Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/agricultural-innovation/ (मिलकर लाएँ हरियाली) Tue, 06 Oct 2026 09:10:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://haritsansar.com/wp-content/uploads/2026/05/cropped-Logo-harit-sansar-32x32.png Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/agricultural-innovation/ 32 32 कृषि अनुसंधान, नवाचार और सहयोग को नई दिशा: ICAR, नई दिल्ली में राजीव सिंह का सम्मान, MoU पर हुआ महत्वपूर्ण समझौता https://haritsansar.com/rajeev-singh-icar-new-delhi-mou-agricultural-research-innovation/ Tue, 06 Oct 2026 09:10:19 +0000 https://haritsansar.com/?p=2194 नई दिल्ली | 01 अक्टूबर 2026। कृषि अनुसंधान, नवाचार और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह की ICAR, नई Read More ...

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नई दिल्ली | 01 अक्टूबर 2026।

कृषि अनुसंधान, नवाचार और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह की ICAR, नई दिल्ली में महत्वपूर्ण सहभागिता के दौरान उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं नवाचार को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के उद्देश्य से MoU पर महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ।

यह पहल कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीक, नवाचार और किसान हित के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की संभावनाओं को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

सम्मान के साथ सहयोग की नई शुरुआत

ICAR जैसे राष्ट्रीय स्तर के कृषि अनुसंधान तंत्र के साथ संवाद और सहभागिता कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान राजीव सिंह का सम्मान किया गया, जो कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके प्रयासों के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना को दर्शाता है।

सम्मान के साथ हुआ MoU इस सहभागिता को एक व्यापक सहयोगात्मक दिशा प्रदान करता है, जिसमें अनुसंधान और नवाचार को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं।

MoU के केंद्र में कृषि अनुसंधान और नवाचार

MoU के माध्यम से कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों, नवाचार और जमीनी स्तर पर उनके उपयोग को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

इस पहल के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहे—

  • कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचार
  • वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना
  • मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन
  • फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार
  • जैविक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा
  • कृषि संसाधनों के बेहतर एवं दक्ष उपयोग
  • किसानों की तकनीकी क्षमता और जागरूकता बढ़ाना
  • अनुसंधान एवं फील्ड स्तर के अनुभवों के बीच बेहतर समन्वय
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित नवाचार और विकास की संभावनाएं

इस प्रकार MoU को ‘रिसर्च से फील्ड और फील्ड से किसान’ तक ज्ञान एवं तकनीक के प्रभावी प्रवाह की दिशा में एक सहयोगात्मक कदम के रूप में देखा जा सकता है।

अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर

कृषि अनुसंधान का उद्देश्य तभी अधिक प्रभावी बनता है, जब वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीक किसानों की वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो। इसी सोच के तहत किसानों की जमीनी समस्याओं, स्थानीय कृषि परिस्थितियों और आधुनिक तकनीकी समाधानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

राजीव सिंह की सहभागिता इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखती है कि कृषि विकास केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मिट्टी का स्वास्थ्य, संसाधनों का संरक्षण, तकनीकी ज्ञान, किसान प्रशिक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था भी शामिल है।

ICAR और जमीनी कृषि के बीच संवाद की अहमियत

ICAR का कृषि अनुसंधान तंत्र टिकाऊ कृषि, तकनीकी विकास, संसाधन दक्षता, क्षमता निर्माण और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों पर कार्य करता है।

ऐसे में संस्थागत स्तर पर होने वाला संवाद वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के अनुभवों के बीच एक मजबूत सेतु बनाने में उपयोगी हो सकता है। यही कारण है कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान संस्थानों, विशेषज्ञों और जमीनी स्तर पर सक्रिय संगठनों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवाचार से टिकाऊ कृषि की ओर

आज कृषि के सामने मिट्टी की उर्वरता, जल संसाधनों का संरक्षण, बदलती जलवायु, उत्पादन लागत और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय कृषि अनुभवों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।

MoU के माध्यम से सहयोग की यह पहल कृषि क्षेत्र में ऐसे नवाचारों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित करती है, जो किसान-केंद्रित, संसाधन-कुशल और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकें।

राजीव सिंह की सहभागिता ने दिया सहयोग का संदेश

‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह का ICAR, नई दिल्ली में सम्मान और MoU पर हुआ समझौता कृषि अनुसंधान, नवाचार और जमीनी कृषि के बीच सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आया है।

इस पहल का व्यापक संदेश स्पष्ट है—जब वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और किसानों की वास्तविक जरूरतें एक मंच पर आती हैं, तो कृषि विकास के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।

अनुसंधान से नवाचार, नवाचार से तकनीक और तकनीक से किसान—यही कृषि विकास को नई दिशा देने वाली सहयोग की मजबूत कड़ी है।

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अनुसंधान, नवाचार और कृषि विकास की दिशा में नई पहल: ICAR–National Research Centre on Litchi में विशेषज्ञों के साथ राजीव सिंह की सहभागिता https://haritsansar.com/rajeev-singh-icar-nrcl-muzaffarpur-litchi-research/ Thu, 01 Oct 2026 09:08:02 +0000 https://haritsansar.com/?p=2184 मुजफ्फरपुर, बिहार | 30 सितंबर 2026। कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी सोच के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह ने ICAR–National Read More ...

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मुजफ्फरपुर, बिहार | 30 सितंबर 2026।

कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी सोच के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह ने ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर में कृषि विशेषज्ञों के साथ सहभागिता की। इस दौरान लीची एवं बागवानी क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान, उत्पादन तकनीक, पौध संरक्षण और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने जैसे विषयों पर संवाद हुआ।

ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र है। संस्थान का कार्य लीची की उत्पादकता, गुणवत्ता और सुरक्षित उत्पादन के साथ तकनीक हस्तांतरण एवं हितधारकों की क्षमता निर्माण से भी जुड़ा है।

विशेषज्ञों के साथ चर्चा के प्रमुख बिंदु

सहभागिता के दौरान कृषि एवं बागवानी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा गया। इनमें प्रमुख रूप से—

  • लीची की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने की आधुनिक तकनीकें
  • मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन
  • पौधों के स्वास्थ्य और बेहतर बाग प्रबंधन
  • कीट एवं रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय
  • लीची स्टिंक बग जैसी उभरती चुनौतियों की निगरानी और समेकित प्रबंधन
  • जल एवं अन्य कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग
  • कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण और शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीकें
  • लीची आधारित मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की संभावनाएं
  • अनुसंधान से विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था
  • किसानों की क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक कृषि जानकारी का प्रसार

ICAR-NRCL ने अगस्त 2026 में लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, विस्तार कर्मियों और किसानों के बीच समन्वय तथा क्षेत्रीय जागरूकता पर विशेष कार्यक्रम भी चलाया था।

मृदा, पोषण और पौध स्वास्थ्य पर विशेष महत्व

फलदार फसलों की उत्पादकता में मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लीची के संदर्भ में ICAR के वैज्ञानिक कार्यक्रमों में पोषक तत्वों की कमी, मृदा उर्वरता और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर भी किसानों को तकनीकी जानकारी दी गई है।

इसी व्यापक कृषि संदर्भ में विशेषज्ञों के साथ संवाद में यह बात महत्वपूर्ण रही कि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी, पौधे और संसाधनों के संतुलित प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाए।

कीट एवं रोग प्रबंधन की चुनौती

लीची उत्पादन में कीट एवं रोग प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय है। विशेष रूप से 2026 में ICAR-NRCL ने लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर क्षमता निर्माण और फील्ड-अवेयरनेस कार्यक्रमों को तेज किया है। संस्थान ने समय रहते निगरानी और समेकित प्रबंधन उपायों को अपनाने पर जोर दिया है।

इस संदर्भ में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के व्यावहारिक अनुभव के बीच संवाद को कृषि उत्पादन की चुनौतियों को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा सकता है।

कटाई के बाद प्रबंधन और मूल्य संवर्धन

किसानों की आय और उत्पाद की उपयोगिता बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन भी महत्वपूर्ण हैं। ICAR के अनुसार लीची के क्षेत्र में शेल्फ लाइफ बढ़ाने, दूरस्थ परिवहन और मूल्यवर्धित उत्पादों से जुड़े शोध एवं तकनीक विकास भी संस्थान की गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं।

इसलिए कृषि विकास की चर्चा को खेत से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।

अनुसंधान से किसान तक तकनीक पहुंचाने पर जोर

कृषि अनुसंधान का प्रभाव तब अधिक व्यापक होता है, जब वैज्ञानिक जानकारी और विकसित तकनीक किसानों तक व्यावहारिक रूप में पहुंचती है। ICAR के व्यापक कृषि अनुसंधान ढांचे में तकनीक हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और किसानों के बीच ज्ञान के प्रसार को महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल किया गया है।

राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता इसी संदर्भ में अनुसंधान, कृषि अनुभव और किसान-केंद्रित विकास के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर बनी।

नवाचार से टिकाऊ कृषि की ओर

कृषि के बदलते स्वरूप में ऐसी तकनीकों की आवश्यकता बढ़ रही है, जो उत्पादन और गुणवत्ता के साथ संसाधन दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता और किसान हित को भी ध्यान में रखें। ICAR की प्राथमिकताओं में भी जलवायु-सहिष्णु तकनीक, संसाधन उपयोग दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता, कटाई-पश्चात प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ विशेषज्ञों के साथ हुई यह सहभागिता कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और व्यावहारिक कृषि अनुभव को एक साथ देखने का अवसर प्रदान करती है।

कृषि विकास के लिए संवाद की नई संभावनाएं

ICAR–National Research Centre on Litchi में श्री राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता ने अनुसंधान और कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा। मृदा एवं पोषण प्रबंधन से लेकर पौध संरक्षण, कीट नियंत्रण, कटाई के बाद प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और किसान तक तकनीक पहुंचाने तक—कृषि विकास की पूरी श्रृंखला पर विचार का आधार तैयार हुआ।

अनुसंधान प्रयोगशाला में विकसित ज्ञान जब किसान की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तभी नवाचार का लाभ खेत तक पहुंचने की संभावना मजबूत होती है। यही संवाद कृषि के अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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गढ़वा विश्वविद्यालय की कृषि तकनीक से झारखंड के किसानों को जोड़ने की पहल : राजीव सिंह https://haritsansar.com/rajeev-singh-garhwa-university-agriculture-jharkhand-farmers/ Sun, 27 Sep 2026 05:47:13 +0000 https://haritsansar.com/?p=2136 प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए राजीव सिंह; कृषि विशेषज्ञों के साथ बैठक में गिरिडीह के किसानों तक तकनीक, प्रशिक्षण और शोध का लाभ पहुंचाने पर हुई चर्चा गिरिडीह। गढ़वा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रथम दीक्षांत Read More ...

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प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए राजीव सिंह; कृषि विशेषज्ञों के साथ बैठक में गिरिडीह के किसानों तक तकनीक, प्रशिक्षण और शोध का लाभ पहुंचाने पर हुई चर्चा

गिरिडीह। गढ़वा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रथम दीक्षांत समारोह में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह को उद्योग विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया। समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह, वरिष्ठ शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में आयोजित समारोह में राजीव सिंह ने भी मंच से अपने विचार साझा किए।

दीक्षांत समारोह के बाद राजीव सिंह ने विश्वविद्यालय के कृषि क्षेत्र से जुड़े शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के साथ विशेष बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालय में उपलब्ध कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी विशेषज्ञता को झारखंड के किसानों, विशेष रूप से गिरिडीह क्षेत्र के किसानों से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

राजीव सिंह ने कहा—खेतों तक पहुंचे विश्वविद्यालय का कृषि ज्ञान

बैठक में मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन, टिकाऊ खेती, जैव एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीक, किसान प्रशिक्षण, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

चर्चा का विशेष फोकस इस बात पर रहा कि किसानों की स्थानीय समस्याओं और खेत स्तर की वास्तविक परिस्थितियों को कृषि विशेषज्ञों तक पहुंचाया जाए तथा विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के पास उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान एवं तकनीक का व्यावहारिक लाभ किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाए।

राजीव सिंह ने कहा, “विश्वविद्यालयों में विकसित कृषि ज्ञान और तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह खेत और किसान तक पहुंचे। हमारा प्रयास रहेगा कि गिरिडीह सहित झारखंड के किसानों को गढ़वा विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों, नई तकनीकों और प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ा जा सके।”

Rajeev Singh seated on stage with Jharkhand Governor Santosh Kumar Gangwar, Garhwa University Chancellor, Vice Chancellor and university dignitaries during the First Convocation.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के मंच पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ उद्योग विशेषज्ञ राजीव सिंह।

राजीव सिंह ने कृषि विशेषज्ञों से मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीक पर की चर्चा

बैठक के दौरान बदलती कृषि परिस्थितियों में मृदा स्वास्थ्य सुधार और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन की आवश्यकता पर चर्चा हुई। जैविक एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीकों के उपयोग, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समाधान विकसित करने और किसानों तक व्यावहारिक जानकारी पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

राजीव सिंह ने कहा कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच नियमित संवाद विकसित होने से खेत स्तर की समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में मदद मिल सकती है। किसानों के व्यावहारिक अनुभव और विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक विशेषज्ञता को जोड़कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल समाधान विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।

किसान प्रशिक्षण और तकनीकी संवाद पर राजीव सिंह का जोर

बैठक में भविष्य में किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञ संवाद, कृषि तकनीक प्रदर्शन और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसी गतिविधियों के माध्यम से इस संपर्क को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

इसका उद्देश्य किसानों को केवल नई तकनीकों की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि कृषि विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का अवसर उपलब्ध कराना भी है, ताकि वे मृदा, फसल, पोषण, उत्पादन और अन्य कृषि संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

राजीव सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय, कृषि विशेषज्ञ, कृषि उद्यम और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से शोध और तकनीक का जमीनी स्तर पर उपयोग बढ़ाया जा सकता है। इससे विश्वविद्यालयों में उपलब्ध ज्ञान और किसानों के खेत स्तर के अनुभव के बीच एक प्रभावी सेतु तैयार हो सकता है।

Rajeev Singh with Garhwa University Vice Chancellor Dr. M. K. Singh and university team during the First Convocation, discussing agriculture and farmer-focused initiatives.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं विश्वविद्यालय की टीम के साथ उद्योग विशेषज्ञ एवं संसार ग्रीन के संस्थापक राजीव सिंह।

गिरिडीह के किसानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर : राजीव सिंह

राजीव सिंह ने गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल होने और कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद के अवसर को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संस्थागत संपर्क भविष्य में गिरिडीह सहित झारखंड के किसानों को कृषि तकनीक, प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जोड़ने में उपयोगी हो सकते हैं।

संसार ग्रीन के माध्यम से भी किसानों, कृषि विशेषज्ञों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तकनीकी संवाद को आगे बढ़ाने तथा कृषि ज्ञान को खेत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा https://haritsansar.com/rajeev-singh-prof-sukumar-mishra-soil-testing-iit-ism-dhanbad/ Sun, 09 Aug 2026 14:18:06 +0000 https://haritsansar.com/?p=2116 आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण पहल धनबाद | 9 अगस्त 2026 कृषि Read More ...

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद में मृदा तकनीक के भविष्य पर संवाद, प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ राजीव सिंह ने साझा की कृषि नवाचार की अवधारणा

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण पहल

धनबाद | 9 अगस्त 2026

कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान और किसान-केंद्रित नवाचार को नई दिशा देने की पहल के तहत गिरिडीह के उद्यमी एवं Sansar Green Mission Pvt. Ltd. के निदेशक राजीव सिंह ने आईआईटी-आईएसएम धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य और कृषि तकनीक के भविष्य पर सार्थक संवाद किया।

यह बातचीत आईआईटी-आईएसएम धनबाद में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण नवाचार संगोष्ठी के दौरान हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नवाचारकों की भागीदारी वाले इस राष्ट्रीय आयोजन ने कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक और नवाचार पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

मिट्टी की समस्या से तकनीकी समाधान तक

राजीव सिंह ने इस अवसर पर मृदा परीक्षण से जुड़े अपने प्रोटोटाइप की अवधारणा प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ साझा की। पहल का मूल उद्देश्य किसानों के लिए मृदा परीक्षण को अधिक सरल, व्यावहारिक और उपयोगी बनाना है, ताकि वे अपनी मिट्टी की वास्तविक स्थिति और पोषक तत्वों की जरूरत को बेहतर तरीके से समझ सकें।

राजीव सिंह के अनुसार, वैज्ञानिक जानकारी तभी प्रभावी होती है जब वह किसान के निर्णय लेने में उपयोगी साबित हो। इसी सोच के साथ मृदा परीक्षण की जानकारी को फसल पोषण और कृषि प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान-केंद्रित तकनीक पर जोर

प्रो. सुकुमार मिश्रा के साथ चर्चा में मृदा स्वास्थ्य, तकनीक आधारित कृषि, किसान-केंद्रित नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी समाधानों को खेत तक पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

संवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कृषि तकनीक केवल प्रयोगशाला या शोध संस्थानों तक सीमित न रहे। तकनीक ऐसी होनी चाहिए जिसे किसान समझ सकें, अपनाना आसान हो और जिसका सीधा उपयोग कृषि प्रबंधन में किया जा सके।

राजीव सिंह ने कहा कि वास्तविक कृषि नवाचार की शुरुआत किसान की समस्या को समझने से होती है। यदि तकनीक किसान की वास्तविक जरूरत का समाधान नहीं करती, तो उसका प्रभाव सीमित रह जाता है।

मृदा स्वास्थ्य को केंद्र में रखने की पहल

मिट्टी कृषि उत्पादन की बुनियाद है। मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उसकी स्थिति की बेहतर जानकारी किसानों को फसल एवं पोषण प्रबंधन के संबंध में अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

मृदा परीक्षण की प्रस्तावित पहल इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका लक्ष्य वैज्ञानिक मृदा जानकारी को अधिक व्यावहारिक बनाना और किसान को अपने खेत की वास्तविक स्थिति समझने में सक्षम बनाना है।

इस दृष्टिकोण में तकनीक केवल परीक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसान के लिए निर्णय लेने में सहायता देने वाला उपकरण बन सकती है।

गिरिडीह से आईआईटी-आईएसएम तक

राजीव सिंह के लिए यह संवाद गिरिडीह से निकलकर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के राष्ट्रीय मंच तक कृषि नवाचार को ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

झारखंड के जिलों में कृषि से जुड़ी कई स्थानीय चुनौतियां हैं, जिनके समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक और उद्यमिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे राष्ट्रीय मंच स्थानीय नवाचारकों को वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से जोड़ने का अवसर देते हैं।

गिरिडीह से राष्ट्रीय तकनीकी मंच तक पहुंची यह पहल झारखंड में उभरते एग्री-टेक क्षेत्र और किसान-केंद्रित नवाचार की संभावनाओं को भी सामने लाती है।

विज्ञान और किसान के बीच सेतु

कृषि में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान की वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। तकनीकी संस्थान ज्ञान और अनुसंधान उपलब्ध कराते हैं, जबकि किसान खेत में वास्तविक परिस्थितियों से जूझते हैं।

कृषि उद्यमिता इन दोनों के बीच एक प्रभावी सेतु का काम कर सकती है।

प्रो. सुकुमार मिश्रा और राजीव सिंह के बीच हुई चर्चा इसी संभावित जुड़ाव की दिशा में एक सार्थक संवाद के रूप में सामने आई, जिसमें विज्ञान, तकनीक और कृषि को एक साथ जोड़कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

झारखंड के एग्री-टेक भविष्य की संभावनाएं

झारखंड में कृषि तकनीक, मृदा स्वास्थ्य, टिकाऊ कृषि और किसान-केंद्रित नवाचार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। गिरिडीह जैसे जिलों से निकलने वाले उद्यमियों और नवाचारकों को राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों से जोड़ना इस क्षेत्र को नई गति दे सकता है।

राजीव सिंह की राष्ट्रीय तकनीकी मंच पर भागीदारी इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर शुरू की गई पहल राष्ट्रीय स्तर के संवाद का हिस्सा बन सकती है।

आगे की दिशा

मृदा परीक्षण की इस अवधारणा को आगे विकसित करने के लिए तकनीकी विकास, वैज्ञानिक मूल्यांकन और खेत स्तर पर व्यावहारिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे। राष्ट्रीय तकनीकी संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ संवाद इस प्रक्रिया को मजबूत आधार दे सकता है।

Sansar Green Mission का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ऐसे समाधान विकसित करना है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किसानों की वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखें।

राजीव सिंह का मानना है कि कृषि का भविष्य ऐसी तकनीक में है, जो किसान के लिए समझने योग्य हो और खेत में वास्तविक उपयोगिता पैदा करे।

मिट्टी की बेहतर समझ, बेहतर निर्णय और बेहतर कृषि—यही किसान-केंद्रित तकनीकी नवाचार की दिशा है। 🌱🇮🇳

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