कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स से बदलेगी भारतीय कृषि: IIT (ISM) धनबाद में राजीव सिंह ने रखा भविष्य की स्मार्ट खेती का विजन

Rajeev Singh, Founder & Director of Sansar Green Mission Pvt. Ltd., during a strategic meeting at IIT (ISM) Dhanbad with CIIE Chairman and professors discussing Artificial Intelligence, Robotics, and real-time soil intelligence solutions for sustainable agriculture in India.

धनबाद, झारखंड | जुलाई 2026

भारत की कृषि तेजी से तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI), रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), स्मार्ट सेंसर और डेटा एनालिटिक्स खेती को नई दिशा देने वाले प्रमुख उपकरण बनेंगे। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं निदेशक राजीव सिंह ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) में संस्थान के अध्यक्ष, प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं के साथ कृषि में अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक का उद्देश्य भारतीय किसानों के लिए ऐसी तकनीकों का विकास करना था, जो मिट्टी की वास्तविक समय (Real-Time) में जांच, पोषक तत्वों का विश्लेषण, डेटा आधारित खेती और वैज्ञानिक निर्णय प्रणाली को संभव बना सकें।


मिट्टी की जांच को मिलेगी नई पहचान

आज भी अधिकांश किसान पारंपरिक मिट्टी परीक्षण पर निर्भर हैं, जिसमें रिपोर्ट आने में समय लगता है और खेत की बदलती परिस्थितियों का तुरंत पता नहीं चल पाता।

बैठक के दौरान राजीव सिंह ने एक ऐसे AI आधारित स्मार्ट सॉयल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की परिकल्पना प्रस्तुत की, जो किसानों को खेत से ही लगातार मिट्टी की स्थिति की जानकारी उपलब्ध करा सके।

इस तकनीक के माध्यम से भविष्य में किसान जान सकेंगे—

  • मिट्टी में पोषक तत्वों की वर्तमान स्थिति
  • नमी का स्तर
  • pH एवं Electrical Conductivity
  • सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता
  • फसल के अनुसार उर्वरक की सिफारिश
  • सिंचाई का उपयुक्त समय
  • मिट्टी के स्वास्थ्य का डिजिटल रिकॉर्ड

इस प्रकार खेती अनुमान के बजाय वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित होगी।


रोबोटिक्स से होगी स्मार्ट खेती

चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय कृषि में रोबोटिक्स का उपयोग भी रहा।

विशेषज्ञों ने ऐसे स्वचालित रोबोट विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जो खेतों में जाकर स्वयं मिट्टी के नमूने एकत्र कर सकें, विभिन्न स्थानों का विश्लेषण कर सकें तथा डेटा को सीधे क्लाउड सर्वर पर भेज सकें।

भविष्य में ऐसे रोबोट निम्न कार्य कर सकते हैं—

  • स्वचालित मिट्टी नमूना संग्रह
  • खेत का डिजिटल मैप तैयार करना
  • सेंसर आधारित मिट्टी विश्लेषण
  • पोषक तत्वों की पहचान
  • नमी एवं तापमान की निगरानी
  • ड्रोन एवं GIS तकनीक के साथ समन्वय

इस प्रकार कृषि कार्य अधिक सटीक, तेज और कम लागत वाले बन सकते हैं।


किसानों के लिए AI आधारित निर्णय प्रणाली

बैठक में इस बात पर भी विस्तार से चर्चा हुई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल डेटा संग्रह तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों को निर्णय लेने में भी सहायता करेगी।

AI आधारित प्लेटफॉर्म भविष्य में किसानों को सुझाव दे सकेगा—

  • कौन-सी फसल अधिक उपयुक्त होगी
  • कितनी मात्रा में उर्वरक देना चाहिए
  • सिंचाई कब करनी चाहिए
  • जैविक उर्वरकों का उचित उपयोग
  • संभावित रोग एवं कीटों का पूर्वानुमान
  • उत्पादन का अनुमान
  • जलवायु आधारित कृषि सलाह

इस प्रकार प्रत्येक किसान के पास डिजिटल कृषि सलाहकार उपलब्ध होगा।


अनुसंधान और उद्योग का मजबूत सहयोग

बैठक के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि यदि देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान और उद्योग मिलकर कार्य करें तो भारत विश्वस्तरीय कृषि तकनीक विकसित कर सकता है।

चर्चा में निम्न विषयों पर संभावित सहयोग की संभावनाएं तलाशीं गईं—

  • कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता
  • कृषि रोबोटिक्स
  • स्मार्ट सेंसर तकनीक
  • एम्बेडेड सिस्टम
  • मशीन लर्निंग आधारित कृषि मॉडल
  • प्रोटोटाइप विकास
  • फील्ड ट्रायल
  • स्टार्टअप इनक्यूबेशन
  • पेटेंट एवं तकनीकी व्यावसायीकरण

राजीव सिंह ने रखा भविष्य का रोडमैप

बैठक के बाद राजीव सिंह ने कहा—

“भारत की कृषि अब डेटा आधारित कृषि की ओर बढ़ रही है। हमारा उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जो किसानों को वास्तविक समय में मिट्टी की जानकारी, वैज्ञानिक उर्वरक सलाह और AI आधारित निर्णय उपलब्ध करा सके। यदि अनुसंधान संस्थानों की विशेषज्ञता और उद्योग का अनुभव एक साथ आए, तो भारत कृषि तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है। IIT (ISM) धनबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ संवाद इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”


रिमी सिंह का दृष्टिकोण

रिमी सिंह, प्रबंध निदेशक, संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड ने कहा—

“भविष्य की कृषि केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वह अधिक बुद्धिमान, अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार भी होगी। AI और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी सरल रूप में पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं। हमारा लक्ष्य ऐसी तकनीकों का विकास करना है जो प्रयोगशाला से निकलकर सीधे खेतों तक पहुंचे और किसानों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाए।”


झारखंड से राष्ट्रीय स्तर तक नवाचार

राजीव सिंह ने यह भी बताया कि झारखंड जैसे कृषि प्रधान राज्य नवाचार आधारित खेती के मॉडल बन सकते हैं। यदि AI, रोबोटिक्स, IoT और डेटा साइंस को स्थानीय कृषि आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जाए, तो छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक तकनीकों का लाभ मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी तकनीकों का विकास किया जाना चाहिए जो किसानों को केवल रिपोर्ट न दें, बल्कि उन्हें रियल-टाइम समाधान, डिजिटल सलाह और सटीक कृषि प्रबंधन भी उपलब्ध कराएं।


नई कृषि क्रांति की ओर एक कदम

IIT (ISM) धनबाद में हुई यह चर्चा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि भारत की कृषि को तकनीक आधारित भविष्य की ओर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श था।

संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड और IIT (ISM) धनबाद के बीच हुए इस संवाद ने यह स्पष्ट किया कि जब शोध संस्थानों का ज्ञान और उद्योग का अनुभव एक साथ आता है, तब ऐसी तकनीकें विकसित होती हैं जो किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, स्मार्ट सेंसर, क्लाउड टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। यह पहल केवल तकनीकी विकास का प्रयास नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।