धनबाद | अप्रैल 2026
झारखंड के लिए गर्व का विषय है कि संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं निदेशक राजीव सिंह ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम), धनबाद में 6–7 अप्रैल 2026 को आयोजित देश के प्रतिष्ठित IInvenTiv 2026 (India’s Innovation & Research Fair) में आमंत्रित उद्योग विशेषज्ञ (Invited Industry Expert) के रूप में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया।
यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर अनुसंधान को उद्योग एवं समाज से जोड़ना था। इस आयोजन में देशभर के आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा अन्य प्रमुख संस्थानों द्वारा विकसित अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों का प्रदर्शन किया गया।
उद्योग विशेषज्ञ के रूप में मिला विशेष आमंत्रण
राजीव सिंह को कृषि नवाचार, जैव उर्वरक (Biofertilizers), माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, सतत कृषि तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए Industry Expert के रूप में आमंत्रित किया गया। यह आमंत्रण न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि झारखंड के नवाचार एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी सम्मान की बात है।
आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक द्वारा आयोजित विशेष नेटवर्किंग डिनर
मुख्य कार्यक्रम से एक दिन पूर्व आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के निदेशक द्वारा आमंत्रित उद्योग विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप संस्थापकों, निवेशकों एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों के सम्मान में एक विशेष नेटवर्किंग डिनर का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर राजीव सिंह ने देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों एवं नवाचार विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। चर्चा के प्रमुख विषयों में अनुसंधान का व्यावसायीकरण (Research Commercialization), स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer), सतत कृषि, जैविक खेती तथा उद्योग–शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
राजीव सिंह ने कहा कि ऐसे संवाद भविष्य में संयुक्त अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास तथा किसानों तक वैज्ञानिक नवाचार पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की नवाचार क्षमता का प्रदर्शन
दो दिवसीय आयोजन के दौरान राजीव सिंह ने विभिन्न प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया तथा देशभर से आए वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और उद्योग प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
उन्होंने विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों में विकसित नवीन तकनीकों का अध्ययन किया—
- सतत एवं प्राकृतिक कृषि
- जैव उर्वरक एवं माइक्रोबियल तकनीक
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
- पर्यावरण संरक्षण
- जल एवं मृदा संरक्षण
- जलवायु अनुकूल कृषि
- स्वच्छ ऊर्जा
- डीप-टेक स्टार्टअप्स
- ग्रामीण विकास एवं सामाजिक नवाचार
इस दौरान उन्होंने कृषि क्षेत्र में विज्ञान आधारित तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने और उद्योग–शोध संस्थानों के सहयोग को मजबूत बनाने पर बल दिया।
संसार ग्रीन मिशन की सोच को राष्ट्रीय मंच पर रखा
राजीव सिंह ने Sansar Green Mission की कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्था का उद्देश्य किसानों के लिए वैज्ञानिक, किफायती एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि समाधान विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि भारत के शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों को यदि स्टार्टअप्स एवं उद्योगों के माध्यम से किसानों तक पहुँचाया जाए, तो इससे कृषि उत्पादन, मिट्टी की उर्वरता, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण—चारों क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन संभव है।

राजीव सिंह ने कहा
“अनुसंधान तभी सफल माना जाएगा जब उसका लाभ सीधे समाज और किसानों तक पहुँचे। IInvenTiv जैसे मंच शोधकर्ताओं, उद्योगों और स्टार्टअप्स को एक साथ लाकर नई संभावनाओं के द्वार खोलते हैं। झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए इस राष्ट्रीय आयोजन में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल होना मेरे लिए गर्व की बात है। मेरा विश्वास है कि विज्ञान, नवाचार और उद्योग के सहयोग से भारत की कृषि को नई दिशा दी जा सकती है।”
झारखंड के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि
IInvenTiv 2026 में आमंत्रित उद्योग विशेषज्ञ के रूप में राजीव सिंह की भागीदारी झारखंड के स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती पहचान को दर्शाती है। यह उपलब्धि न केवल संसार ग्रीन मिशन के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणादायक है।
राजीव सिंह का मानना है कि आने वाले वर्षों में झारखंड कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और हरित नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना सकता है। वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत साझेदारी ही “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
