यह संवाद गिरिडीह से निकलकर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के राष्ट्रीय मंच तक कृषि नवाचार को ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

झारखंड के जिलों में कृषि से जुड़ी कई स्थानीय चुनौतियां हैं, जिनके समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक और उद्यमिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे राष्ट्रीय मंच स्थानीय नवाचारकों को वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से जोड़ने का अवसर देते हैं।

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची यह पहल झारखंड में उभरते एग्री-टेक क्षेत्र और किसान-केंद्रित नवाचार की संभावनाओं को भी सामने लाती है।

विज्ञान और किसान के बीच सेतु

कृषि में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान की वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। तकनीकी संस्थान ज्ञान और अनुसंधान उपलब्ध कराते हैं, जबकि किसान खेत में वास्तविक परिस्थितियों से जूझते हैं।

कृषि उद्यमिता इन दोनों के बीच एक प्रभावी सेतु का काम कर सकती है।

प्रो. सुकुमार मिश्रा और राजीव सिंह के बीच हुई चर्चा इसी संभावित जुड़ाव की दिशा में एक सार्थक संवाद के रूप में सामने आई, जिसमें विज्ञान, तकनीक और कृषि को एक साथ जोड़कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

झारखंड के एग्री-टेक भविष्य की संभावनाएं

झारखंड में कृषि तकनीक, मृदा स्वास्थ्य, टिकाऊ कृषि और किसान-केंद्रित नवाचार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। गिरिडीह जैसे जिलों से निकलने वाले उद्यमियों और नवाचारकों को राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों से जोड़ना इस क्षेत्र को नई गति दे सकता है।

राजीव सिंह की राष्ट्रीय तकनीकी मंच पर भागीदारी इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर शुरू की गई पहल राष्ट्रीय स्तर के संवाद का हिस्सा बन सकती है।

आगे की दिशा

मृदा परीक्षण की इस अवधारणा को आगे विकसित करने के लिए तकनीकी विकास, वैज्ञानिक मूल्यांकन और खेत स्तर पर व्यावहारिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे। राष्ट्रीय तकनीकी संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ संवाद इस प्रक्रिया को मजबूत आधार दे सकता है।

Sansar Green Mission का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ऐसे समाधान विकसित करना है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किसानों की वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखें।

राजीव सिंह का मानना है कि कृषि का भविष्य ऐसी तकनीक में है, जो किसान के लिए समझने योग्य हो और खेत में वास्तविक उपयोगिता पैदा करे।

मिट्टी की बेहतर समझ, बेहतर निर्णय और बेहतर कृषि—यही किसान-केंद्रित तकनीकी नवाचार की दिशा है। 🌱🇮🇳

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में कृषि नवाचार पर सार्थक संवाद, राजीव सिंह ने प्रस्तुत की मृदा परीक्षण की अवधारणा https://haritsansar.com/rajeev-singh-jharkhand-agri-innovation-iit-ism-dhanbad/ Sun, 09 Aug 2026 12:58:52 +0000 https://haritsansar.com/?p=2112 आईआईटी-आईएसएम धनबाद में कृषि नवाचार पर सार्थक संवाद, राजीव सिंह ने प्रस्तुत की मृदा परीक्षण की अवधारणा गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक पहुंचा किसान-केंद्रित कृषि नवाचार धनबाद | 9 अगस्त 2026 कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और नवाचार को बढ़ावा Read More ...

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में कृषि नवाचार पर सार्थक संवाद, राजीव सिंह ने प्रस्तुत की मृदा परीक्षण की अवधारणा
गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक पहुंचा किसान-केंद्रित कृषि नवाचार
धनबाद | 9 अगस्त 2026

कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में गिरिडीह के उद्यमी एवं Sansar Green Mission Pvt. Ltd. के निदेशक राजीव सिंह ने आईआईटी-आईएसएम धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ मृदा परीक्षण एवं किसान-केंद्रित तकनीकी समाधानों की अवधारणा पर सार्थक चर्चा की।

यह संवाद आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण नवाचार संगोष्ठी के दौरान हुआ। राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर से वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, स्टार्टअप और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागी शामिल हुए।

मृदा परीक्षण के प्रोटोटाइप की अवधारणा साझा
इस अवसर पर राजीव सिंह ने अपने मृदा परीक्षण प्रोटोटाइप की अवधारणा प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य किसानों के लिए मिट्टी की स्थिति और पोषक तत्वों की आवश्यकता को समझने की प्रक्रिया को अधिक सरल, वैज्ञानिक, व्यावहारिक और सुलभ बनाना है।

राजीव सिंह ने बताया कि किसानों को अपनी मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो, तो वे फसल एवं पोषण प्रबंधन से जुड़े निर्णय अधिक वैज्ञानिक तरीके से ले सकते हैं। इसी सोच के साथ मृदा परीक्षण से जुड़े तकनीकी समाधान पर काम किया जा रहा है।

किसान-केंद्रित तकनीक पर जोर
प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ चर्चा के दौरान मृदा स्वास्थ्य, तकनीक आधारित कृषि, किसान-केंद्रित समाधान, अनुसंधान तथा नवाचार को खेत तक पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

चर्चा में इस बात पर जोर रहा कि कृषि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित होकर खेतों तक पहुंचे।

राजीव सिंह का मानना है कि किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझकर विकसित की गई तकनीक ही सार्थक कृषि नवाचार है। मृदा परीक्षण को अधिक सुलभ बनाने से किसान अपनी मिट्टी की आवश्यकताओं को बेहतर समझ सकते हैं और उसी आधार पर कृषि प्रबंधन की योजना बना सकते हैं।

राष्ट्रीय तकनीकी मंच पर झारखंड की भागीदारी
आईआईटी-आईएसएम धनबाद जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान में आयोजित इस संगोष्ठी में गिरिडीह से कृषि नवाचार का प्रतिनिधित्व झारखंड के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय मंच पर देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच राजीव सिंह की भागीदारी झारखंड में उभरते एग्री-टेक क्षेत्र, स्थानीय प्रतिभा और किसान-केंद्रित उद्यमिता की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है।

इस तरह के मंच स्थानीय नवाचारकों को देश के प्रमुख वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों से जोड़ने और अनुसंधान, तकनीक तथा उद्यमिता के बीच सहयोग की नई संभावनाएं विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विज्ञान और किसान के बीच सेतु बनाने की पहल
राजीव सिंह का व्यापक उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और किसानों की वास्तविक जरूरतों को एक साथ जोड़कर ऐसे समाधान विकसित करना है, जो कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने में योगदान दे सकें।

गिरिडीह से शुरू हुई यह पहल आईआईटी-आईएसएम धनबाद के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर विकसित कृषि नवाचारों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पैदा करने की क्षमता है।

मिट्टी की बेहतर समझ से बेहतर पोषण, बेहतर फसल और समृद्ध किसान। 🌱🇮🇳

फोटो कैप्शन
आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान आईआईटी-आईएसएम के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ Sansar Green Mission के निदेशक राजीव सिंह।

प्रमुख विषय
मृदा परीक्षण | मृदा स्वास्थ्य | कृषि नवाचार | एग्री-टेक | किसान-केंद्रित तकनीक | वैज्ञानिक कृषि | झारखंड नवाचार | गिरिडीह | आईआईटी-आईएसएम धनबाद

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