हरित संसार https://haritsansar.com/ (मिलकर लाएँ हरियाली) Tue, 06 Oct 2026 09:10:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://haritsansar.com/wp-content/uploads/2026/05/cropped-Logo-harit-sansar-32x32.png हरित संसार https://haritsansar.com/ 32 32 कृषि अनुसंधान, नवाचार और सहयोग को नई दिशा: ICAR, नई दिल्ली में राजीव सिंह का सम्मान, MoU पर हुआ महत्वपूर्ण समझौता https://haritsansar.com/rajeev-singh-icar-new-delhi-mou-agricultural-research-innovation/ Tue, 06 Oct 2026 09:10:19 +0000 https://haritsansar.com/?p=2194 नई दिल्ली | 01 अक्टूबर 2026। कृषि अनुसंधान, नवाचार और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह की ICAR, नई Read More ...

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नई दिल्ली | 01 अक्टूबर 2026।

कृषि अनुसंधान, नवाचार और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह की ICAR, नई दिल्ली में महत्वपूर्ण सहभागिता के दौरान उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं नवाचार को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के उद्देश्य से MoU पर महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ।

यह पहल कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीक, नवाचार और किसान हित के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की संभावनाओं को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

सम्मान के साथ सहयोग की नई शुरुआत

ICAR जैसे राष्ट्रीय स्तर के कृषि अनुसंधान तंत्र के साथ संवाद और सहभागिता कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान राजीव सिंह का सम्मान किया गया, जो कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके प्रयासों के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना को दर्शाता है।

सम्मान के साथ हुआ MoU इस सहभागिता को एक व्यापक सहयोगात्मक दिशा प्रदान करता है, जिसमें अनुसंधान और नवाचार को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं।

MoU के केंद्र में कृषि अनुसंधान और नवाचार

MoU के माध्यम से कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों, नवाचार और जमीनी स्तर पर उनके उपयोग को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

इस पहल के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहे—

  • कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचार
  • वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना
  • मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन
  • फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार
  • जैविक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा
  • कृषि संसाधनों के बेहतर एवं दक्ष उपयोग
  • किसानों की तकनीकी क्षमता और जागरूकता बढ़ाना
  • अनुसंधान एवं फील्ड स्तर के अनुभवों के बीच बेहतर समन्वय
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित नवाचार और विकास की संभावनाएं

इस प्रकार MoU को ‘रिसर्च से फील्ड और फील्ड से किसान’ तक ज्ञान एवं तकनीक के प्रभावी प्रवाह की दिशा में एक सहयोगात्मक कदम के रूप में देखा जा सकता है।

अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर

कृषि अनुसंधान का उद्देश्य तभी अधिक प्रभावी बनता है, जब वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीक किसानों की वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो। इसी सोच के तहत किसानों की जमीनी समस्याओं, स्थानीय कृषि परिस्थितियों और आधुनिक तकनीकी समाधानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

राजीव सिंह की सहभागिता इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखती है कि कृषि विकास केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मिट्टी का स्वास्थ्य, संसाधनों का संरक्षण, तकनीकी ज्ञान, किसान प्रशिक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था भी शामिल है।

ICAR और जमीनी कृषि के बीच संवाद की अहमियत

ICAR का कृषि अनुसंधान तंत्र टिकाऊ कृषि, तकनीकी विकास, संसाधन दक्षता, क्षमता निर्माण और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों पर कार्य करता है।

ऐसे में संस्थागत स्तर पर होने वाला संवाद वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के अनुभवों के बीच एक मजबूत सेतु बनाने में उपयोगी हो सकता है। यही कारण है कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान संस्थानों, विशेषज्ञों और जमीनी स्तर पर सक्रिय संगठनों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवाचार से टिकाऊ कृषि की ओर

आज कृषि के सामने मिट्टी की उर्वरता, जल संसाधनों का संरक्षण, बदलती जलवायु, उत्पादन लागत और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय कृषि अनुभवों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।

MoU के माध्यम से सहयोग की यह पहल कृषि क्षेत्र में ऐसे नवाचारों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित करती है, जो किसान-केंद्रित, संसाधन-कुशल और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकें।

राजीव सिंह की सहभागिता ने दिया सहयोग का संदेश

‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह का ICAR, नई दिल्ली में सम्मान और MoU पर हुआ समझौता कृषि अनुसंधान, नवाचार और जमीनी कृषि के बीच सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आया है।

इस पहल का व्यापक संदेश स्पष्ट है—जब वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और किसानों की वास्तविक जरूरतें एक मंच पर आती हैं, तो कृषि विकास के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।

अनुसंधान से नवाचार, नवाचार से तकनीक और तकनीक से किसान—यही कृषि विकास को नई दिशा देने वाली सहयोग की मजबूत कड़ी है।

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अनुसंधान, नवाचार और कृषि विकास की दिशा में नई पहल: ICAR–National Research Centre on Litchi में विशेषज्ञों के साथ राजीव सिंह की सहभागिता https://haritsansar.com/rajeev-singh-icar-nrcl-muzaffarpur-litchi-research/ Thu, 01 Oct 2026 09:08:02 +0000 https://haritsansar.com/?p=2184 मुजफ्फरपुर, बिहार | 30 सितंबर 2026। कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी सोच के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह ने ICAR–National Read More ...

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मुजफ्फरपुर, बिहार | 30 सितंबर 2026।

कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी सोच के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक श्री राजीव सिंह ने ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर में कृषि विशेषज्ञों के साथ सहभागिता की। इस दौरान लीची एवं बागवानी क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान, उत्पादन तकनीक, पौध संरक्षण और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने जैसे विषयों पर संवाद हुआ।

ICAR–National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र है। संस्थान का कार्य लीची की उत्पादकता, गुणवत्ता और सुरक्षित उत्पादन के साथ तकनीक हस्तांतरण एवं हितधारकों की क्षमता निर्माण से भी जुड़ा है।

विशेषज्ञों के साथ चर्चा के प्रमुख बिंदु

सहभागिता के दौरान कृषि एवं बागवानी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा गया। इनमें प्रमुख रूप से—

  • लीची की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने की आधुनिक तकनीकें
  • मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन
  • पौधों के स्वास्थ्य और बेहतर बाग प्रबंधन
  • कीट एवं रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय
  • लीची स्टिंक बग जैसी उभरती चुनौतियों की निगरानी और समेकित प्रबंधन
  • जल एवं अन्य कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग
  • कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण और शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीकें
  • लीची आधारित मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की संभावनाएं
  • अनुसंधान से विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था
  • किसानों की क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक कृषि जानकारी का प्रसार

ICAR-NRCL ने अगस्त 2026 में लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, विस्तार कर्मियों और किसानों के बीच समन्वय तथा क्षेत्रीय जागरूकता पर विशेष कार्यक्रम भी चलाया था।

मृदा, पोषण और पौध स्वास्थ्य पर विशेष महत्व

फलदार फसलों की उत्पादकता में मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लीची के संदर्भ में ICAR के वैज्ञानिक कार्यक्रमों में पोषक तत्वों की कमी, मृदा उर्वरता और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर भी किसानों को तकनीकी जानकारी दी गई है।

इसी व्यापक कृषि संदर्भ में विशेषज्ञों के साथ संवाद में यह बात महत्वपूर्ण रही कि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी, पौधे और संसाधनों के संतुलित प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाए।

कीट एवं रोग प्रबंधन की चुनौती

लीची उत्पादन में कीट एवं रोग प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय है। विशेष रूप से 2026 में ICAR-NRCL ने लीची स्टिंक बग के प्रबंधन को लेकर क्षमता निर्माण और फील्ड-अवेयरनेस कार्यक्रमों को तेज किया है। संस्थान ने समय रहते निगरानी और समेकित प्रबंधन उपायों को अपनाने पर जोर दिया है।

इस संदर्भ में वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के व्यावहारिक अनुभव के बीच संवाद को कृषि उत्पादन की चुनौतियों को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा सकता है।

कटाई के बाद प्रबंधन और मूल्य संवर्धन

किसानों की आय और उत्पाद की उपयोगिता बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन भी महत्वपूर्ण हैं। ICAR के अनुसार लीची के क्षेत्र में शेल्फ लाइफ बढ़ाने, दूरस्थ परिवहन और मूल्यवर्धित उत्पादों से जुड़े शोध एवं तकनीक विकास भी संस्थान की गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं।

इसलिए कृषि विकास की चर्चा को खेत से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।

अनुसंधान से किसान तक तकनीक पहुंचाने पर जोर

कृषि अनुसंधान का प्रभाव तब अधिक व्यापक होता है, जब वैज्ञानिक जानकारी और विकसित तकनीक किसानों तक व्यावहारिक रूप में पहुंचती है। ICAR के व्यापक कृषि अनुसंधान ढांचे में तकनीक हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और किसानों के बीच ज्ञान के प्रसार को महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल किया गया है।

राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता इसी संदर्भ में अनुसंधान, कृषि अनुभव और किसान-केंद्रित विकास के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर बनी।

नवाचार से टिकाऊ कृषि की ओर

कृषि के बदलते स्वरूप में ऐसी तकनीकों की आवश्यकता बढ़ रही है, जो उत्पादन और गुणवत्ता के साथ संसाधन दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता और किसान हित को भी ध्यान में रखें। ICAR की प्राथमिकताओं में भी जलवायु-सहिष्णु तकनीक, संसाधन उपयोग दक्षता, पर्यावरणीय स्थिरता, कटाई-पश्चात प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ विशेषज्ञों के साथ हुई यह सहभागिता कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और व्यावहारिक कृषि अनुभव को एक साथ देखने का अवसर प्रदान करती है।

कृषि विकास के लिए संवाद की नई संभावनाएं

ICAR–National Research Centre on Litchi में श्री राजीव सिंह की विशेषज्ञों के साथ सहभागिता ने अनुसंधान और कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा। मृदा एवं पोषण प्रबंधन से लेकर पौध संरक्षण, कीट नियंत्रण, कटाई के बाद प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और किसान तक तकनीक पहुंचाने तक—कृषि विकास की पूरी श्रृंखला पर विचार का आधार तैयार हुआ।

अनुसंधान प्रयोगशाला में विकसित ज्ञान जब किसान की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तभी नवाचार का लाभ खेत तक पहुंचने की संभावना मजबूत होती है। यही संवाद कृषि के अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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हरित बिहार, समृद्ध किसान: भागलपुर की बेटी श्रीमती रिमी सिंह ने किसानों को सौंपी हरियाली की सौगात, फलदार पौधों से समृद्ध गांवों का लिया संकल्प https://haritsansar.com/rimi-singh-fruit-plants-farmers-panchgachia-bhagalpur/ Thu, 01 Oct 2026 07:05:45 +0000 https://haritsansar.com/?p=2177 पंचगछिया, भागलपुर | 30 सितंबर 2026। गांव की मिट्टी में लगाया गया एक पौधा केवल हरियाली नहीं बढ़ाता, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक नई उम्मीद भी तैयार करता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए भागलपुर की बेटी Read More ...

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पंचगछिया, भागलपुर | 30 सितंबर 2026।

गांव की मिट्टी में लगाया गया एक पौधा केवल हरियाली नहीं बढ़ाता, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक नई उम्मीद भी तैयार करता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए भागलपुर की बेटी श्रीमती रिमी सिंह ने भागलपुर जिले के पंचगछिया गांव में किसानों को फलदार पौधे सौंपे। इस पहल के माध्यम से गांव में हरियाली बढ़ाने, किसानों को पौधों के संरक्षण से जोड़ने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

किसानों के बीच फलदार पौधों का वितरण करते हुए रिमी सिंह ने पौधरोपण के साथ उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया। किसानों की भागीदारी के साथ यह पहल गांव के स्तर पर हरित सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास रही।

पंचगछिया के किसानों के हाथों में पहुंची हरियाली

पंचगछिया गांव में किसानों को फलदार पौधे सौंपे गए, जिन्हें वे अपने खेतों, घरों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर लगा सकते हैं। पौधों का वितरण किसानों को सीधे हरित पहल से जोड़ने की दिशा में एक कदम रहा।

एक पौधा जब किसान के हाथों से मिट्टी तक पहुंचता है, तो उसके साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी जुड़ जाती है। यही जिम्मेदारी भविष्य में उस पौधे को एक मजबूत पेड़ का रूप देने की आधारशिला बनती है।

पौधा लगाने से आगे, उसे बचाने की जिम्मेदारी

पौधरोपण के बाद उसकी देखभाल सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। किसानों को पौधों की सुरक्षा, नियमित पानी और आवश्यक देखभाल पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया।

इस पहल के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि हरित भविष्य केवल अधिक पौधे लगाने से नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों को सुरक्षित और जीवित रखने से तैयार होता है।

फलदार पौधों से गांव की हरियाली को नई पहचान

फलदार पेड़ ग्रामीण परिवेश में हरियाली और प्रकृति से जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। खेतों और घरों के आसपास लगाए गए पौधे समय के साथ गांव के प्राकृतिक परिवेश को अधिक हरा-भरा बना सकते हैं।

पंचगछिया में फलदार पौधों का वितरण इसी सोच से जुड़ा रहा कि हरियाली गांव के जीवन का हिस्सा बने और किसान स्वयं इस बदलाव के सहभागी बनें।

किसान बने हरित पहल के सहभागी

इस पहल में किसानों की भूमिका केवल पौधे प्राप्त करने तक सीमित नहीं रही। पौधों को लगाने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उनके साथ जुड़ी।

जब किसान स्वयं पौधे लगाते और उन्हें बढ़ते हुए देखते हैं, तो प्रकृति से उनका जुड़ाव और मजबूत होता है। यही स्थानीय भागीदारी गांवों में हरित प्रयासों को निरंतरता देने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

भागलपुर की बेटी का गांवों तक पहुंचा हरित संदेश

श्रीमती रिमी सिंह ने पंचगछिया के किसानों के साथ इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश साझा किया। उनका यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्र में पौधों के महत्व और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी को सामने लाता है।

हरियाली किसी एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि लगातार निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। एक पौधे की देखभाल से शुरू हुई यह सोच धीरे-धीरे पूरे गांव के प्राकृतिक परिवेश को प्रभावित कर सकती है।

पंचगछिया से समृद्ध और हरे गांवों की ओर कदम

पंचगछिया की मिट्टी में लगाए जाने वाले ये फलदार पौधे आज छोटे हैं, लेकिन आने वाले समय में यही पौधे गांव की हरियाली का हिस्सा बन सकते हैं। उनकी देखभाल और संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर प्राकृतिक वातावरण तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

30 सितंबर 2026 को पंचगछिया गांव में किसानों को फलदार पौधे सौंपने की यह पहल किसान सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण हरियाली की सोच को एक साथ जोड़ती नजर आई।

किसानों के हाथों में सौंपा गया प्रत्येक पौधा केवल एक पौधा नहीं, बल्कि पंचगछिया की मिट्टी से जुड़े एक हरित भविष्य की उम्मीद है—जिसकी जड़ें आज रोपी जा रही हैं और जिसका असर आने वाले वर्षों में दिखाई दे सकता है।

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हरित भविष्य की ओर नई पहल: भागलपुर की बेटी श्रीमती रिमी सिंह ने +2 ज़िला स्कूल, भागलपुर में विद्यार्थियों के साथ किया पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश https://haritsansar.com/rimi-singh-students-tree-plantation-plus-2-zila-school-bhagalpur/ Mon, 28 Sep 2026 09:13:48 +0000 https://haritsansar.com/?p=2172 भागलपुर | 25 सितंबर 2026। पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल शब्दों तक सीमित न रहकर जब धरातल पर दिखाई देता है, तो उसकी तस्वीर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन जाती है। इसी भावना के साथ भागलपुर की Read More ...

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भागलपुर | 25 सितंबर 2026।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल शब्दों तक सीमित न रहकर जब धरातल पर दिखाई देता है, तो उसकी तस्वीर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन जाती है। इसी भावना के साथ भागलपुर की बेटी श्रीमती रिमी सिंह ने +2 ज़िला स्कूल, भागलपुर में विद्यार्थियों के साथ पौधरोपण कर हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के साथ पौधे लगाते हुए रिमी सिंह ने बच्चों को प्रकृति से जुड़ने, पौधों की देखभाल करने और अपने आसपास के वातावरण को हरा-भरा बनाने के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों ने भी पूरे उत्साह के साथ पौधरोपण में भाग लिया।

विद्यार्थियों के साथ पौधरोपण, सीख के साथ जिम्मेदारी

इस अवसर पर रिमी सिंह ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर पौधे लगाए। बच्चों ने पौधों को मिट्टी में रोपने से लेकर उनके आसपास की मिट्टी को व्यवस्थित करने तक की गतिविधियों में हिस्सा लिया।

पौधरोपण के दौरान इस बात पर विशेष जोर रहा कि पौधा लगाना केवल शुरुआत है, उसकी नियमित देखभाल ही उसे जीवन देती है। विद्यार्थियों को लगाए गए पौधों की जिम्मेदारी लेने और समय-समय पर उनकी स्थिति पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश नई पीढ़ी तक

विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए रिमी सिंह ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को सरल तरीके से समझाया। पेड़-पौधे हमारे आसपास के प्राकृतिक वातावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और हरियाली को बढ़ाने में पौधरोपण की भूमिका महत्वपूर्ण है।

विद्यालय जैसे स्थानों पर इस तरह की गतिविधियां बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर भी देती हैं।

पौधों के साथ विद्यार्थियों का जुड़ाव

पौधरोपण के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। अपने हाथों से पौधे लगाने का अनुभव बच्चों के लिए सीखने का एक अलग अवसर बना।

पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल, पानी देने और उन्हें सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी पर भी चर्चा हुई। इस तरह गतिविधि ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में अपनाई जाने वाली जिम्मेदारी भी है।

विद्यालय परिसर से हरियाली का संदेश

+2 ज़िला स्कूल, भागलपुर में हुआ यह पौधरोपण विद्यालय परिसर को हरियाली से जोड़ने के साथ एक व्यापक पर्यावरणीय संदेश भी देता है। जब विद्यार्थी स्वयं पौधे लगाते हैं, तो वे प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को केवल सुनते नहीं, बल्कि उसे अपने अनुभव का हिस्सा बनाते हैं।

रिमी सिंह ने विद्यार्थियों को पौधों की देखभाल के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आज लगाया गया पौधा आने वाले वर्षों में किसी के लिए छाया, हरियाली और प्रकृति से जुड़ाव का माध्यम बन सकता है।

भागलपुर की बेटी का विद्यार्थियों के साथ संवाद

भागलपुर की बेटी श्रीमती रिमी सिंह का विद्यार्थियों के साथ यह जुड़ाव स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल रहा।

पौधरोपण के दौरान विद्यार्थियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया। बच्चों के हाथों में पौधे और उनके चेहरे पर उत्साह ने यह संदेश दिया कि हरित भविष्य की नींव छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से ही मजबूत होती है।

एक पौधा, एक जिम्मेदारी, एक हरित भविष्य

आज विद्यालय परिसर में लगाया गया एक छोटा पौधा आने वाले समय में बड़ा होकर हरियाली का हिस्सा बनेगा। लेकिन इसके साथ जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात है उसकी नियमित देखभाल और संरक्षण।

+2 ज़िला स्कूल, भागलपुर में श्रीमती रिमी सिंह और विद्यार्थियों द्वारा किया गया यह पौधरोपण प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, विद्यार्थियों की भागीदारी और हरित भविष्य की सोच को एक साथ जोड़ने वाला सार्थक अवसर बना।

हर पौधा केवल मिट्टी में लगाया गया एक पौधा नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए हरियाली और जिम्मेदारी का एक संकल्प है।

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मिट्टी से समृद्धि तक : बगदाहा के किसानों के साथ ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह का कृषि एवं ग्रामीण विकास पर संवाद https://haritsansar.com/rajiv-singh-farmers-meeting-bagdaha-giridih-agriculture-rural-development/ Mon, 28 Sep 2026 08:16:26 +0000 https://haritsansar.com/?p=2165 बगदाहा, गिरिडीह, झारखंड | 27 सितंबर 2026।खेतों की मिट्टी से लेकर किसानों की मेहनत और गांव के भविष्य तक—कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के उद्देश्य से ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह ने 27 सितंबर Read More ...

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बगदाहा, गिरिडीह, झारखंड | 27 सितंबर 2026।
खेतों की मिट्टी से लेकर किसानों की मेहनत और गांव के भविष्य तक—कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के उद्देश्य से ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह ने 27 सितंबर 2026 को बगदाहा, गिरिडीह के किसानों के साथ मुलाकात की। इस दौरान किसानों के बीच बैठकर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े उनके अनुभव सुने और स्थानीय कृषि परिस्थितियों, खेती की चुनौतियों तथा ग्रामीण विकास की संभावनाओं पर विस्तार से संवाद किया।

यह मुलाकात केवल खेती की चर्चा तक सीमित नहीं रही। किसानों के साथ हुए संवाद में जैविक खेती, मिट्टी का स्वास्थ्य, आधुनिक कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

बगदाहा के किसानों के बीच पहुंचकर समझा खेती का जमीनी अनुभव

बगदाहा के किसानों के साथ संवाद के दौरान राजीव सिंह ने उनकी खेती से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों को करीब से समझने का प्रयास किया। किसानों से उनकी फसलों, खेतों में अपनाई जा रही कृषि पद्धतियों, उपलब्ध संसाधनों और खेती के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बातचीत की गई।

किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय स्तर पर खेती की परिस्थितियों और कृषि से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी बातें रखीं। इस संवाद में किसानों का जमीनी अनुभव प्रमुखता से सामने आया।

Rajiv Singh discussing agriculture and farmer development with local farmers in Bagdaha, Giridih
बगदाहा, गिरिडीह के किसानों के साथ राजीव सिंह ने कृषि विकास, खेती की बेहतर पद्धतियों और किसानों की जरूरतों को लेकर विचार-विमर्श किया।

कृषि विकास और आधुनिक खेती पर हुई चर्चा

मुलाकात के दौरान कृषि विकास और बेहतर कृषि पद्धतियों पर विशेष चर्चा हुई। मिट्टी की स्थिति को समझना, फसल की जरूरत के अनुसार कृषि प्रबंधन करना, पौधों की देखभाल और उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग जैसे विषय बातचीत का हिस्सा रहे।

राजीव सिंह ने किसानों के साथ इस बात पर चर्चा की कि पारंपरिक कृषि अनुभव को आधुनिक कृषि तकनीकों और नई जानकारी के साथ जोड़कर खेती से जुड़े कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।

जैविक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य पर जोर

बातचीत में जैविक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला। मिट्टी खेती की बुनियादी आधारशिला है और उसकी गुणवत्ता को बनाए रखना दीर्घकालिक कृषि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किसानों के साथ खेत की मिट्टी और फसल की आवश्यकता को समझने तथा कृषि संसाधनों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर भी विचार साझा किए गए। खेती में मिट्टी की भूमिका और उसके उचित प्रबंधन को लेकर किसानों के अनुभवों को भी चर्चा में शामिल किया गया।

किसानों की आवाज और अनुभव बने संवाद का केंद्र

बगदाहा के किसानों ने इस अवसर पर खेती से जुड़े अपने अनुभव, सवाल और स्थानीय परिस्थितियों को सामने रखा। किसानों की बातों को सुनते हुए कृषि से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई।

इस तरह का सीधा संवाद किसानों के जमीनी अनुभव और कृषि से जुड़ी नई जानकारी के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर देता है। खेतों की वास्तविक परिस्थितियों को समझकर कृषि से जुड़े विषयों पर बातचीत करना ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास की दिशा को समझने में उपयोगी हो सकता है।

Rajiv Singh meeting farmers in Bagdaha, Giridih, during a discussion on sustainable agriculture and rural development
बगदाहा, गिरिडीह में किसानों के साथ राजीव सिंह का कृषि संवाद हुआ, जिसमें टिकाऊ कृषि, किसान विकास और ग्रामीण प्रगति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

कृषि के साथ ग्रामीण विकास पर भी मंथन

बगदाहा में हुई यह बातचीत केवल फसल और खेती तक सीमित नहीं रही। ग्रामीण विकास और कृषि के आपसी संबंध पर भी विचार-विमर्श हुआ।

गांव की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका, किसानों की भागीदारी और कृषि आधारित ग्रामीण जीवन को मजबूत बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कृषि को बेहतर जानकारी, तकनीक और उपलब्ध संसाधनों से जोड़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के व्यापक अवसरों पर भी बातचीत हुई।

‘मिट्टी से समृद्धि तक’ की सोच

‘मिट्टी से समृद्धि तक’ का विचार इस पूरे संवाद का महत्वपूर्ण भाव रहा। मिट्टी, किसान और कृषि—इन तीनों को ग्रामीण विकास से जोड़ते हुए खेती को केवल फसल उत्पादन के रूप में नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था और जीवन का महत्वपूर्ण आधार मानकर चर्चा की गई।

राजीव सिंह ने किसानों के अनुभवों को सुना और कृषि से जुड़े विषयों पर उनके साथ विचार साझा किए। वहीं किसानों ने भी अपनी स्थानीय परिस्थितियों और खेती से जुड़े अनुभवों को सामने रखा।

बगदाहा से सामने आया कृषि संवाद का संदेश

27 सितंबर 2026 को बगदाहा, गिरिडीह में हुआ यह किसान संवाद कृषि, जैविक खेती, मिट्टी के स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे विषयों को एक साथ जोड़ता नजर आया।

खेतों में मेहनत करने वाले किसानों के अनुभवों को केंद्र में रखकर हुई यह बातचीत गांव की कृषि व्यवस्था को समझने और कृषि से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर बनी।

बगदाहा की मिट्टी से जुड़े किसानों के साथ यह संवाद एक ऐसी तस्वीर सामने लाता है, जहां किसान का अनुभव, कृषि का ज्ञान और ग्रामीण विकास की सोच एक साथ दिखाई देती है—और यही संवाद ‘मिट्टी से समृद्धि तक’ की यात्रा की एक महत्वपूर्ण शुरुआत बन सकता है।

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गढ़वा विश्वविद्यालय की कृषि तकनीक से झारखंड के किसानों को जोड़ने की पहल : राजीव सिंह https://haritsansar.com/rajeev-singh-garhwa-university-agriculture-jharkhand-farmers/ Sun, 27 Sep 2026 05:47:13 +0000 https://haritsansar.com/?p=2136 प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए राजीव सिंह; कृषि विशेषज्ञों के साथ बैठक में गिरिडीह के किसानों तक तकनीक, प्रशिक्षण और शोध का लाभ पहुंचाने पर हुई चर्चा गिरिडीह। गढ़वा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रथम दीक्षांत Read More ...

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प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए राजीव सिंह; कृषि विशेषज्ञों के साथ बैठक में गिरिडीह के किसानों तक तकनीक, प्रशिक्षण और शोध का लाभ पहुंचाने पर हुई चर्चा

गिरिडीह। गढ़वा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रथम दीक्षांत समारोह में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह को उद्योग विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया। समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह, वरिष्ठ शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में आयोजित समारोह में राजीव सिंह ने भी मंच से अपने विचार साझा किए।

दीक्षांत समारोह के बाद राजीव सिंह ने विश्वविद्यालय के कृषि क्षेत्र से जुड़े शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के साथ विशेष बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालय में उपलब्ध कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी विशेषज्ञता को झारखंड के किसानों, विशेष रूप से गिरिडीह क्षेत्र के किसानों से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

राजीव सिंह ने कहा—खेतों तक पहुंचे विश्वविद्यालय का कृषि ज्ञान

बैठक में मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन, टिकाऊ खेती, जैव एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीक, किसान प्रशिक्षण, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

चर्चा का विशेष फोकस इस बात पर रहा कि किसानों की स्थानीय समस्याओं और खेत स्तर की वास्तविक परिस्थितियों को कृषि विशेषज्ञों तक पहुंचाया जाए तथा विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के पास उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान एवं तकनीक का व्यावहारिक लाभ किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाए।

राजीव सिंह ने कहा, “विश्वविद्यालयों में विकसित कृषि ज्ञान और तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह खेत और किसान तक पहुंचे। हमारा प्रयास रहेगा कि गिरिडीह सहित झारखंड के किसानों को गढ़वा विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों, नई तकनीकों और प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ा जा सके।”

Rajeev Singh seated on stage with Jharkhand Governor Santosh Kumar Gangwar, Garhwa University Chancellor, Vice Chancellor and university dignitaries during the First Convocation.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के मंच पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ उद्योग विशेषज्ञ राजीव सिंह।

राजीव सिंह ने कृषि विशेषज्ञों से मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीक पर की चर्चा

बैठक के दौरान बदलती कृषि परिस्थितियों में मृदा स्वास्थ्य सुधार और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन की आवश्यकता पर चर्चा हुई। जैविक एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीकों के उपयोग, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समाधान विकसित करने और किसानों तक व्यावहारिक जानकारी पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

राजीव सिंह ने कहा कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच नियमित संवाद विकसित होने से खेत स्तर की समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में मदद मिल सकती है। किसानों के व्यावहारिक अनुभव और विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक विशेषज्ञता को जोड़कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल समाधान विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।

किसान प्रशिक्षण और तकनीकी संवाद पर राजीव सिंह का जोर

बैठक में भविष्य में किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञ संवाद, कृषि तकनीक प्रदर्शन और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसी गतिविधियों के माध्यम से इस संपर्क को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

इसका उद्देश्य किसानों को केवल नई तकनीकों की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि कृषि विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का अवसर उपलब्ध कराना भी है, ताकि वे मृदा, फसल, पोषण, उत्पादन और अन्य कृषि संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

राजीव सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय, कृषि विशेषज्ञ, कृषि उद्यम और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से शोध और तकनीक का जमीनी स्तर पर उपयोग बढ़ाया जा सकता है। इससे विश्वविद्यालयों में उपलब्ध ज्ञान और किसानों के खेत स्तर के अनुभव के बीच एक प्रभावी सेतु तैयार हो सकता है।

Rajeev Singh with Garhwa University Vice Chancellor Dr. M. K. Singh and university team during the First Convocation, discussing agriculture and farmer-focused initiatives.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं विश्वविद्यालय की टीम के साथ उद्योग विशेषज्ञ एवं संसार ग्रीन के संस्थापक राजीव सिंह।

गिरिडीह के किसानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर : राजीव सिंह

राजीव सिंह ने गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में शामिल होने और कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद के अवसर को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संस्थागत संपर्क भविष्य में गिरिडीह सहित झारखंड के किसानों को कृषि तकनीक, प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जोड़ने में उपयोगी हो सकते हैं।

संसार ग्रीन के माध्यम से भी किसानों, कृषि विशेषज्ञों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तकनीकी संवाद को आगे बढ़ाने तथा कृषि ज्ञान को खेत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

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गांडेय के गजकुंडा में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह की किसानों संग बैठक, जैविक खेती और ग्रामीण विकास पर मंथन https://haritsansar.com/rajeev-singh-farmer-chaupal-gajkunda-gandey-organic-farming/ Sat, 26 Sep 2026 06:33:00 +0000 https://haritsansar.com/?p=2137 गांडेय (गिरिडीह), 26 सितंबर 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ने और गांवों में कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित करने के उद्देश्य से गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड अंतर्गत गजकुंडा Read More ...

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गांडेय (गिरिडीह), 26 सितंबर 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ने और गांवों में कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित करने के उद्देश्य से गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड अंतर्गत गजकुंडा गांव में शनिवार को किसानों के साथ एक विशेष किसान चौपाल एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने स्थानीय किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि में रुचि रखने वाले लोगों के साथ सीधे संवाद किया। इस दौरान खेती की वर्तमान चुनौतियों, मिट्टी की घटती उर्वरता, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों, फलदार पौधों के माध्यम से अतिरिक्त आय, कृषि प्रशिक्षण तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर सोनाली शर्मा, शुभम कुमार और आंचल सिंह सहित स्थानीय किसानों, युवाओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में कृषि विकास की संभावनाओं और किसानों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर अपने विचार साझा किए।

मिट्टी की सेहत से शुरू होगी टिकाऊ खेती

चौपाल के दौरान राजीव सिंह ने कहा कि खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता का आधार स्वस्थ मिट्टी है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से जैविक पदार्थों, कम्पोस्ट, वर्मीकंपोस्ट, बायो-फर्टिलाइजर्स और लाभकारी सूक्ष्मजीव आधारित कृषि इनपुट्स को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने किसानों को फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही पोषक तत्वों के प्रयोग तथा समय-समय पर मृदा परीक्षण कराने के महत्व की जानकारी दी।

‘हर गाँव फल बगान’ से आय और हरियाली दोनों बढ़ाने की पहल

बैठक में ‘हर गाँव फल बगान’ अभियान पर विशेष चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य गांवों में उपलब्ध खाली जमीन, घरों के आसपास के स्थान, खेतों की मेड़ और उपयुक्त कृषि भूमि पर फलदार पौधों को बढ़ावा देना है।

इसके तहत किसानों और ग्रामीण परिवारों को आम, अमरूद, नींबू, कटहल और आंवला जैसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फलदार पौधे लगाने तथा वैज्ञानिक तरीके से उनका संरक्षण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

राजीव सिंह ने कहा कि यदि फलदार पौधों को योजनाबद्ध तरीके से लगाया जाए तो इससे ग्रामीण परिवारों को पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाले वर्षों में अतिरिक्त और स्थायी आय का स्रोत भी मिल सकता है।

Sansar Green founder Rajiv Singh meeting with farmers in Gajkunda, Gandey, to discuss organic farming, sustainable agriculture and rural development
‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह ने गांडेय के गजकुंडा में किसानों के साथ बैठक की। इस दौरान जैविक खेती, टिकाऊ कृषि, किसानों की आवश्यकताओं और ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

किसानों को प्रशिक्षण और मृदा परीक्षण से जोड़ने की योजना

चर्चा के दौरान Sansar Institute of Agricultural Research & Training (SIART) के माध्यम से गांडेय क्षेत्र में किसानों को चरणबद्ध रूप से वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खाद निर्माण, पौध प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने की योजना साझा की गई।

किसानों के लिए मृदा परीक्षण एवं व्यावहारिक कृषि प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि किसान अनुमान के बजाय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर फसल एवं पोषण प्रबंधन से जुड़े निर्णय ले सकें।

बाजार से सीधा जुड़ाव और FPO को मजबूत करने पर जोर

किसानों ने चौपाल के दौरान बताया कि उत्पादन के बाद उपज का उचित मूल्य प्राप्त करना आज भी बड़ी चुनौती है। कई बार बाजार की सही जानकारी नहीं होने और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

इस पर राजीव सिंह ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सामूहिक विपणन, स्थानीय स्तर पर ग्रेडिंग-पैकिंग तथा डिजिटल मार्केट लिंकेज को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती; किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ना होगा।

“किसान की समृद्धि की शुरुआत स्वस्थ मिट्टी से होती है। हमारा प्रयास है कि किसान वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करें, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें और अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करें। गांडेय के गांवों में कृषि, हरियाली और ग्रामीण उद्यमिता को साथ लेकर आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।”

— राजीव सिंह, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, संसार ग्रीन

किसानों ने रखीं स्थानीय समस्याएं

संवाद के दौरान किसानों ने सिंचाई सुविधाओं की कमी, गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट्स की उपलब्धता, मिट्टी की जांच, तकनीकी मार्गदर्शन तथा फसलों का उचित बाजार मूल्य जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

राजीव सिंह ने कहा कि स्थानीय जरूरतों को समझकर ही प्रभावी कृषि मॉडल विकसित किया जा सकता है। संसार ग्रीन की ओर से किसानों को तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और आवश्यक कृषि मार्गदर्शन से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे।

सोनाली शर्मा, शुभम कुमार और आंचल सिंह ने भी किसानों के साथ संवाद करते हुए स्थानीय स्तर पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा कृषि और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों को गांवों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Sansar Green founder Rajiv Singh discussing organic farming and rural development with farmers in Gajkunda, Gandey
गजकुंडा में किसानों और ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह के बीच कृषि, जैविक खेती और ग्रामीण विकास को लेकर सार्थक संवाद हुआ।

गजकुंडा में होगी जैविक कृषि एवं मृदा संरक्षण कार्यशाला

चौपाल के अंत में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित योजना के तहत अगले माह गजकुंडा गांव में एक दिवसीय ‘जैविक कृषि एवं मृदा संरक्षण कार्यशाला’ आयोजित करने की तैयारी की जाएगी।

कार्यशाला में किसानों को जैविक खाद एवं कम्पोस्ट तैयार करने, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फलदार पौधों के रोपण एवं देखभाल, जैविक कृषि इनपुट्स के सही उपयोग और टिकाऊ खेती की व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

इस पहल को आगे चलकर गांडेय प्रखंड के अन्य गांवों तक विस्तारित करने की भी योजना है, ताकि मिट्टी की सेहत, किसान की आय, ग्रामीण उद्यमिता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए स्थानीय स्तर पर टिकाऊ कृषि विकास का मॉडल तैयार किया जा सके।

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भागलपुर की बेटी रिमी सिंह ने धरहरा में किसान महिलाओं से किया संवाद, पौध वितरण के साथ उन्नत खेती पर हुई चर्चा https://haritsansar.com/rimi-singh-women-farmers-dharhara-gopalpur-bihar/ Wed, 23 Sep 2026 09:02:45 +0000 https://haritsansar.com/?p=2156 गोपालपुर, भागलपुर | 23 सितंबर 2026 भागलपुर की मिट्टी और ग्रामीण जीवन से गहरा जुड़ाव रखने वाली भागलपुर की बेटी रिमी सिंह 23 सितंबर 2026 को भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत धरहरा गांव पहुंचीं। यहां उन्होंने किसान महिलाओं के Read More ...

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गोपालपुर, भागलपुर | 23 सितंबर 2026

भागलपुर की मिट्टी और ग्रामीण जीवन से गहरा जुड़ाव रखने वाली भागलपुर की बेटी रिमी सिंह 23 सितंबर 2026 को भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत धरहरा गांव पहुंचीं। यहां उन्होंने किसान महिलाओं के साथ आत्मीय मुलाकात की और उनके बीच बैठकर खेती-किसानी, स्थानीय कृषि परिस्थितियों, पौध संरक्षण और ग्रामीण जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया।

इस दौरान किसान महिलाओं के बीच पौधों का वितरण भी किया गया। पौधे पाकर महिलाओं में उत्साह नजर आया। पौध वितरण के साथ पौधों की देखभाल, संरक्षण और उन्हें उपयुक्त स्थान पर लगाने से जुड़ी जरूरी बातों पर भी चर्चा की गई। यह पहल गांव में हरियाली, पौध संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में सामने आई।

किसान महिलाओं के बीच बैठकर जाना खेती का अनुभव

धरहरा गांव में रिमी सिंह ने किसान महिलाओं के साथ सीधे संवाद करते हुए उनके खेती-किसानी के अनुभवों को जाना। महिलाओं ने अपने खेतों, फसलों और रोजमर्रा के कृषि कार्यों से जुड़ी बातें साझा कीं।

इस दौरान स्थानीय स्तर पर खेती में आने वाली चुनौतियों, फसल की देखभाल, सिंचाई, मिट्टी की स्थिति और पौधों के विकास से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई। किसान महिलाओं ने अपने अनुभव और सवाल सामने रखे, जिन्हें रिमी सिंह ने ध्यानपूर्वक सुना।

यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें भागलपुर की ग्रामीण किसान महिलाओं का जमीनी अनुभव और कृषि से जुड़ी उनकी व्यावहारिक समझ बातचीत के केंद्र में रही।

किसान महिलाओं के बीच किया पौधों का वितरण

धरहरा गांव में हुई इस मुलाकात का एक प्रमुख आकर्षण पौध वितरण रहा। रिमी सिंह ने किसान महिलाओं को पौधे सौंपे और उन्हें नियमित देखभाल एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

पौधा लगाने के बाद पर्याप्त पानी, उपयुक्त मिट्टी, आवश्यक पोषण और नियमित देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। इसी क्रम में महिलाओं के साथ पौधों की देखभाल और उनके बेहतर विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की गई।

महिलाओं के हाथों में पौधे और उनके बीच खेती एवं हरियाली से जुड़ी चर्चा ने कार्यक्रम को एक जीवंत ग्रामीण स्वरूप दिया।

उन्नत कृषि तकनीकों और आधुनिक खेती पर चर्चा

भागलपुर की बेटी रिमी सिंह ने किसान महिलाओं के साथ उन्नत कृषि तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। बातचीत में मिट्टी की स्थिति को समझने, फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषण प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और पौधों की समय पर देखभाल जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेती में मेहनत के साथ सही जानकारी और उचित कृषि पद्धति भी महत्वपूर्ण होती है। किसान अपनी मिट्टी, फसल और स्थानीय परिस्थितियों की जरूरत को समझकर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर तरीके से उपयोग कर सकते हैं।

किसान महिलाओं ने साझा किए अपने सवाल और अनुभव

मुलाकात के दौरान किसान महिलाओं ने खेती से जुड़े अपने सवाल पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए। भागलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं खेती के अनेक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

बीज लगाने से लेकर पौधों की देखभाल, निराई-गुड़ाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन तक कृषि की कई गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। ऐसे में महिलाओं तक कृषि संबंधी नई और उपयोगी जानकारी पहुंचाना तथा उनके पारंपरिक और व्यावहारिक अनुभवों को समझना ग्रामीण कृषि संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मिट्टी, पौधे और किसान के बीच बेहतर तालमेल पर जोर

चर्चा के दौरान खेती में मिट्टी, पौधे और किसान की समझ के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी बात हुई। पौधे की जरूरत को समझना, मिट्टी की स्थिति के अनुरूप पौध प्रबंधन करना, पानी का संतुलित उपयोग और समय-समय पर पौधों की निगरानी बेहतर खेती के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

इस संवाद ने खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए पौधों को समझने, उनकी जरूरत पहचानने और सही तरीके से देखभाल करने की दिशा में भी ध्यान आकर्षित किया।

धरहरा में दिखी किसान महिलाओं की सक्रिय भागीदारी

धरहरा गांव में हुई इस मुलाकात के दौरान किसान महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। महिलाएं न केवल अपनी खेती से जुड़े अनुभव साझा कर रही थीं, बल्कि पौधों और कृषि तकनीकों को लेकर अपनी जिज्ञासाएं भी सामने रख रही थीं।

भागलपुर की बेटी रिमी सिंह और धरहरा गांव की किसान महिलाओं के बीच यह संवाद ग्रामीण कृषि जीवन की उस तस्वीर को सामने लाता है, जहां पारंपरिक अनुभव, नई कृषि जानकारी और प्रकृति के प्रति जुड़ाव एक साथ दिखाई देते हैं।

भागलपुर की बेटी का अपनी मिट्टी और लोगों से जुड़ाव

रिमी सिंह के लिए यह कार्यक्रम केवल एक ग्रामीण कृषि संवाद तक सीमित नहीं रहा। भागलपुर की बेटी के रूप में अपने क्षेत्र की किसान महिलाओं के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनना, उनके अनुभवों को समझना और उनके साथ पौध संरक्षण तथा बेहतर खेती पर चर्चा करना इस मुलाकात को एक आत्मीय स्वरूप देता है।

भागलपुर की कृषि परंपरा और ग्रामीण जीवन से उनका जुड़ाव इस संवाद में साफ दिखाई दिया। किसान महिलाओं के बीच बैठकर बातचीत करने और उन्हें पौधे सौंपने के माध्यम से स्थानीय स्तर पर हरियाली, कृषि जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी का संदेश भी सामने आया।

खेती की चर्चा से पौध संरक्षण तक पहुंचा संवाद

23 सितंबर 2026 को भागलपुर के धरहरा गांव में हुई यह मुलाकात केवल खेती-किसानी पर बातचीत तक सीमित नहीं रही। किसान महिलाओं से सीधा संवाद, उन्नत कृषि तकनीकों पर चर्चा और पौधों का वितरण—इन तीनों पहलुओं ने इस कार्यक्रम को विशेष बनाया।

किसान महिलाओं को पौधे सौंपना इस मुलाकात का खास क्षण रहा। इससे ग्रामीण महिलाओं को पौधों की देखभाल, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का संदेश भी मिला।

भागलपुर की धरती पर भागलपुर की बेटी रिमी सिंह और किसान महिलाओं के बीच हुआ यह संवाद उस सोच को सामने लाता है कि जब ग्रामीण महिलाओं का कृषि अनुभव, आधुनिक खेती की जानकारी और पौध संरक्षण की भावना एक साथ जुड़ती है, तो गांवों में बेहतर खेती, ज्ञान और हरियाली को आगे बढ़ाने की नई संभावनाएं बनती हैं।

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हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित https://haritsansar.com/rajeev-singh-sansar-green-harit-sansar-green-jharkhand-vision/ Thu, 20 Aug 2026 16:08:29 +0000 https://haritsansar.com/?p=2122 🌱 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित रांची स्थित उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में हाल ही में जैविक खेती (Organic Farming) और टिकाऊ कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण Read More ...

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🌱 हरित कृषि की दिशा में एक कदम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित

रांची स्थित उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में हाल ही में जैविक खेती (Organic Farming) और टिकाऊ कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर कृषि नवाचार, पर्यावरण स्थिरता और किसानों को सशक्त बनाने में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘संसार ग्रीन’ और ‘हरित संसार’ के संस्थापक राजीव सिंह को सम्मानित किया गया। 🙏
विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान, उन्होंने निदेशक और वरिष्ठ संकाय सदस्यों के साथ एक सार्थक संवाद किया। इस चर्चा का मुख्य केंद्र झारखंड में जैविक कृषि का भविष्य, कृषि अनुसंधान, उभरती हुई तकनीकें, किसान प्रशिक्षण और ग्रामीण उद्यमिता (Rural Entrepreneurship) रहा।

🌿 जैविक खेती: झारखंड के लिए एक सुनहरा अवसर

झारखंड की समृद्ध जैव विविधता, अनुकूल जलवायु और पारंपरिक कृषि पद्धतियां प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं।
कृषि के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ लाना अत्यंत आवश्यक है। वैज्ञानिक मृदा परीक्षण (Soil Testing) के माध्यम से मिट्टी और फसलों की सटीक पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से समझा जा सकता है। इससे किसान रसायनों के सामान्य उपयोग से हटकर, जरूरत-आधारित और सटीक खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
राजीव सिंह, संस्थापक संसार ग्रीन एवं हरित संसार, उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी रांची में सम्मान ग्रहण करते हुए। मुलाकात के दौरान झारखंड में जैविक खेती, मिट्टी आधारित कृषि समाधान, आधुनिक तकनीक, किसान सशक्तिकरण और हरित झारखंड के विजन पर चर्चा हुई।
उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी, रांची में संसार ग्रीन एवं हरित संसार के संस्थापक राजीव सिंह को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर झारखंड में जैविक कृषि के भविष्य, मृदा स्वास्थ्य, स्थानीय कृषि समाधान और किसानों को विज्ञान एवं बाजार से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ।

🔬 स्थानीय मिट्टी के लिए स्थानीय समाधान

चूंकि अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सूक्ष्म पोषक तत्वों और लाभदायक सूक्ष्मजीवों का स्तर अलग-अलग होता है, इसलिए कृषि समाधान भी स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होने चाहिए।
संसार ग्रीन इसी वैज्ञानिक और एकीकृत दृष्टिकोण पर काम कर रहा है, जिसका मुख्य ध्यान निम्नलिखित बातों पर है:
  • मिट्टी के अनुकूल बायो-इनपुट (Bio-inputs) और सूक्ष्मजैविक समाधान (Microbial solutions)।
  • सटीक मृदा परीक्षण और फसल आधारित सलाह।
  • किसानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना (Market linkages)।

🌳 हरित संसार: खेतों से परे एक सामाजिक मिशन

कृषि के अलावा, हरित संसार प्राकृतिक खेती, पर्यावरण जागरूकता, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण के प्रति एक व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। इसका विजन किसानों, छात्रों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों को एक साथ लाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना और एक हरा-भरा भविष्य तैयार करना है।

👨‍🌾 युवाओं और किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर

जैविक कृषि झारखंड में ग्रामीण उद्यमिता का एक प्रमुख चालक बन सकती है। युवाओं को कृषि को एक नवाचार (Innovation) के रूप में देखने के लिए प्रेरित करने से ग्रामीण समुदायों में आजीविका के कई नए अवसर पैदा हो सकते हैं, जैसे:
  • बायो-इनपुट उत्पादन और कृषि प्रसंस्करण (Agricultural processing)।
  • मूल्य संवर्धन (Value addition) और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग।
  • तकनीकी सेवाएं और नए एग्री-स्टार्टअप्स (Agri-startups)।

🚜 “खेत से मंडी तक” का एक व्यापक दृष्टिकोण

इस सम्मान को प्राप्त करने के बाद अपने विचार साझा करते हुए राजीव सिंह ने कहा:
“यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह मुझे अधिक जिम्मेदारी और नई प्रेरणा देता है। मेरा सपना है कि झारखंड के किसान अपनी मिट्टी की वास्तविक क्षमता को समझें और विज्ञान, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक आत्मनिर्भर और समृद्ध बनें।”
“खेत से मंडी तक” (From Soil to Mandi) का यह दृष्टिकोण एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखता है, जो मिट्टी की जांच से लेकर तकनीक, प्रशिक्षण और अंततः बाजार तक पहुंच को एक सूत्र में पिरोता हो।

🤝 एक साझा भविष्य: शिक्षाविद, विज्ञान, किसान और युवा

झारखंड में टिकाऊ कृषि का भविष्य बनाने में विश्वविद्यालयों, कृषि वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, उद्यमियों, किसानों और युवाओं का संयुक्त सहयोग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिक सोच और मजबूत सामुदायिक भागीदारी के साथ, झारखंड जैविक खेती का अपना एक विशिष्ट और सफल मॉडल विकसित कर सकता है।
🙏 इस सम्मान, आतिथ्य और सार्थक संवाद के लिए उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी का हार्दिक आभार। यह पहचान झारखंड के किसानों, मिट्टी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए और भी अधिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने की एक बड़ी प्रेरणा है। 🌱
स्वस्थ मिट्टी • समृद्ध किसान • हरा-भरा झारखंड 🌾
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IGKV रायपुर में राजीव सिंह ने बताया ग्रामीण उद्यमिता का परिवर्तनकारी सामर्थ्य https://haritsansar.com/rajeev-singh-rural-entrepreneurship-igkv-raipur/ Thu, 13 Aug 2026 16:28:41 +0000 https://haritsansar.com/?p=2119 IGKV रायपुर में राजीव सिंह ने बताया ग्रामीण उद्यमिता का परिवर्तनकारी सामर्थ्य रायपुर, 13 अगस्त 2026: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर में 13 अगस्त 2026 को “ग्रामीण उद्यमिता: नवाचार, उद्यम और सतत आजीविका” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया Read More ...

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IGKV रायपुर में राजीव सिंह ने बताया ग्रामीण उद्यमिता का परिवर्तनकारी सामर्थ्य

रायपुर, 13 अगस्त 2026:

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर में 13 अगस्त 2026 को “ग्रामीण उद्यमिता: नवाचार, उद्यम और सतत आजीविका” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और भावी उद्यमियों ने भाग लिया। सेमिनार का उद्देश्य यह समझना था कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण भारत में टिकाऊ आजीविका और रोजगार के नए अवसर कैसे विकसित किए जा सकते हैं।

Sansar Green के संस्थापक राजीव सिंह ने कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। झारखंड के प्रमुख कृषि उद्यमी, पर्यावरणविद् और प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ के रूप में पहचान रखने वाले सिंह को सतत कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक कृषि आदानों, पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण उद्यम विकास का व्यापक अनुभव है। वह आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कृषि विशेषज्ञ के रूप में किसानों के साथ व्यावहारिक कृषि ज्ञान भी साझा कर चुके हैं।

कार्यक्रम में IGKV के कुलपति प्रो. गिरीश चंदेल, अनुसंधान सेवाओं के निदेशक डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी, विस्तार सेवाओं के निदेशक डॉ. एस. एस. टुटेजा, डीन डॉ. आरती गुहे, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, शिक्षक और विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं कृषि विस्तार व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अपने मुख्य संबोधन में राजीव सिंह ने कहा कि ग्रामीण भारत को अब केवल कृषि उपज और कच्चे माल के स्रोत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और बाजार तक पहुंच के उचित समन्वय से गांव नवाचार, प्रसंस्करण, विनिर्माण, मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन के प्रभावी केंद्र बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में किसान मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्त्वों की सही जानकारी के बिना ही उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों का प्रयोग करते हैं। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है, आदानों की उपयोग-दक्षता कम हो सकती है और लंबे समय में मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

नियमित मृदा परीक्षण, स्थान-विशिष्ट सूक्ष्मजीवी समाधान और फसल-विशिष्ट पोषण प्रबंधन के माध्यम से किसान अधिक वैज्ञानिक निर्णय ले सकते हैं। इससे आवश्यकतानुसार कृषि आदानों का उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है और कम लागत में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

सिंह ने Sansar Green के “मिट्टी से मंडी तक” मॉडल को भी प्रस्तुत किया। यह एक एकीकृत कृषि व्यवस्था है, जो मृदा परीक्षण, मिट्टी और फसल के अनुसार जैविक कृषि आदानों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फसल परामर्श, किसान प्रशिक्षण, उपज संग्रह, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को एक मंच पर जोड़ती है।

इस मॉडल में निहित नवाचार की चर्चा करते हुए उन्होंने स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल लाभकारी सूक्ष्मजीवी स्ट्रेन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र के लिए विकसित कृषि समाधान दूसरे क्षेत्र में समान परिणाम नहीं दे सकते, क्योंकि मिट्टी की संरचना, तापमान, वर्षा, फसल और खेती की पद्धतियों में काफी अंतर होता है।

उन्होंने कहा कि जैव उर्वरकों और जैविक फसल समाधानों का चयन प्रत्येक क्षेत्र की मिट्टी, फसल, जलवायु और पोषक तत्त्वों की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। यह स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित दृष्टिकोण कृषि आदानों की दक्षता बढ़ाने, मिट्टी की जैविक सक्रियता को मजबूत करने और किसानों को अधिक विश्वसनीय परिणाम देने में सहायक हो सकता है।

युवाओं के लिए उपलब्ध उद्यमिता के अवसरों की चर्चा करते हुए सिंह ने जैविक कृषि आदान निर्माण, मृदा परीक्षण सेवाओं, बीज उत्पादन, पौधशाला विकास, कृषि मशीनरी सेवाओं, अनाज की सफाई और ग्रेडिंग, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि परिवहन, पैकेजिंग, डिजिटल फसल परामर्श तथा उपभोक्ताओं को सीधे कृषि उत्पाद बेचने जैसे क्षेत्रों को संभावनाशील बताया।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी उद्यमिता यात्रा की शुरुआत गांवों का भ्रमण करने, किसानों से सीधे संवाद स्थापित करने और जमीनी स्तर की वास्तविक समस्याओं को समझने से करें। उनके अनुसार, सफल ग्रामीण उद्यम वही है जो किसानों को किफायती, व्यावहारिक और बड़े स्तर पर लागू किया जा सकने वाला समाधान उपलब्ध कराए तथा उसके लाभ को प्रमाणित भी कर सके।

सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल विपणन के आधार पर किसानों का विश्वास नहीं जीता जा सकता। ग्रामीण उद्यमों को उत्पाद की निरंतर गुणवत्ता, पारदर्शी संवाद, विश्वसनीय तकनीकी मार्गदर्शन और खेतों में सत्यापित परिणामों के माध्यम से अपनी विश्वसनीयता स्थापित करनी होगी।

मुख्य संबोधन के बाद आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने स्टार्टअप वित्तपोषण, इनक्यूबेशन, उत्पाद विकास, प्रमाणन, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण, डिजिटल मार्केटिंग और कृषि उद्यम स्थापित करने से संबंधित चुनौतियों पर प्रश्न पूछे। सिंह ने अपनी उद्यमशीलता यात्रा के अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को पूर्ण व्यावसायिक मॉडल विकसित करने से पहले अपने विचारों का खेतों में परीक्षण और सत्यापन करने की सलाह दी।

प्रो. गिरीश चंदेल ने वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों, स्टार्टअप और ग्रामीण उद्योगों से जोड़ने में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता आधारित कृषि शिक्षा विद्यार्थियों को नवप्रवर्तक और रोजगार सृजक बनने के लिए प्रेरित कर सकती है।

डॉ. एस. एस. टुटेजा ने वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कृषि तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विस्तार व्यवस्था और ग्रामीण उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने वैज्ञानिक गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखते हुए शोध के परिणामों को व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रूप से उपयोगी समाधानों में बदलने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम का समापन कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप, किसानों, सरकारी संस्थानों और ग्रामीण समुदायों के बीच मजबूत सहयोग के आह्वान के साथ हुआ। सेमिनार ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से टिकाऊ आजीविका और रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, स्थानीय मूल्य संवर्धन और किसानों की बाजार तक पहुंच को भी मजबूत किया जा सकता है।

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