Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/agricultural-development/ (मिलकर लाएँ हरियाली) Tue, 06 Oct 2026 09:10:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://haritsansar.com/wp-content/uploads/2026/05/cropped-Logo-harit-sansar-32x32.png Harit Sansar | Tree Plantation Movement by Rajeev Singh & Sansar Green https://haritsansar.com/tag/agricultural-development/ 32 32 कृषि अनुसंधान, नवाचार और सहयोग को नई दिशा: ICAR, नई दिल्ली में राजीव सिंह का सम्मान, MoU पर हुआ महत्वपूर्ण समझौता https://haritsansar.com/rajeev-singh-icar-new-delhi-mou-agricultural-research-innovation/ Tue, 06 Oct 2026 09:10:19 +0000 https://haritsansar.com/?p=2194 नई दिल्ली | 01 अक्टूबर 2026। कृषि अनुसंधान, नवाचार और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह की ICAR, नई Read More ...

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नई दिल्ली | 01 अक्टूबर 2026।

कृषि अनुसंधान, नवाचार और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह की ICAR, नई दिल्ली में महत्वपूर्ण सहभागिता के दौरान उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं नवाचार को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के उद्देश्य से MoU पर महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ।

यह पहल कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीक, नवाचार और किसान हित के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की संभावनाओं को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

सम्मान के साथ सहयोग की नई शुरुआत

ICAR जैसे राष्ट्रीय स्तर के कृषि अनुसंधान तंत्र के साथ संवाद और सहभागिता कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान राजीव सिंह का सम्मान किया गया, जो कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके प्रयासों के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना को दर्शाता है।

सम्मान के साथ हुआ MoU इस सहभागिता को एक व्यापक सहयोगात्मक दिशा प्रदान करता है, जिसमें अनुसंधान और नवाचार को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं।

MoU के केंद्र में कृषि अनुसंधान और नवाचार

MoU के माध्यम से कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों, नवाचार और जमीनी स्तर पर उनके उपयोग को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

इस पहल के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहे—

  • कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचार
  • वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना
  • मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन
  • फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार
  • जैविक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा
  • कृषि संसाधनों के बेहतर एवं दक्ष उपयोग
  • किसानों की तकनीकी क्षमता और जागरूकता बढ़ाना
  • अनुसंधान एवं फील्ड स्तर के अनुभवों के बीच बेहतर समन्वय
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित नवाचार और विकास की संभावनाएं

इस प्रकार MoU को ‘रिसर्च से फील्ड और फील्ड से किसान’ तक ज्ञान एवं तकनीक के प्रभावी प्रवाह की दिशा में एक सहयोगात्मक कदम के रूप में देखा जा सकता है।

अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर

कृषि अनुसंधान का उद्देश्य तभी अधिक प्रभावी बनता है, जब वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीक किसानों की वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो। इसी सोच के तहत किसानों की जमीनी समस्याओं, स्थानीय कृषि परिस्थितियों और आधुनिक तकनीकी समाधानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

राजीव सिंह की सहभागिता इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखती है कि कृषि विकास केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मिट्टी का स्वास्थ्य, संसाधनों का संरक्षण, तकनीकी ज्ञान, किसान प्रशिक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था भी शामिल है।

ICAR और जमीनी कृषि के बीच संवाद की अहमियत

ICAR का कृषि अनुसंधान तंत्र टिकाऊ कृषि, तकनीकी विकास, संसाधन दक्षता, क्षमता निर्माण और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों पर कार्य करता है।

ऐसे में संस्थागत स्तर पर होने वाला संवाद वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के अनुभवों के बीच एक मजबूत सेतु बनाने में उपयोगी हो सकता है। यही कारण है कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान संस्थानों, विशेषज्ञों और जमीनी स्तर पर सक्रिय संगठनों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवाचार से टिकाऊ कृषि की ओर

आज कृषि के सामने मिट्टी की उर्वरता, जल संसाधनों का संरक्षण, बदलती जलवायु, उत्पादन लागत और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय कृषि अनुभवों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।

MoU के माध्यम से सहयोग की यह पहल कृषि क्षेत्र में ऐसे नवाचारों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित करती है, जो किसान-केंद्रित, संसाधन-कुशल और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकें।

राजीव सिंह की सहभागिता ने दिया सहयोग का संदेश

‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह का ICAR, नई दिल्ली में सम्मान और MoU पर हुआ समझौता कृषि अनुसंधान, नवाचार और जमीनी कृषि के बीच सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आया है।

इस पहल का व्यापक संदेश स्पष्ट है—जब वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और किसानों की वास्तविक जरूरतें एक मंच पर आती हैं, तो कृषि विकास के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।

अनुसंधान से नवाचार, नवाचार से तकनीक और तकनीक से किसान—यही कृषि विकास को नई दिशा देने वाली सहयोग की मजबूत कड़ी है।

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अनुसंधान, नवाचार और कृषि विकास की दिशा में नई पहल: ICAR–National Research Centre on Litchi में विशेषज्ञों के साथ राजीव सिंह की सहभागिता https://haritsansar.com/rajeev-singh-icar-nrcl-muzaffarpur-litchi-research/ Thu, 01 Oct 2026 09:08:02 +0000 https://haritsansar.com/?p=2184 मुजफ्फरपुर, बिहार | 30 सितंबर 2026। कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी सोच के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह ने ICAR–National Read More ...

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मुजफ्फरपुर, बिहार | 30 सितंबर 2026।

कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी सोच के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह ने ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर में कृषि विशेषज्ञों के साथ सहभागिता की। इस दौरान लीची एवं बागवानी क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान, उत्पादन तकनीक, पौध संरक्षण और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने जैसे विषयों पर संवाद हुआ।

ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र है। संस्थान का कार्य लीची की उत्पादकता, गुणवत्ता और सुरक्षित उत्पादन के साथ तकनीक हस्तांतरण एवं हितधारकों की क्षमता निर्माण से भी जुड़ा है।

विशेषज्ञों के साथ चर्चा के प्रमुख बिंदु

सहभागिता के दौरान कृषि एवं बागवानी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा गया। इनमें प्रमुख रूप से—

  • लीची की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने की आधुनिक तकनीकें
  • मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन
  • पौधों के स्वास्थ्य और बेहतर बाग प्रबंधन
  • कीट एवं रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय
  • लीची स्टिंक बग जैसी उभरती चुनौतियों की निगरानी और समेकित प्रबंधन
  • जल एवं अन्य कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग
  • कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण और शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीकें
  • लीची आधारित मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की संभावनाएं
  • अनुसंधान से विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था
  • किसानों की क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक कृषि जानकारी का प्रसार

ICAR-NRCL ने अगस्त 2026 में लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, विस्तार कर्मियों और किसानों के बीच समन्वय तथा क्षेत्रीय जागरूकता पर विशेष कार्यक्रम भी चलाया था।

मृदा, पोषण और पौध स्वास्थ्य पर विशेष महत्व

फलदार फसलों की उत्पादकता में मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लीची के संदर्भ में ICAR के वैज्ञानिक कार्यक्रमों में पोषक तत्वों की कमी, मृदा उर्वरता और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर भी किसानों को तकनीकी जानकारी दी गई है।

इसी व्यापक कृषि संदर्भ में विशेषज्ञों के साथ संवाद में यह बात महत्वपूर्ण रही कि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी, पौधे और संसाधनों के संतुलित प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाए।

कीट एवं रोग प्रबंधन की चुनौती

लीची उत्पादन में कीट एवं रोग प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय है। विशेष रूप से 2026 में ICAR-NRCL ने लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर क्षमता निर्माण और फील्ड-अवेयरनेस कार्यक्रमों को तेज किया है। संस्थान ने समय रहते निगरानी और समेकित प्रबंधन उपायों को अपनाने पर जोर दिया है।

इस संदर्भ में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के व्यावहारिक अनुभव के बीच संवाद को कृषि उत्पादन की चुनौतियों को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा सकता है।

कटाई के बाद प्रबंधन और मूल्य संवर्धन

किसानों की आय और उत्पाद की उपयोगिता बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन भी महत्वपूर्ण हैं। ICAR के अनुसार लीची के क्षेत्र में शेल्फ लाइफ बढ़ाने, दूरस्थ परिवहन और मूल्यवर्धित उत्पादों से जुड़े शोध एवं तकनीक विकास भी संस्थान की गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं।

इसलिए कृषि विकास की चर्चा को खेत से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।

अनुसंधान से किसान तक तकनीक पहुंचाने पर जोर

कृषि अनुसंधान का प्रभाव तब अधिक व्यापक होता है, जब वैज्ञानिक जानकारी और विकसित तकनीक किसानों तक व्यावहारिक रूप में पहुंचती है। ICAR के व्यापक कृषि अनुसंधान ढांचे में तकनीक हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और किसानों के बीच ज्ञान के प्रसार को महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल किया गया है।

राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता इसी संदर्भ में अनुसंधान, कृषि अनुभव और किसान-केंद्रित विकास के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर बनी।

नवाचार से टिकाऊ कृषि की ओर

कृषि के बदलते स्वरूप में ऐसी तकनीकों की आवश्यकता बढ़ रही है, जो उत्पादन और गुणवत्ता के साथ संसाधन दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता और किसान हित को भी ध्यान में रखें। ICAR की प्राथमिकताओं में भी जलवायु-सहिष्णु तकनीक, संसाधन उपयोग दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता, कटाई-पश्चात प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ विशेषज्ञों के साथ हुई यह सहभागिता कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और व्यावहारिक कृषि अनुभव को एक साथ देखने का अवसर प्रदान करती है।

कृषि विकास के लिए संवाद की नई संभावनाएं

ICAR–National Research Centre on Litchi में श्री राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता ने अनुसंधान और कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा। मृदा एवं पोषण प्रबंधन से लेकर पौध संरक्षण, कीट नियंत्रण, कटाई के बाद प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और किसान तक तकनीक पहुंचाने तक—कृषि विकास की पूरी श्रृंखला पर विचार का आधार तैयार हुआ।

अनुसंधान प्रयोगशाला में विकसित ज्ञान जब किसान की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तभी नवाचार का लाभ खेत तक पहुंचने की संभावना मजबूत होती है। यही संवाद कृषि के अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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मिट्टी से समृद्धि तक : बगदाहा के किसानों के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह का कृषि एवं ग्रामीण विकास पर संवाद https://haritsansar.com/rajiv-singh-farmers-meeting-bagdaha-giridih-agriculture-rural-development/ Mon, 28 Sep 2026 08:16:26 +0000 https://haritsansar.com/?p=2165 बगदाहा, गिरिडीह, झारखंड | 27 सितंबर 2026।खेतों की मिट्टी से लेकर किसानों की मेहनत और गांव के भविष्य तक—कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के उद्देश्य से ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह ने 27 सितंबर Read More ...

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बगदाहा, गिरिडीह, झारखंड | 27 सितंबर 2026।
खेतों की मिट्टी से लेकर किसानों की मेहनत और गांव के भविष्य तक—कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के उद्देश्य से ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह ने 27 सितंबर 2026 को बगदाहा, गिरिडीह के किसानों के साथ मुलाकात की। इस दौरान किसानों के बीच बैठकर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े उनके अनुभव सुने और स्थानीय कृषि परिस्थितियों, खेती की चुनौतियों तथा ग्रामीण विकास की संभावनाओं पर विस्तार से संवाद किया।

यह मुलाकात केवल खेती की चर्चा तक सीमित नहीं रही। किसानों के साथ हुए संवाद में जैविक खेती, मिट्टी का स्वास्थ्य, आधुनिक कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

बगदाहा के किसानों के बीच पहुंचकर समझा खेती का जमीनी अनुभव

बगदाहा के किसानों के साथ संवाद के दौरान राजीव सिंह ने उनकी खेती से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों को करीब से समझने का प्रयास किया। किसानों से उनकी फसलों, खेतों में अपनाई जा रही कृषि पद्धतियों, उपलब्ध संसाधनों और खेती के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बातचीत की गई।

किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय स्तर पर खेती की परिस्थितियों और कृषि से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी बातें रखीं। इस संवाद में किसानों का जमीनी अनुभव प्रमुखता से सामने आया।

Rajiv Singh discussing agriculture and farmer development with local farmers in Bagdaha, Giridih
बगदाहा, गिरिडीह के किसानों के साथ राजीव सिंह ने कृषि विकास, खेती की बेहतर पद्धतियों और किसानों की जरूरतों को लेकर विचार-विमर्श किया।

कृषि विकास और आधुनिक खेती पर हुई चर्चा

मुलाकात के दौरान कृषि विकास और बेहतर कृषि पद्धतियों पर विशेष चर्चा हुई। मिट्टी की स्थिति को समझना, फसल की जरूरत के अनुसार कृषि प्रबंधन करना, पौधों की देखभाल और उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग जैसे विषय बातचीत का हिस्सा रहे।

राजीव सिंह ने किसानों के साथ इस बात पर चर्चा की कि पारंपरिक कृषि अनुभव को आधुनिक कृषि तकनीकों और नई जानकारी के साथ जोड़कर खेती से जुड़े कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।

जैविक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य पर जोर

बातचीत में जैविक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला। मिट्टी खेती की बुनियादी आधारशिला है और उसकी गुणवत्ता को बनाए रखना दीर्घकालिक कृषि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किसानों के साथ खेत की मिट्टी और फसल की आवश्यकता को समझने तथा कृषि संसाधनों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर भी विचार साझा किए गए। खेती में मिट्टी की भूमिका और उसके उचित प्रबंधन को लेकर किसानों के अनुभवों को भी चर्चा में शामिल किया गया।

किसानों की आवाज और अनुभव बने संवाद का केंद्र

बगदाहा के किसानों ने इस अवसर पर खेती से जुड़े अपने अनुभव, सवाल और स्थानीय परिस्थितियों को सामने रखा। किसानों की बातों को सुनते हुए कृषि से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई।

इस तरह का सीधा संवाद किसानों के जमीनी अनुभव और कृषि से जुड़ी नई जानकारी के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर देता है। खेतों की वास्तविक परिस्थितियों को समझकर कृषि से जुड़े विषयों पर बातचीत करना ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास की दिशा को समझने में उपयोगी हो सकता है।

Rajiv Singh meeting farmers in Bagdaha, Giridih, during a discussion on sustainable agriculture and rural development
बगदाहा, गिरिडीह में किसानों के साथ राजीव सिंह का कृषि संवाद हुआ, जिसमें टिकाऊ कृषि, किसान विकास और ग्रामीण प्रगति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

कृषि के साथ ग्रामीण विकास पर भी मंथन

बगदाहा में हुई यह बातचीत केवल फसल और खेती तक सीमित नहीं रही। ग्रामीण विकास और कृषि के आपसी संबंध पर भी विचार-विमर्श हुआ।

गांव की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका, किसानों की भागीदारी और कृषि आधारित ग्रामीण जीवन को मजबूत बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कृषि को बेहतर जानकारी, तकनीक और उपलब्ध संसाधनों से जोड़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के व्यापक अवसरों पर भी बातचीत हुई।

‘मिट्टी से समृद्धि तक’ की सोच

‘मिट्टी से समृद्धि तक’ का विचार इस पूरे संवाद का महत्वपूर्ण भाव रहा। मिट्टी, किसान और कृषि—इन तीनों को ग्रामीण विकास से जोड़ते हुए खेती को केवल फसल उत्पादन के रूप में नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था और जीवन का महत्वपूर्ण आधार मानकर चर्चा की गई।

राजीव सिंह ने किसानों के अनुभवों को सुना और कृषि से जुड़े विषयों पर उनके साथ विचार साझा किए। वहीं किसानों ने भी अपनी स्थानीय परिस्थितियों और खेती से जुड़े अनुभवों को सामने रखा।

बगदाहा से सामने आया कृषि संवाद का संदेश

27 सितंबर 2026 को बगदाहा, गिरिडीह में हुआ यह किसान संवाद कृषि, जैविक खेती, मिट्टी के स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे विषयों को एक साथ जोड़ता नजर आया।

खेतों में मेहनत करने वाले किसानों के अनुभवों को केंद्र में रखकर हुई यह बातचीत गांव की कृषि व्यवस्था को समझने और कृषि से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर बनी।

बगदाहा की मिट्टी से जुड़े किसानों के साथ यह संवाद एक ऐसी तस्वीर सामने लाता है, जहां किसान का अनुभव, कृषि का ज्ञान और ग्रामीण विकास की सोच एक साथ दिखाई देती है—और यही संवाद ‘मिट्टी से समृद्धि तक’ की यात्रा की एक महत्वपूर्ण शुरुआत बन सकता है।

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गांडेय के गजकुंडा में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह की किसानों संग बैठक, जैविक खेती और ग्रामीण विकास पर मंथन https://haritsansar.com/rajeev-singh-farmer-chaupal-gajkunda-gandey-organic-farming/ Sat, 26 Sep 2026 06:33:00 +0000 https://haritsansar.com/?p=2137 गांडेय (गिरिडीह), 26 सितंबर 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ने और गांवों में कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित करने के उद्देश्य से गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड अंतर्गत गजकुंडा Read More ...

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गांडेय (गिरिडीह), 26 सितंबर 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ने और गांवों में कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित करने के उद्देश्य से गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड अंतर्गत गजकुंडा गांव में शनिवार को किसानों के साथ एक विशेष किसान चौपाल एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने स्थानीय किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि में रुचि रखने वाले लोगों के साथ सीधे संवाद किया। इस दौरान खेती की वर्तमान चुनौतियों, मिट्टी की घटती उर्वरता, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों, फलदार पौधों के माध्यम से अतिरिक्त आय, कृषि प्रशिक्षण तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर सोनाली शर्मा, शुभम कुमार और आंचल सिंह सहित स्थानीय किसानों, युवाओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में कृषि विकास की संभावनाओं और किसानों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर अपने विचार साझा किए।

मिट्टी की सेहत से शुरू होगी टिकाऊ खेती

चौपाल के दौरान राजीव सिंह ने कहा कि खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता का आधार स्वस्थ मिट्टी है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से जैविक पदार्थों, कम्पोस्ट, वर्मीकंपोस्ट, बायो-फर्टिलाइजर्स और लाभकारी सूक्ष्मजीव आधारित कृषि इनपुट्स को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने किसानों को फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही पोषक तत्वों के प्रयोग तथा समय-समय पर मृदा परीक्षण कराने के महत्व की जानकारी दी।

‘हर गाँव फल बगान’ से आय और हरियाली दोनों बढ़ाने की पहल

बैठक में ‘हर गाँव फल बगान’ अभियान पर विशेष चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य गांवों में उपलब्ध खाली जमीन, घरों के आसपास के स्थान, खेतों की मेड़ और उपयुक्त कृषि भूमि पर फलदार पौधों को बढ़ावा देना है।

इसके तहत किसानों और ग्रामीण परिवारों को आम, अमरूद, नींबू, कटहल और आंवला जैसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फलदार पौधे लगाने तथा वैज्ञानिक तरीके से उनका संरक्षण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

राजीव सिंह ने कहा कि यदि फलदार पौधों को योजनाबद्ध तरीके से लगाया जाए तो इससे ग्रामीण परिवारों को पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाले वर्षों में अतिरिक्त और स्थायी आय का स्रोत भी मिल सकता है।

Sansar Green founder Rajiv Singh meeting with farmers in Gajkunda, Gandey, to discuss organic farming, sustainable agriculture and rural development
‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह ने गांडेय के गजकुंडा में किसानों के साथ बैठक की। इस दौरान जैविक खेती, टिकाऊ कृषि, किसानों की आवश्यकताओं और ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

किसानों को प्रशिक्षण और मृदा परीक्षण से जोड़ने की योजना

चर्चा के दौरान Sansar Institute of Agricultural Research & Training (SIART) के माध्यम से गांडेय क्षेत्र में किसानों को चरणबद्ध रूप से वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खाद निर्माण, पौध प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने की योजना साझा की गई।

किसानों के लिए मृदा परीक्षण एवं व्यावहारिक कृषि प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि किसान अनुमान के बजाय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर फसल एवं पोषण प्रबंधन से जुड़े निर्णय ले सकें।

बाजार से सीधा जुड़ाव और FPO को मजबूत करने पर जोर

किसानों ने चौपाल के दौरान बताया कि उत्पादन के बाद उपज का उचित मूल्य प्राप्त करना आज भी बड़ी चुनौती है। कई बार बाजार की सही जानकारी नहीं होने और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

इस पर राजीव सिंह ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सामूहिक विपणन, स्थानीय स्तर पर ग्रेडिंग-पैकिंग तथा डिजिटल मार्केट लिंकेज को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती; किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ना होगा।

“किसान की समृद्धि की शुरुआत स्वस्थ मिट्टी से होती है। हमारा प्रयास है कि किसान वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करें, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें और अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करें। गांडेय के गांवों में कृषि, हरियाली और ग्रामीण उद्यमिता को साथ लेकर आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।”

— राजीव सिंह, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, संसार ग्रीन

किसानों ने रखीं स्थानीय समस्याएं

संवाद के दौरान किसानों ने सिंचाई सुविधाओं की कमी, गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट्स की उपलब्धता, मिट्टी की जांच, तकनीकी मार्गदर्शन तथा फसलों का उचित बाजार मूल्य जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

राजीव सिंह ने कहा कि स्थानीय जरूरतों को समझकर ही प्रभावी कृषि मॉडल विकसित किया जा सकता है। संसार ग्रीन की ओर से किसानों को तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और आवश्यक कृषि मार्गदर्शन से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे।

सोनाली शर्मा, शुभम कुमार और आंचल सिंह ने भी किसानों के साथ संवाद करते हुए स्थानीय स्तर पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा कृषि और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों को गांवों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Sansar Green founder Rajiv Singh discussing organic farming and rural development with farmers in Gajkunda, Gandey
गजकुंडा में किसानों और ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह के बीच कृषि, जैविक खेती और ग्रामीण विकास को लेकर सार्थक संवाद हुआ।

गजकुंडा में होगी जैविक कृषि एवं मृदा संरक्षण कार्यशाला

चौपाल के अंत में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित योजना के तहत अगले माह गजकुंडा गांव में एक दिवसीय ‘जैविक कृषि एवं मृदा संरक्षण कार्यशाला’ आयोजित करने की तैयारी की जाएगी।

कार्यशाला में किसानों को जैविक खाद एवं कम्पोस्ट तैयार करने, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फलदार पौधों के रोपण एवं देखभाल, जैविक कृषि इनपुट्स के सही उपयोग और टिकाऊ खेती की व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

इस पहल को आगे चलकर गांडेय प्रखंड के अन्य गांवों तक विस्तारित करने की भी योजना है, ताकि मिट्टी की सेहत, किसान की आय, ग्रामीण उद्यमिता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए स्थानीय स्तर पर टिकाऊ कृषि विकास का मॉडल तैयार किया जा सके।

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भागलपुर की बेटी रिमी सिंह ने धरहरा में किसान महिलाओं से किया संवाद, पौध वितरण के साथ उन्नत खेती पर हुई चर्चा https://haritsansar.com/rimi-singh-women-farmers-dharhara-gopalpur-bihar/ Wed, 23 Sep 2026 09:02:45 +0000 https://haritsansar.com/?p=2156 गोपालपुर, भागलपुर | 23 सितंबर 2026 भागलपुर की मिट्टी और ग्रामीण जीवन से गहरा जुड़ाव रखने वाली भागलपुर की बेटी रिमी सिंह 23 सितंबर 2026 को भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत धरहरा गांव पहुंचीं। यहां उन्होंने किसान महिलाओं के Read More ...

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गोपालपुर, भागलपुर | 23 सितंबर 2026

भागलपुर की मिट्टी और ग्रामीण जीवन से गहरा जुड़ाव रखने वाली भागलपुर की बेटी रिमी सिंह 23 सितंबर 2026 को भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत धरहरा गांव पहुंचीं। यहां उन्होंने किसान महिलाओं के साथ आत्मीय मुलाकात की और उनके बीच बैठकर खेती-किसानी, स्थानीय कृषि परिस्थितियों, पौध संरक्षण और ग्रामीण जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया।

इस दौरान किसान महिलाओं के बीच पौधों का वितरण भी किया गया। पौधे पाकर महिलाओं में उत्साह नजर आया। पौध वितरण के साथ पौधों की देखभाल, संरक्षण और उन्हें उपयुक्त स्थान पर लगाने से जुड़ी जरूरी बातों पर भी चर्चा की गई। यह पहल गांव में हरियाली, पौध संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में सामने आई।

किसान महिलाओं के बीच बैठकर जाना खेती का अनुभव

धरहरा गांव में रिमी सिंह ने किसान महिलाओं के साथ सीधे संवाद करते हुए उनके खेती-किसानी के अनुभवों को जाना। महिलाओं ने अपने खेतों, फसलों और रोजमर्रा के कृषि कार्यों से जुड़ी बातें साझा कीं।

इस दौरान स्थानीय स्तर पर खेती में आने वाली चुनौतियों, फसल की देखभाल, सिंचाई, मिट्टी की स्थिति और पौधों के विकास से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई। किसान महिलाओं ने अपने अनुभव और सवाल सामने रखे, जिन्हें रिमी सिंह ने ध्यानपूर्वक सुना।

यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें भागलपुर की ग्रामीण किसान महिलाओं का जमीनी अनुभव और कृषि से जुड़ी उनकी व्यावहारिक समझ बातचीत के केंद्र में रही।

किसान महिलाओं के बीच किया पौधों का वितरण

धरहरा गांव में हुई इस मुलाकात का एक प्रमुख आकर्षण पौध वितरण रहा। रिमी सिंह ने किसान महिलाओं को पौधे सौंपे और उन्हें नियमित देखभाल एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

पौधा लगाने के बाद पर्याप्त पानी, उपयुक्त मिट्टी, आवश्यक पोषण और नियमित देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। इसी क्रम में महिलाओं के साथ पौधों की देखभाल और उनके बेहतर विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की गई।

महिलाओं के हाथों में पौधे और उनके बीच खेती एवं हरियाली से जुड़ी चर्चा ने कार्यक्रम को एक जीवंत ग्रामीण स्वरूप दिया।

उन्नत कृषि तकनीकों और आधुनिक खेती पर चर्चा

भागलपुर की बेटी रिमी सिंह ने किसान महिलाओं के साथ उन्नत कृषि तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। बातचीत में मिट्टी की स्थिति को समझने, फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषण प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और पौधों की समय पर देखभाल जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेती में मेहनत के साथ सही जानकारी और उचित कृषि पद्धति भी महत्वपूर्ण होती है। किसान अपनी मिट्टी, फसल और स्थानीय परिस्थितियों की जरूरत को समझकर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर तरीके से उपयोग कर सकते हैं।

किसान महिलाओं ने साझा किए अपने सवाल और अनुभव

मुलाकात के दौरान किसान महिलाओं ने खेती से जुड़े अपने सवाल पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए। भागलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं खेती के अनेक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

बीज लगाने से लेकर पौधों की देखभाल, निराई-गुड़ाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन तक कृषि की कई गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। ऐसे में महिलाओं तक कृषि संबंधी नई और उपयोगी जानकारी पहुंचाना तथा उनके पारंपरिक और व्यावहारिक अनुभवों को समझना ग्रामीण कृषि संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मिट्टी, पौधे और किसान के बीच बेहतर तालमेल पर जोर

चर्चा के दौरान खेती में मिट्टी, पौधे और किसान की समझ के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी बात हुई। पौधे की जरूरत को समझना, मिट्टी की स्थिति के अनुरूप पौध प्रबंधन करना, पानी का संतुलित उपयोग और समय-समय पर पौधों की निगरानी बेहतर खेती के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

इस संवाद ने खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए पौधों को समझने, उनकी जरूरत पहचानने और सही तरीके से देखभाल करने की दिशा में भी ध्यान आकर्षित किया।

धरहरा में दिखी किसान महिलाओं की सक्रिय भागीदारी

धरहरा गांव में हुई इस मुलाकात के दौरान किसान महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। महिलाएं न केवल अपनी खेती से जुड़े अनुभव साझा कर रही थीं, बल्कि पौधों और कृषि तकनीकों को लेकर अपनी जिज्ञासाएं भी सामने रख रही थीं।

भागलपुर की बेटी रिमी सिंह और धरहरा गांव की किसान महिलाओं के बीच यह संवाद ग्रामीण कृषि जीवन की उस तस्वीर को सामने लाता है, जहां पारंपरिक अनुभव, नई कृषि जानकारी और प्रकृति के प्रति जुड़ाव एक साथ दिखाई देते हैं।

भागलपुर की बेटी का अपनी मिट्टी और लोगों से जुड़ाव

रिमी सिंह के लिए यह कार्यक्रम केवल एक ग्रामीण कृषि संवाद तक सीमित नहीं रहा। भागलपुर की बेटी के रूप में अपने क्षेत्र की किसान महिलाओं के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनना, उनके अनुभवों को समझना और उनके साथ पौध संरक्षण तथा बेहतर खेती पर चर्चा करना इस मुलाकात को एक आत्मीय स्वरूप देता है।

भागलपुर की कृषि परंपरा और ग्रामीण जीवन से उनका जुड़ाव इस संवाद में साफ दिखाई दिया। किसान महिलाओं के बीच बैठकर बातचीत करने और उन्हें पौधे सौंपने के माध्यम से स्थानीय स्तर पर हरियाली, कृषि जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी का संदेश भी सामने आया।

खेती की चर्चा से पौध संरक्षण तक पहुंचा संवाद

23 सितंबर 2026 को भागलपुर के धरहरा गांव में हुई यह मुलाकात केवल खेती-किसानी पर बातचीत तक सीमित नहीं रही। किसान महिलाओं से सीधा संवाद, उन्नत कृषि तकनीकों पर चर्चा और पौधों का वितरण—इन तीनों पहलुओं ने इस कार्यक्रम को विशेष बनाया।

किसान महिलाओं को पौधे सौंपना इस मुलाकात का खास क्षण रहा। इससे ग्रामीण महिलाओं को पौधों की देखभाल, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का संदेश भी मिला।

भागलपुर की धरती पर भागलपुर की बेटी रिमी सिंह और किसान महिलाओं के बीच हुआ यह संवाद उस सोच को सामने लाता है कि जब ग्रामीण महिलाओं का कृषि अनुभव, आधुनिक खेती की जानकारी और पौध संरक्षण की भावना एक साथ जुड़ती है, तो गांवों में बेहतर खेती, ज्ञान और हरियाली को आगे बढ़ाने की नई संभावनाएं बनती हैं।

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