Harit Sansar | Tree Plantation & Green Mission by Rajeev Singh https://haritsansar.com/category/news/ (मिलकर लाएँ हरियाली) Sun, 11 Oct 2026 08:44:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://haritsansar.com/wp-content/uploads/2026/05/cropped-Logo-harit-sansar-32x32.png Harit Sansar | Tree Plantation & Green Mission by Rajeev Singh https://haritsansar.com/category/news/ 32 32 पुरखों का ज्ञान, जंगलों की पहचान: द टाइम्स ऑफ इंडिया में राजीव सिंह के होड़ोपैथी संरक्षण अभियान को प्रमुख स्थान https://haritsansar.com/times-of-india-hodopathy-adivasi-heritage-forest-conservation/ Sun, 11 Oct 2026 08:44:33 +0000 https://haritsansar.com/?p=2224 द टाइम्स ऑफ इंडिया | रांची संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 आदिवासी बुजुर्गों के अनुभवों में संजोया सदियों पुराना ज्ञान केवल एक चिकित्सा परंपरा नहीं, बल्कि जंगलों, औषधीय पौधों और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध की अमूल्य विरासत भी Read More ...

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द टाइम्स ऑफ इंडिया | रांची संस्करण | 9 अक्टूबर 2026

आदिवासी बुजुर्गों के अनुभवों में संजोया सदियों पुराना ज्ञान केवल एक चिकित्सा परंपरा नहीं, बल्कि जंगलों, औषधीय पौधों और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध की अमूल्य विरासत भी है। इस विरासत को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए पर्यावरणविद् राजीव सिंह द्वारा शुरू किए गए होड़ोपैथी संरक्षण अभियान को द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया।

समाचार में गिरिडीह में Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com के लोकार्पण को रेखांकित किया गया। इन वेबसाइटों के माध्यम से आदिवासी बुजुर्गों, पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय जानकारों के अनुभवों को संकलित कर सुरक्षित रखने की योजना है, ताकि पीढ़ियों से मौखिक रूप में आगे बढ़ता यह ज्ञान समय के साथ विलुप्त न हो।

अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बुजुर्गों के अनुभवों को युवाओं की भागीदारी से जोड़ना है। इसके तहत पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल दस्तावेजीकरण, औषधीय वनस्पतियों पर पुस्तक प्रकाशन और युवाओं को पौधों की पहचान एवं संरक्षण का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। शोध संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक अध्ययन की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा।

गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क को अभियान से जोड़कर औषधीय पौधों के संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

राजीव सिंह ने संदेश दिया कि यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए पारंपरिक ज्ञान को बचाना है, तो उन जंगलों और औषधीय वनस्पतियों को भी सुरक्षित रखना होगा, जिनसे यह ज्ञान सदियों से जुड़ा है।

यह अभियान प्रकृति संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी, आदिवासी ज्ञानधारकों के सम्मान और युवाओं की सक्रिय भूमिका को महत्व देता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को केवल दस्तावेजों में सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उसे पौधों, जंगलों और जैव विविधता के संरक्षण की जागरूकता से जोड़ना भी है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित यह समाचार संदेश देता है कि प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण एक-दूसरे से जुड़ी जिम्मेदारियां हैं। बुजुर्गों की सीख और युवाओं के प्रयास मिलकर इस विरासत को भविष्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

साभार: द टाइम्स ऑफ इंडिया, रांची संस्करण, पृष्ठ 5, 9 अक्टूबर 2026।

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पारंपरिक आदिवासी ज्ञान को शोध और संरक्षण से जोड़ने की पहल, प्रभात खबर में राजीव सिंह का होड़ोपैथी अभियान https://haritsansar.com/prabhat-khabar-rajeev-singh-hodopathy-research-conservation/ Sun, 11 Oct 2026 06:53:26 +0000 https://haritsansar.com/?p=2219 प्रभात खबर | झारखंड संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी पारंपरिक ज्ञान-विरासत को वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण से जोड़ने की पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को प्रभात Read More ...

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प्रभात खबर | झारखंड संस्करण | 9 अक्टूबर 2026

झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी पारंपरिक ज्ञान-विरासत को वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण से जोड़ने की पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को प्रभात खबर ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। समाचार में होड़ोपैथी संरक्षण अभियान, पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को विशेष स्थान दिया गया।

गिरिडीह में आयोजित कार्यक्रम में Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com का शुभारंभ किया गया। इन डिजिटल मंचों के माध्यम से आदिवासी बुजुर्गों, पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय ज्ञानधारकों के अनुभवों को संकलित कर सुरक्षित रखने की योजना है। इसका उद्देश्य पीढ़ियों से मौखिक परंपराओं के माध्यम से संरक्षित ज्ञान को व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत करना तथा भविष्य में अध्ययन और संरक्षण के लिए उपयोगी आधार तैयार करना है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, अभियान तीन चरणों में आगे बढ़ेगा। पहले चरण में पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में अनुभवी वैद्यों के अनुभवों और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित पुस्तक प्रकाशित करने की योजना है। तीसरे चरण में युवाओं को औषधीय पौधों की पहचान, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण देने के साथ शोध संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक अध्ययन की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा।

इस अभियान से गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क को भी जोड़ा गया है, जहां औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन के साथ स्थानीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य है। यह पहल पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को उससे जुड़े प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों और पर्यावरणीय संतुलन से जोड़ती है।

राजीव सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को बचाने के लिए उन औषधीय पौधों और जंगलों का संरक्षण भी आवश्यक है, जिनसे यह ज्ञान पीढ़ियों से जुड़ा रहा है। अभियान में ज्ञानधारकों की सहमति, अधिकारों और योगदान के सम्मान को प्राथमिकता देते हुए बुजुर्गों के अनुभवों, युवाओं की भागीदारी और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

होड़ोपैथी संरक्षण की इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए प्रभात खबर का आभार। यह मीडिया कवरेज झारखंड की आदिवासी ज्ञान-विरासत, औषधीय वनस्पतियों और वन जैव विविधता के संरक्षण के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगी।

साभार: प्रभात खबर, झारखंड संस्करण, 9 अक्टूबर 2026।

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दैनिक जागरण में राजीव सिंह की होड़ोपैथी संरक्षण पहल को प्रमुखता, आदिवासी ज्ञान-विरासत और औषधीय पौधों को बचाने का अभियान https://haritsansar.com/dainik-jagran-hodopathy-conservation-rajeev-singh-giridih-2026/ Sat, 10 Oct 2026 06:20:00 +0000 https://haritsansar.com/?p=2212 झारखंड की सदियों पुरानी आदिवासी चिकित्सा परंपरा, पारंपरिक ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और जंगलों के संरक्षण के लिए गिरिडीह में तीन वेबसाइटों का लोकार्पण। दैनिक जागरण | धनबाद संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 गिरिडीह, झारखंड: पर्यावरणविद्, कृषि उद्यमी एवं सतत विकास Read More ...

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झारखंड की सदियों पुरानी आदिवासी चिकित्सा परंपरा, पारंपरिक ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और जंगलों के संरक्षण के लिए गिरिडीह में तीन वेबसाइटों का लोकार्पण।

दैनिक जागरण | धनबाद संस्करण | 9 अक्टूबर 2026

गिरिडीह, झारखंड: पर्यावरणविद्, कृषि उद्यमी एवं सतत विकास के क्षेत्र में सक्रिय राजीव सिंह द्वारा झारखंड की पारंपरिक आदिवासी चिकित्सा पद्धति होड़ोपैथी (Hodopathy) और उससे जुड़ी सदियों पुरानी ज्ञान-विरासत के संरक्षण के लिए शुरू की गई पहल को देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया।

“गिरिडीह में होड़ोपैथी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण की पहल” शीर्षक से प्रकाशित समाचार में आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, औषधीय पौधों के संरक्षण, जंगलों की जैव विविधता को सुरक्षित रखने तथा इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।

इस अभियान के अंतर्गत राजीव सिंह के गिरिडीह स्थित आवासीय कार्यालय में तीन समर्पित डिजिटल मंचों — Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com — का लोकार्पण किया गया। इन वेबसाइटों का उद्देश्य आदिवासी बुजुर्गों, अनुभवी पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय वनस्पति जानकारों के अनुभवों एवं ज्ञान को व्यवस्थित रूप से संकलित और संरक्षित करना है।

यह पहल गिरिडीह जिले के गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क से भी जुड़ी है, जिसके माध्यम से पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ औषधीय पौधों के संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सदियों पुराने आदिवासी ज्ञान को संरक्षित करने का प्रयास

झारखंड के आदिवासी समुदायों के पास जंगलों, औषधीय पौधों और उनके पारंपरिक उपयोगों से संबंधित पीढ़ियों पुराना ज्ञान है। इसका बड़ा हिस्सा आज भी मौखिक परंपराओं और बुजुर्गों के अनुभवों में सुरक्षित है।

राजीव सिंह और उनकी टीम अनुभवी पारंपरिक वैद्यों, आदिवासी बुजुर्गों और स्थानीय जानकारों से संवाद कर उनके अनुभवों तथा औषधीय वनस्पतियों से जुड़ी जानकारी का दस्तावेजीकरण कर रही है।

संकलित जानकारी की तथ्य-जाँच और उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य से तुलना भी की जा रही है, ताकि इस ज्ञान को जिम्मेदारीपूर्वक संरक्षित किया जा सके और भविष्य में वैज्ञानिक अध्ययन के लिए आधार तैयार हो।

डिजिटल संग्रह, पुस्तक प्रकाशन और युवाओं को प्रशिक्षण

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अभियान को तीन चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है।

पहले चरण में पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में वरिष्ठ पारंपरिक वैद्यों के अनुभवों, औषधीय वनस्पतियों की पहचान और उनके पारंपरिक उपयोगों पर आधारित पुस्तक प्रकाशित करने की योजना है।

तीसरे चरण में युवाओं को औषधीय पौधों की पहचान, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ शोध संस्थानों के सहयोग से चयनित पारंपरिक उपचार पद्धतियों की प्रभावशीलता और सुरक्षा का वैज्ञानिक अध्ययन करने का भी प्रयास होगा।

औषधीय पौधों और जंगलों का संरक्षण भी प्राथमिकता

राजीव सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि होड़ोपैथी के ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए उन औषधीय पौधों और जंगलों का संरक्षण भी आवश्यक है, जिनसे यह परंपरा जुड़ी हुई है।

अभियान के माध्यम से स्थानीय औषधीय वनस्पतियों की पहचान, पौधरोपण, संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने पारंपरिक वैद्यों, आदिवासी बुजुर्गों, वनस्पति विशेषज्ञों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

दस्तावेजीकरण के दौरान पारंपरिक ज्ञानधारकों की सहमति, अधिकारों और योगदान के सम्मान को प्राथमिकता दी जाएगी।

कार्यक्रम में आदिवासी समाज और स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी

वेबसाइटों के लोकार्पण कार्यक्रम में सीए राकेश, रिमी सिंह, समन, शुभम, सोनाली, आंचल सिंह, आनंद मुर्मू, विनीता टुडू और मनोज हेंब्रम सहित पारंपरिक वैद्य, आदिवासी समाज के प्रतिनिधि तथा अन्य सहयोगी उपस्थित थे।

यह पहल चार प्रमुख उद्देश्यों — ज्ञान का संरक्षण, पौधों की सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और ज्ञान का प्रसार — पर आधारित है।

राजीव सिंह ने इस संरक्षण अभियान को समाचार पत्र में स्थान देने के लिए दैनिक जागरण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और जंगलों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में ऐसे समाचारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस अभियान का दीर्घकालिक उद्देश्य झारखंड की समृद्ध आदिवासी ज्ञान-विरासत को सम्मानपूर्वक संरक्षित करते हुए उसे नई पीढ़ी, वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है।

The post दैनिक जागरण में राजीव सिंह की होड़ोपैथी संरक्षण पहल को प्रमुखता, आदिवासी ज्ञान-विरासत और औषधीय पौधों को बचाने का अभियान appeared first on हरित संसार.

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