मुजफ्फरपुर, बिहार | 30 सितंबर 2026।
कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी सोच के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह ने ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर में कृषि विशेषज्ञों के साथ सहभागिता की। इस दौरान लीची एवं बागवानी क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान, उत्पादन तकनीक, पौध संरक्षण और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने जैसे विषयों पर संवाद हुआ।
ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र है। संस्थान का कार्य लीची की उत्पादकता, गुणवत्ता और सुरक्षित उत्पादन के साथ तकनीक हस्तांतरण एवं हितधारकों की क्षमता निर्माण से भी जुड़ा है।
विशेषज्ञों के साथ चर्चा के प्रमुख बिंदु
सहभागिता के दौरान कृषि एवं बागवानी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा गया। इनमें प्रमुख रूप से—
- लीची की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने की आधुनिक तकनीकें
- मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन
- पौधों के स्वास्थ्य और बेहतर बाग प्रबंधन
- कीट एवं रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय
- लीची स्टिंक बग जैसी उभरती चुनौतियों की निगरानी और समेकित प्रबंधन
- जल एवं अन्य कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग
- कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण और शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीकें
- लीची आधारित मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की संभावनाएं
- अनुसंधान से विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था
- किसानों की क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक कृषि जानकारी का प्रसार
ICAR-NRCL ने अगस्त 2026 में लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, विस्तार कर्मियों और किसानों के बीच समन्वय तथा क्षेत्रीय जागरूकता पर विशेष कार्यक्रम भी चलाया था।
मृदा, पोषण और पौध स्वास्थ्य पर विशेष महत्व
फलदार फसलों की उत्पादकता में मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लीची के संदर्भ में ICAR के वैज्ञानिक कार्यक्रमों में पोषक तत्वों की कमी, मृदा उर्वरता और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर भी किसानों को तकनीकी जानकारी दी गई है।
इसी व्यापक कृषि संदर्भ में विशेषज्ञों के साथ संवाद में यह बात महत्वपूर्ण रही कि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी, पौधे और संसाधनों के संतुलित प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाए।
कीट एवं रोग प्रबंधन की चुनौती
लीची उत्पादन में कीट एवं रोग प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय है। विशेष रूप से 2026 में ICAR-NRCL ने लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर क्षमता निर्माण और फील्ड-अवेयरनेस कार्यक्रमों को तेज किया है। संस्थान ने समय रहते निगरानी और समेकित प्रबंधन उपायों को अपनाने पर जोर दिया है।
इस संदर्भ में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के व्यावहारिक अनुभव के बीच संवाद को कृषि उत्पादन की चुनौतियों को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा सकता है।
कटाई के बाद प्रबंधन और मूल्य संवर्धन
किसानों की आय और उत्पाद की उपयोगिता बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन भी महत्वपूर्ण हैं। ICAR के अनुसार लीची के क्षेत्र में शेल्फ लाइफ बढ़ाने, दूरस्थ परिवहन और मूल्यवर्धित उत्पादों से जुड़े शोध एवं तकनीक विकास भी संस्थान की गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं।
इसलिए कृषि विकास की चर्चा को खेत से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।
अनुसंधान से किसान तक तकनीक पहुंचाने पर जोर
कृषि अनुसंधान का प्रभाव तब अधिक व्यापक होता है, जब वैज्ञानिक जानकारी और विकसित तकनीक किसानों तक व्यावहारिक रूप में पहुंचती है। ICAR के व्यापक कृषि अनुसंधान ढांचे में तकनीक हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और किसानों के बीच ज्ञान के प्रसार को महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल किया गया है।
राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता इसी संदर्भ में अनुसंधान, कृषि अनुभव और किसान-केंद्रित विकास के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर बनी।
नवाचार से टिकाऊ कृषि की ओर
कृषि के बदलते स्वरूप में ऐसी तकनीकों की आवश्यकता बढ़ रही है, जो उत्पादन और गुणवत्ता के साथ संसाधन दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता और किसान हित को भी ध्यान में रखें। ICAR की प्राथमिकताओं में भी जलवायु-सहिष्णु तकनीक, संसाधन उपयोग दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता, कटाई-पश्चात प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ विशेषज्ञों के साथ हुई यह सहभागिता कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और व्यावहारिक कृषि अनुभव को एक साथ देखने का अवसर प्रदान करती है।
कृषि विकास के लिए संवाद की नई संभावनाएं
ICAR–National Research Centre on Litchi में श्री राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता ने अनुसंधान और कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा। मृदा एवं पोषण प्रबंधन से लेकर पौध संरक्षण, कीट नियंत्रण, कटाई के बाद प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और किसान तक तकनीक पहुंचाने तक—कृषि विकास की पूरी श्रृंखला पर विचार का आधार तैयार हुआ।
अनुसंधान प्रयोगशाला में विकसित ज्ञान जब किसान की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तभी नवाचार का लाभ खेत तक पहुंचने की संभावना मजबूत होती है। यही संवाद कृषि के अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
